कोलकाता में छात्र आंदोलन के दौरान हुई कथित हिंसा और पत्रकारों से दुर्व्यवहार के विरोध में बीजेपी और संघ से जुड़े शैक्षणिक संगठन अलग-अलग मार्च निकाल रहे हैं। पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी है और मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े कई शैक्षणिक संगठनों ने छात्र आंदोलन की आड़ में कथित अराजकता और हिंसा के विरोध में अलग-अलग मार्च निकालने का ऐलान किया है। इन प्रदर्शनों के चलते शहर में लगातार दो दिनों तक राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। प्रदर्शन का केंद्र कोलकाता का एस्प्लेनेड इलाका रहेगा, जहां विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता जुटेंगे।
बीजेपी का आरोप- छात्र आंदोलन के नाम पर फैल रही है अराजकता
बीजेपी ने कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन छात्र आंदोलन के नाम पर हिंसा, अराजकता और कानून-व्यवस्था को चुनौती देना स्वीकार नहीं किया जा सकता। पार्टी के अनुसार हाल के दिनों में कोलकाता में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई और पुलिस तथा मीडिया कर्मियों पर हमले जैसी घटनाएं सामने आईं।
पार्टी की ओर से सोमवार को कोलकाता में एक मार्च आयोजित किया जा रहा है। यह रैली सियालदह स्टेशन से शुरू होकर एस्प्लेनेड तक जाएगी। उत्तर कोलकाता जिला बीजेपी के नेतृत्व में आयोजित इस मार्च का उद्देश्य छात्र आंदोलन के दौरान हुई कथित हिंसक घटनाओं के खिलाफ जनमत तैयार करना बताया गया है।
संघ से जुड़े शैक्षणिक संगठन भी उतरेंगे सड़क पर
बीजेपी के प्रदर्शन के बाद मंगलवार को संघ परिवार से जुड़े कई शैक्षणिक संगठन भी संयुक्त मंच के बैनर तले कोलकाता में मार्च निकालेंगे। इन संगठनों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM), भारतीय शिक्षण मंडल (BSM), विद्या भारती, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास और इतिहास संकलन समिति सहित कई संगठन शामिल हैं।
इन संगठनों ने 'शिक्षा संस्कृति सुरक्षा मंच' के बैनर तले प्रदर्शन का आह्वान किया है। आयोजकों के अनुसार कार्यकर्ता हावड़ा और सियालदह स्टेशन से अलग-अलग जुलूस निकालेंगे, जो एस्प्लेनेड के दोरीना क्रॉसिंग पर पहुंचकर एक सार्वजनिक सभा में बदल जाएंगे।
छात्र आंदोलन पर संगठनों की क्या है राय
संघ से जुड़े शैक्षणिक संगठनों का कहना है कि वे छात्रों की समस्याओं और उनकी मांगों के प्रति सहानुभूति रखते हैं। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन यदि आंदोलन के दौरान हिंसा, राष्ट्रविरोधी नारे या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं होती हैं, तो उसका विरोध किया जाना चाहिए।
संगठनों का यह भी कहना है कि शिक्षा और लोकतांत्रिक विमर्श की संस्कृति को बनाए रखना आवश्यक है तथा किसी भी आंदोलन को हिंसक या असंवैधानिक दिशा में नहीं जाना चाहिए।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई
हाल ही में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के कथित पेपर लीक मामले और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विभिन्न वामपंथी छात्र संगठनों ने कोलकाता में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन सियालदह से शुरू होकर एस्प्लेनेड तक पहुंचा।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। घटनास्थल पर बोतलें और अन्य वस्तुएं फेंके जाने की घटनाएं सामने आईं। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। इस दौरान कई पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार और महिला पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार के आरोप भी सामने आए।
पत्रकारों पर हमले के बाद बढ़ी कार्रवाई
प्रदर्शन के बाद घायल पत्रकारों का अस्पताल में इलाज कराया गया। राज्य सरकार ने घटना की जांच का आश्वासन दिया और पुलिस को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने मामले में जांच तेज करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार, हिंसा और कानून-व्यवस्था भंग करने के आरोप में अब तक कई गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं और जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी रह सकती है।
राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत
विश्लेषकों का मानना है कि छात्र आंदोलन अब केवल शिक्षा संबंधी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की राजनीति का प्रमुख विषय बनता जा रहा है। एक ओर विपक्ष सरकार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ पक्ष हिंसा के लिए आंदोलन में शामिल कुछ तत्वों को जिम्मेदार ठहरा रहा है।
बीजेपी इन घटनाओं को राजनीतिक मुद्दा बनाकर राज्य सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, जबकि वामपंथी छात्र संगठन अपने आंदोलन को शिक्षा और छात्रों के अधिकारों से जुड़ा बता रहे हैं।
कोलकाता में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
लगातार दो दिनों तक प्रस्तावित प्रदर्शनों को देखते हुए कोलकाता पुलिस ने शहर के प्रमुख इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। एस्प्लेनेड, सियालदह और हावड़ा जैसे संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हों और आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। यातायात पुलिस ने भी कुछ मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन की तैयारी की है ताकि जुलूसों के दौरान शहर की आवाजाही सामान्य बनी रहे।
आगे क्या
छात्र आंदोलन, राजनीतिक विरोध और पुलिस कार्रवाई के बीच पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल फिलहाल काफी संवेदनशील बना हुआ है। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति, संभावित नई गिरफ्तारियां और विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहते हैं या राजनीतिक तनाव और बढ़ता है।











