LinkedIn पर यूजर्स की ट्रैकिंग को लेकर नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। BrowserGate के मुताबिक, प्लेटफॉर्म ब्राउजर स्क्रिप्ट के जरिए हजारों एक्सटेंशन और डिवाइस डेटा स्कैन कर सकता है। इससे यूजर की डिजिटल पहचान और गतिविधियों की प्रोफाइलिंग का खतरा बढ़ता दिख रहा है।
LinkedIn Data Tracking Report: BrowserGate की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि LinkedIn यूजर्स के ब्राउजर और डिवाइस से जुड़ी जानकारी ट्रैक कर सकता है, जिसमें एक्सटेंशन डेटा, CPU, लोकेशन सेटिंग और अन्य हार्डवेयर डिटेल शामिल हैं। यह मामला 2026 में सामने आया है और इसमें LinkedIn पर आरोप है कि वह जावास्क्रिप्ट स्क्रिप्ट के जरिए यूजर डेटा इकट्ठा कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यह ट्रैकिंग यूजर की डिजिटल प्रोफाइल बनाने और संभावित रूप से थर्ड पार्टी के साथ डेटा शेयर करने के लिए की जा सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ब्राउजर स्क्रिप्ट से क्या-क्या हो रहा ट्रैक?
BrowserGate रिपोर्ट में कहा गया है कि LinkedIn की स्क्रिप्ट करीब 6,236 Chrome एक्सटेंशन तक स्कैन करने की क्षमता रखती है। यह स्कैनिंग एक्सटेंशन के यूनिक आईडी से जुड़े रिसोर्स को एक्सेस करके की जाती है, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि यूजर के ब्राउजर में कौन-कौन से टूल इंस्टॉल हैं।
यह तरीका Chromium आधारित ब्राउजर्स में पहले से जाना-पहचाना है, लेकिन किसी बड़े प्लेटफॉर्म द्वारा इसके इस्तेमाल के आरोप ने चिंता बढ़ा दी है। इससे यूजर की ऑनलाइन आदतों, काम के टूल्स और संभावित प्रोफेशनल गतिविधियों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
![]()
सिर्फ एक्सटेंशन नहीं, डिवाइस डेटा भी निशाने पर
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रैकिंग केवल ब्राउजर एक्सटेंशन तक सीमित नहीं है। LinkedIn यूजर्स के डिवाइस से जुड़ी अहम जानकारी भी इकट्ठा कर सकता है, जैसे CPU कोर, टाइम जोन, भाषा सेटिंग, बैटरी स्टेटस और उपलब्ध मेमोरी।
इसके अलावा स्क्रीन साइज, स्टोरेज और अन्य हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर डेटा को मिलाकर एक यूनिक “डिजिटल फिंगरप्रिंट” तैयार किया जा सकता है। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह की फिंगरप्रिंटिंग यूजर की पहचान को बिना अनुमति ट्रैक करने में इस्तेमाल हो सकती है।
डेटा कहां जा रहा है, अभी साफ नहीं
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि यह डेटा किसी थर्ड पार्टी साइबर सिक्योरिटी कंपनी, जैसे Human Security, को भेजा जा सकता है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
दिलचस्प बात यह है कि एक्सटेंशन स्कैनिंग का दायरा तेजी से बढ़ा है। 2025 में जहां करीब 2000 एक्सटेंशन स्कैन किए जा रहे थे, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 6000 से अधिक बताई जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि ट्रैकिंग मैकेनिज्म लगातार विस्तार कर रहा है।










