कोटा के जेके लोन और नए अस्पताल में सीजेरियन के बाद 4 प्रसूताओं की मौत मामले में चिकित्सा मंत्री पहुंचे। उन्होंने जांच रिपोर्ट का इंतजार बताया और कहा कि लापरवाही सामने आने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कोटा: राजस्थान के कोटा शहर में स्थित सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद चार महिलाओं की मौत के मामले ने गंभीर चिकित्सा संकट और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के नौ दिन बाद राज्य के चिकित्सा मंत्री कोटा पहुंचे और अस्पताल प्रशासन के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।
यह मामला Kota के नए अस्पताल और JK Lon Hospital Kota से जुड़ा है, जहां सीजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की हालत बिगड़ने और किडनी फेल होने के कारण मौतें दर्ज की गईं।
सीजेरियन डिलीवरी के बाद बिगड़ी हालत, चार महिलाओं की मौत
जानकारी के अनुसार, अस्पतालों में सीजेरियन डिलीवरी के बाद कुल 12 महिलाओं में किडनी संबंधी गंभीर जटिलताएं सामने आई थीं। इनमें से चार महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि दो मरीज अभी भी नेफ्रोलॉजी आईसीयू में गंभीर स्थिति में हैं। वहीं, दो महिलाओं की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
पहली मौत 5 मई को दर्ज की गई थी, जिसके बाद एक के बाद एक तीन और प्रसूताओं ने दम तोड़ दिया। इन घटनाओं ने पूरे राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था की गुणवत्ता पर चिंता बढ़ा दी है।
चिकित्सा मंत्री की अस्पताल यात्रा और समीक्षा बैठक
घटना के नौ दिन बाद राज्य के चिकित्सा मंत्री कोटा पहुंचे और सीधे अस्पताल प्रशासनिक भवन में अधिकारियों और डॉक्टरों के साथ बैठक की। उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत जानकारी ली और प्रभावित मरीजों के परिजनों से भी मुलाकात की।
मंत्री ने आईसीयू में भर्ती मरीजों की स्थिति का जायजा लिया और डॉक्टरों से उनके उपचार से जुड़ी जानकारी प्राप्त की।
“रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कारण” – चिकित्सा मंत्री
मीडिया से बातचीत करते हुए चिकित्सा मंत्री ने कहा कि अभी जांच पूरी नहीं हुई है और अंतिम निष्कर्ष रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
उन्होंने कहा कि दवाओं और तरल पदार्थों (फ्लूइड) की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि इन्हें भी संभावित कारणों में शामिल किया जा रहा है। मंत्री के अनुसार, सभी संभावनाओं की जांच की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
दवाओं और फ्लूइड पर जांच केंद्रित
जांच के दौरान अस्पताल से दवाओं और मेडिकल फ्लूइड के सैंपल लिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को आशंका है कि संक्रमण या दवाओं की गुणवत्ता से जुड़ी कोई समस्या इस घटना से जुड़ी हो सकती है।
हालांकि, अभी तक किसी भी रिपोर्ट की पुष्टि नहीं हुई है और सभी नमूनों की जांच प्रयोगशालाओं में जारी है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट रूप से कारणों का पता चल सकेगा।
प्रशासनिक कार्रवाई और डॉक्टरों पर सख्ती
इस पूरे मामले में प्रशासन ने पहले ही कई स्तरों पर कार्रवाई की है। शुरुआती जांच के बाद दो डॉक्टरों समेत चार चिकित्सा कर्मियों को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की गई थी।
इसके बाद मंगलवार को चार और चिकित्सा कर्मियों को निलंबित किया गया, जिससे अस्पताल में आंतरिक तनाव बढ़ गया है। इस कार्रवाई के विरोध में कई डॉक्टरों ने गुरुवार को काली पट्टी बांधकर काम किया और असंतोष जताया।
अस्पताल में अभी भी गंभीर मरीज भर्ती
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अभी भी कुछ प्रसूताएं गंभीर स्थिति में आईसीयू में भर्ती हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मरीजों को बचाने के लिए सभी आवश्यक संसाधन और विशेषज्ञ उपलब्ध कराए गए हैं। हालांकि, स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।
जांच रिपोर्ट का इंतजार, प्रशासन पर बढ़ता दबाव
इस घटना ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन पर भारी दबाव बना दिया है। एक ओर जहां सरकार जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, वहीं दूसरी ओर परिजन और आम जनता जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
Medical Minister of Rajasthan ने स्पष्ट किया है कि बिना ठोस रिपोर्ट के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा, लेकिन दोष साबित होने पर कार्रवाई तय है।
स्वास्थ्य व्यवस्था और सवालों के घेरे में अस्पताल प्रबंधन
यह घटना केवल एक मेडिकल इमरजेंसी नहीं बल्कि अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं अक्सर संक्रमण नियंत्रण, दवा गुणवत्ता और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल की खामियों की ओर इशारा करती हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह मामला केवल मेडिकल जटिलताओं का परिणाम है या इसमें प्रशासनिक लापरवाही भी शामिल है।








