केरल में 2026 के विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही राजनीतिक पटल पर हलचल तेज हो गई है। राज्य में कुल 140 विधानसभा सीटों में से लगभग 32 सीटों पर मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इनमें से विशेष रूप से चेरामन जुमा मस्जिद के आसपास के क्षेत्र में मुस्लिम आबादी इतनी संगठित है कि यहां की 13 में से 12 सीटें लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के कब्जे में हैं। यह इलाके की मुस्लिम आबादी की शक्ति और संगठन को दर्शाता है। मस्जिद का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी मुस्लिम समुदाय को इस क्षेत्र में मजबूत बनाता है।
चेरामन जुमा मस्जिद का ऐतिहासिक महत्व
चेरामन जुमा मस्जिद की स्थापना 629 ईस्वी में हुई थी और इसे भारत की पहली मस्जिद और दुनिया की दूसरी मस्जिद माना जाता है। 7वीं सदी में मालाबार के राजा चेरामन को एक सपना आया, जिसमें उन्होंने देखा कि आसमान में चांद के दो टुकड़े हो गए हैं। उन्होंने इस सपने की व्याख्या करने के लिए दरबार में ज्योतिषियों को बुलाया, लेकिन संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।
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इसी दौरान अरब से आए मुस्लिम व्यापारी उनसे मिले और पैगंबर मोहम्मद के बारे में बताया। राजा चेरामन पैगंबर से मिलने के लिए मक्का गए, जहां उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार किया और पैगंबर ने उन्हें ‘ताजुद्दीन’ नाम दिया। राजा लौटते समय ओमान में उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन उन्होंने अपने अधिकारियों को आदेश दिया कि कोडंगलूर में मस्जिद बनवाई जाए। इसके बाद 629 ईस्वी में चेरामन जुमा मस्जिद की स्थापना हुई।
मस्जिद न केवल धार्मिक केंद्र बनी, बल्कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय मपिल्ला के विकास और संगठित होने का केंद्र भी रही। इस इलाके की मुस्लिम आबादी ने समाज और राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुस्लिम वोटर और केरल की राजनीति
चेरामन जुमा मस्जिद के आसपास मुस्लिम आबादी की प्रभावशीलता के कारण यह क्षेत्र चुनावी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च के अनुसार, राज्य की 50 से 55 सीटों पर मुस्लिम वोटर्स निर्णायक होते हैं। इनमें से 25-30 सीटों पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के उम्मीदवार चुनाव में उतरते हैं।
राज्य की कुल आबादी में लगभग 26.5% मुस्लिम हैं। इसका मतलब यह है कि राज्य की राजनीति में मुस्लिम वोटर किसी भी गठबंधन के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। चेरामन जुमा मस्जिद का क्षेत्र इसीलिए राजनीतिक दलों के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
चुनावी रणनीति और सामाजिक प्रभाव
केरल में लंबे समय से कांग्रेस और LDF के बीच चुनावी मुकाबला चलता रहा है। हाल के वर्षों में बीजेपी भी राज्य में अपनी पकड़ बनाने का प्रयास कर रही है, खासकर हिंदुत्व आधारित वोट बैंक के जरिए। हालांकि मुस्लिम समुदाय की संगठित उपस्थिति बीजेपी की योजनाओं को चुनौती देती है।
पॉलिटिकल एनालिस्ट सुमंत सी रमण का कहना है कि केरल के लोग धर्म के आधार पर आसानी से विभाजित नहीं होते, क्योंकि इस राज्य में इस्लाम समुद्र के रास्ते व्यापार और रिश्तों के माध्यम से आया था, घुड़सवार सेनाओं और युद्धों के माध्यम से नहीं। हालांकि, हाल के वर्षों में मुस्लिम वोटिंग पैटर्न में बदलाव आया है, जहां कुछ मुस्लिम वोटर्स अब सीपीएम से हटकर कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं।
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि चेरामन जुमा मस्जिद और उसके आसपास के मुस्लिम वोटर केवल धर्म या धार्मिक पहचान के कारण नहीं, बल्कि सामुदायिक संगठनों और सामाजिक दृष्टिकोण के कारण भी निर्णायक हैं। यह क्षेत्र राज्य की राजनीतिक तस्वीर को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।









