हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर के ऊंचाई वाले इलाकों में अचानक हुई भारी बर्फबारी ने भेड़पालकों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है। सांगला और डोडरा-क्वार के बीच स्थित रुपिन पास में भारी हिमपात के कारण करीब 2000 भेड़-बकरियों के बर्फ में दबे होने की आशंका है। मौके पर पहुंची राहत एवं बचाव टीम ने स्थिति का जायजा लेना शुरू कर दिया है। इलाके में तीन फीट से अधिक बर्फ जमा होने की सूचना है और कई बड़े पशुओं के शरीर का हिस्सा बर्फ में दबा हुआ है, जबकि कुछ के केवल सींग ही बर्फ के ऊपर दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितने पशुओं की मौत हुई है और कितने जीवित हैं। प्रशासन का कहना है कि वास्तविक नुकसान का आकलन बर्फ कम होने और पशुओं की गिनती के बाद ही संभव होगा।
बताया जा रहा है कि 27 सितंबर को रुपिन पास और आसपास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अचानक भारी बर्फबारी शुरू हो गई थी। उस समय भेड़पालक अपने पशुओं के झुंड के साथ ऊंचाई वाले इलाकों से नीचे की ओर लौट रहे थे। सर्दियों के लिए पशुओं को निचले क्षेत्रों में ले जाने के दौरान अचानक मौसम बिगड़ने से कई झुंड रास्ते में फंस गए। भारी बर्फबारी इतनी तेजी से हुई कि कई भेड़-बकरियां आगे बढ़ नहीं सकीं और देखते ही देखते उनके आसपास बर्फ की मोटी परत जम गई।
रुपिन पास में पहुंची टीम ने प्रशासन को बताया कि वहां तीन फीट से अधिक बर्फ जमा है। ऐसी स्थिति में छोटे पशु पूरी तरह बर्फ के नीचे दब गए हैं, जबकि कुछ बड़े पशुओं के सींग या शरीर के ऊपरी हिस्से बर्फ से बाहर दिखाई दे रहे हैं। इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि बड़ी संख्या में पशु अभी भी बर्फ की मोटी परत के नीचे फंसे हो सकते हैं। लेकिन जब तक बर्फ हटाकर एक-एक पशु की स्थिति की जांच नहीं की जाती, तब तक उनके जीवित या मृत होने की पुष्टि करना संभव नहीं है।
राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने शिमला में इस घटना की जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन को सूचना मिलने के बाद डोडरा-क्वार के एसडीएम को तत्काल बचाव दल गठित करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद स्थानीय भेड़पालकों, स्वयंसेवकों, होमगार्ड, पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मचारियों को अभियान में शामिल किया गया। टीम में पटवारी और कानूनगो स्तर के अधिकारी भी मौजूद हैं, ताकि मौके पर स्थिति का आकलन किया जा सके और प्रभावित पशुपालकों की जानकारी जुटाई जा सके।
बचाव दल बुधवार को रुपिन पास के ऊपरी हिस्से तक पहुंच गया। वहां मोबाइल नेटवर्क की समस्या होने के कारण टीम प्रशासन से सैटेलाइट फोन के माध्यम से संपर्क कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और भारी बर्फ के कारण मौके तक पहुंचना भी आसान नहीं है। टीम का प्राथमिक उद्देश्य फंसे हुए लोगों और पशुओं की स्थिति का पता लगाना तथा जहां संभव हो, पशुओं को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना है।
जानकारी के मुताबिक, भेड़पालकों के साथ मौजूद कुछ लोग और चलने की स्थिति में बचे कुछ पशु पहले ही डोडरा-क्वार की ओर स्थित बेस कैंप तक नीचे आ गए हैं। जिन क्षेत्रों में बर्फ अपेक्षाकृत कम थी, वहां पहुंचने में कुछ भेड़पालक सफल रहे। वहीं, जो झुंड रुपिन पास पार कर चुके थे और अचानक हुई भारी बर्फबारी की चपेट में आ गए, उनके लिए वापस लौटना मुश्किल हो गया। कुछ भेड़पालकों ने मौसम खराब होते ही वापस लौटने का प्रयास किया, लेकिन कई पशु बर्फ में फंस गए।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभी पशुओं की वास्तविक संख्या और उनकी स्थिति का पता लगाना है। भेड़पालकों ने करीब 1500 से 2000 पशुओं के फंसे या बर्फ में दबे होने की प्रारंभिक जानकारी दी है। इसी आधार पर करीब 2000 भेड़-बकरियों के बर्फ में दबने की बात सामने आई है। अधिकारियों ने साफ किया है कि इसे अभी अंतिम नुकसान नहीं माना जा सकता। बर्फ हटने के बाद ही यह पता चलेगा कि कितने पशु मारे गए, कितने जीवित हैं और कितने सुरक्षित स्थानों तक पहुंच चुके हैं।
इस घटना में फिलहाल किसी इंसान की मौत की सूचना नहीं है। भेड़पालकों के लिए यह राहत की बात है कि उनके साथ मौजूद लोग किसी तरह ऊंचाई वाले क्षेत्र से नीचे उतरने में सफल रहे। प्रशासन के अनुसार, कुछ भेड़पालक बर्फबारी शुरू होते ही वापस लौट गए थे, जबकि कुछ लोग अपने झुंड के साथ आगे निकल चुके थे और अचानक मौसम खराब होने के कारण वहीं फंस गए। बाद में लोगों को अपेक्षाकृत कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लाया गया।
