आज के समय में 25 से 40 साल के युवाओं में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार इसका मुख्य कारण बदलती लाइफस्टाइल, व्यायाम की कमी, तनाव, अनियमित खानपान और नींद की कमी है। समय पर लक्षण पहचानकर जीवनशैली में बदलाव करना युवाओं के लिए जरूरी है।
Increase In Heart Attacks: भारत में युवाओं में अब 25 से 40 साल की उम्र में भी हार्ट अटैक के मामले आम हो रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके पीछे मुख्य कारण बदलती लाइफस्टाइल, लंबे समय तक बैठना, व्यायाम की कमी, अनियमित खानपान, तनाव और नींद की कमी हैं। डॉ. राजाराम आनंदरमन और डॉ. मोहसिन वली के अनुसार, समय पर लक्षण पहचानकर और जीवनशैली में सुधार करके युवाओं को हृदय रोग से बचाया जा सकता है।
युवाओं में हार्ट अटैक क्यों बढ़ रहा है
आज के समय में 25 से 40 साल के युवा भी हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार इसका मुख्य कारण बदलती लाइफस्टाइल है। लंबे समय तक बैठना, व्यायाम की कमी, तनाव, खराब खानपान और नींद की कमी हृदय स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।
डॉ. राजाराम आनंदरमन बताते हैं कि 40 वर्ष से कम उम्र के लगभग 40% हार्ट अटैक मरीजों में पारंपरिक जोखिम कारक नहीं पाए जाते। पैरों की गतिहीनता और शारीरिक निष्क्रियता सीधे दिल को नुकसान पहुंचाती है। इसी कारण युवाओं में अचानक दिल का दौरा पड़ना आम होता जा रहा है।

प्रमुख लक्षण और जोखिम कारक
कम उम्र में हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर हल्के या असामान्य रूप में दिखते हैं। इसमें सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक थकान, पसीना आना और मतली या चक्कर आना शामिल हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अनियमित खानपान, धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन, डायबिटीज़ और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियां भी जोखिम बढ़ाती हैं।
डॉ. मोहसिन वली के अनुसार हर सांस और हर निवाला हमारी हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और नियमित व्यायाम ही वास्तविक दवाएं हैं। वहीं, डॉ. रजनीश कपूर कहते हैं कि डायबिटीज़ हृदय रोग को और जटिल बना देती है, इसलिए लाइफस्टाइल में बदलाव अनिवार्य है।
बचाव और स्वस्थ आदतें
युवा अपने हृदय स्वास्थ्य की रक्षा के लिए रोजाना व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और मानसिक तनाव नियंत्रण को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। डॉ. नाकुल सिन्हा सलाह देते हैं कि अत्यधिक स्क्रीनिंग और अनावश्यक जांच से बचें, क्योंकि यह चिंता बढ़ा सकती है। खुश रहने की आदत, रोजाना चलना-फिरना और सकारात्मक जीवनशैली अपनाना हृदय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।













