केरल में बीडीएस छात्र नितिन राज मौत मामले में मुख्य आरोपी को अदालत से राहत मिलने के बाद राज्य सरकार ने नई एसआईटी गठित कर जांच के आदेश दिए हैं। परिवार ने पुरानी जांच पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
तिरुवंतपुरम: केरल में बीडीएस छात्र नितिन राज की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्य आरोपी डॉ. एम.के. राम को प्रक्रियागत खामियों के आधार पर अदालत से राहत मिलने के बाद राज्य सरकार ने मामले की नई जांच के आदेश दिए हैं। केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इस घटनाक्रम पर नाराजगी जताते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) से तत्काल रिपोर्ट मांगी है और अपराध शाखा (Crime Branch) की जांच में हुई कथित चूक पर स्पष्टीकरण तलब किया है।
सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए आईजी अजीता बेगम के नेतृत्व में एक नया विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है। साथ ही उत्तर क्षेत्र के आईजी को यह जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है कि जांच प्रक्रिया में आखिर कहां और कैसे त्रुटियां हुईं।
अदालत ने प्रक्रियागत खामियों के आधार पर दी राहत
मामले में नया मोड़ तब आया जब थालास्सेरी प्रधान सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपी डॉ. एम.के. राम को रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी के दौरान अनिवार्य कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था। जांच एजेंसी पर आरोप है कि आरोपी को गिरफ्तारी के लिखित कारण उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके अलावा गिरफ्तारी की सूचना समय पर सरकारी वकील (Public Prosecutor) को भी नहीं दी गई। अदालत ने इन प्रक्रियागत कमियों को गंभीर मानते हुए आरोपी को राहत प्रदान की।
अदालत से रिहाई के तुरंत बाद फिर हिरासत
अदालत के आदेश के बाद जैसे ही डॉ. राम रिहा हुए, अपराध शाखा की टीम ने उन्हें अदालत परिसर से ही दोबारा हिरासत में ले लिया। बचाव पक्ष ने इस कार्रवाई को कानून के विपरीत बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई। बाद में देर रात जांच एजेंसी ने आरोपी को दो दिन बाद पूछताछ के लिए उपस्थित होने का नोटिस जारी किया। इस घटनाक्रम ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर और अधिक सवाल खड़े कर दिए।
गृह मंत्री ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने पूरे मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जांच में सामने आई कमियों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। उन्होंने डीजीपी से तत्काल रिपोर्ट मांगी और अपराध शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों को जांच में हुई चूकों का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। सरकार का कहना है कि नई जांच का उद्देश्य मामले से जुड़े सभी संदेहों को दूर करना और पीड़ित परिवार का विश्वास बहाल करना है।
नई एसआईटी करेगी जांच
सरकार ने आईजी अजीता बेगम की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है। नई टीम अब मामले की शुरुआत से सभी साक्ष्यों, दस्तावेजों और जांच प्रक्रिया की समीक्षा करेगी। उत्तर क्षेत्र के आईजी को अलग से यह पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है कि गिरफ्तारी और जांच के दौरान किन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए क्या सुधार आवश्यक हैं।
परिवार ने नई जांच का किया स्वागत
नितिन राज के परिवार ने नई जांच टीम के गठन का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही मौजूदा अपराध शाखा पर भरोसा खोने की बात भी कही है। छात्र की मां का आरोप है कि पुलिस और आरोपी के बीच कथित मिलीभगत के कारण मुख्य आरोपी को कानूनी राहत मिली। उनका कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और समय पर होती, तो मामला इस स्थिति तक नहीं पहुंचता। परिवार ने नई एसआईटी से निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की उम्मीद जताई है।
नितिन राज की मौत ने उठाए गंभीर सवाल
नितिन राज, जो एक दलित बीडीएस छात्र थे, का 10 अप्रैल को निधन हो गया था। प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या का मामला बताया गया। हालांकि परिवार का आरोप है कि कॉलेज के कुछ फैकल्टी सदस्यों द्वारा लगातार जातिगत उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के कारण नितिन ने यह कदम उठाया। इस मामले ने पूरे राज्य में जातीय भेदभाव, छात्र सुरक्षा और संस्थानों की जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी।
जांच की दिशा पर भी उठे सवाल
परिजनों का आरोप है कि शुरुआती जांच के दौरान स्थानीय पुलिस ने मामले को शिक्षा संस्थान में कथित उत्पीड़न के बजाय कर्ज से जुड़े विवाद की दिशा में मोड़ने का प्रयास किया। परिवार का यह भी दावा है कि इसी कारण मुख्य आरोपी लगभग 101 दिनों तक गिरफ्तारी से बचा रहा। बाद में जांच एजेंसियों ने बेंगलुरु में उसकी लोकेशन का पता लगाकर कर्नाटक के कोडागु जिले से उसे गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के बाद भी विवाद
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी से पहले उच्च न्यायालयों ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बावजूद गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कथित कानूनी चूक सामने आने के बाद पूरा मामला फिर विवादों में आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आपराधिक मामले में प्रक्रियागत नियमों का पालन बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि कानूनी प्रक्रिया में त्रुटियां होती हैं, तो इससे पूरी जांच प्रभावित हो सकती है और अदालत में मामला कमजोर पड़ सकता है।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि यदि जातीय उत्पीड़न के आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी प्रक्रियागत गलतियां दोबारा न हों।