किन्नौर में सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुई बर्फबारी ने ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम का मिजाज अचानक बदल दिया है। इससे पहले भी किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के कारण सड़क मार्ग प्रभावित होने और भेड़पालकों के फंसने की सूचना सामने आई थी। छितकुल-दुमती मार्ग पर ग्लेशियर आने से आवाजाही भी बाधित हुई थी। ऐसे में रुपिन पास की घटना ने प्रशासन के सामने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान की चुनौती और बढ़ा दी है।
भेड़पालकों के लिए यह नुकसान केवल पशुओं की संख्या तक सीमित नहीं है। पहाड़ी क्षेत्रों में भेड़ और बकरियां कई परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन हैं। एक बड़े झुंड का अचानक बर्फबारी में फंस जाना पशुपालकों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर डाल सकता है। इसलिए प्रशासन अब पशुओं की वास्तविक संख्या और नुकसान का आकलन करने के साथ प्रभावित परिवारों की पहचान भी कर रहा है।
एसडीएम डोडरा-क्वार कीर्ति चंदेल के अनुसार, करीब 12 सदस्यीय टीम बुधवार को मौके पर पहुंची। टीम में राजस्व विभाग के अधिकारी और फील्ड कानूनगो भी शामिल हैं। प्रशासन की ओर से पशुपालन विभाग से भी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना के समय कुल कितने पशु उस क्षेत्र में ले जाए गए थे। इससे भेड़पालकों द्वारा बताई गई संख्या का मिलान करने में मदद मिलेगी।
इलाके में नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने के कारण सैटेलाइट फोन के जरिए टीम से संपर्क स्थापित किया गया है। प्रशासन ने स्थानीय गाइडों से भी संपर्क साधा है, क्योंकि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में स्थानीय लोगों की जानकारी और मार्ग की समझ बचाव अभियान के लिए महत्वपूर्ण है। एसडीएम खुद भी मौके पर जाने की तैयारी में हैं, ताकि अभियान की स्थिति को सीधे देखा जा सके।
पशुओं की लोकेशन और प्रभावित क्षेत्र की स्थिति का पता लगाने के लिए ड्रोन की मदद लेने की भी तैयारी की जा रही है। प्रशासन ने वन विभाग से संपर्क किया है और उसके सहयोग से ड्रोन मैपिंग कराने की योजना बनाई गई है। इससे बर्फ से ढके इलाके का हवाई सर्वे किया जा सकेगा और उन स्थानों की पहचान में मदद मिलेगी जहां बड़ी संख्या में पशु फंसे होने की संभावना है।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने सैटेलाइट फोन के माध्यम से एसडीएम डोडरा-क्वार से बात कर मौके की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि बचाव कार्य जारी है और नुकसान का विस्तृत आकलन कराने के लिए संबंधित विभागों की दूसरी टीम भी भेजी जाएगी। प्रशासन के स्तर पर पशुओं की संख्या, मृत पशुओं और सुरक्षित निकाले गए पशुओं का अलग-अलग आकलन किया जाएगा।
सरकार की ओर से प्रभावित भेड़पालकों को राहत देने की बात भी कही गई है। अधिकारियों के अनुसार, नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद राहत देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रभावित पशुपालकों को विशेष राहत पैकेज के तहत मदद उपलब्ध कराने का प्रयास करने की बात भी मंत्री की ओर से कही गई है। हालांकि, राहत की अंतिम राशि और पात्रता से जुड़ी विस्तृत जानकारी नुकसान के आकलन के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल रुपिन पास में बचाव दल की निगाहें बर्फ के नीचे दबे पशुओं पर टिकी हैं। सबसे पहले यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बर्फ में दबे कितने पशु जीवित हैं और उन्हें सुरक्षित निकाला जा सकता है। साथ ही उन क्षेत्रों की पहचान की जा रही है जहां बर्फ की मोटी परत के कारण छोटे पशु पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहे हैं। मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए अभियान सावधानी से चलाया जा रहा है।
किन्नौर की इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि करीब 2000 पशुओं के बर्फ में दबे होने की जानकारी अभी भेड़पालकों के प्रारंभिक अनुमान पर आधारित है। प्रशासन ने भी इसे अंतिम आंकड़ा नहीं माना है। बर्फ कम होने और मौके पर विस्तृत गिनती होने के बाद ही वास्तविक नुकसान सामने आएगा। फिलहाल राहत और बचाव दल रुपिन पास में मौजूद है और प्रशासन लगातार मौके की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।











