लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश को सालभर का पर्यटन गंतव्य बनाने पर काम हो रहा है। विंटर, एस्ट्रो, वेलनेस, इको, एडवेंचर, संस्कृति और विलेज टूरिज्म पर विशेष फोकस किया जाएगा।
लेह: लद्दाख अब केवल गर्मियों के पर्यटन स्थल के रूप में अपनी पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहता। केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन सालभर पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि लद्दाख में विंटर, एस्ट्रो, वेलनेस, संस्कृति आधारित, इको, एडवेंचर और विलेज टूरिज्म जैसे अलग-अलग पर्यटन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने यह बात शनिवार शाम लेह के पोलो ग्राउंड में लद्दाख फेस्टिवल 2026 के उद्घाटन के दौरान कही। तीन दिवसीय यह महोत्सव लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक जीवनशैली, कला, स्थानीय व्यंजन, खेल और पर्यटन की विविध संभावनाओं को प्रदर्शित कर रहा है।
केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना लक्ष्य नहीं
उपराज्यपाल ने कहा कि पर्यटन विकास का उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं है। इसके बजाय ऐसा पर्यटन मॉडल विकसित करने पर जोर है जो टिकाऊ, समुदाय आधारित और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार हो। सक्सेना के अनुसार, पर्यटन से स्थानीय समुदायों के लिए समान आर्थिक अवसर पैदा होने चाहिए और इसके साथ लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी तथा सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी सुनिश्चित होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लद्दाख की प्राकृतिक परिस्थितियां और सांस्कृतिक विशिष्टता इसे अलग-अलग तरह के पर्यटन के लिए उपयुक्त बनाती हैं। प्रशासन का प्रयास है कि पर्यटन गतिविधियों का लाभ स्थानीय लोगों, कारीगरों, उद्यमियों, कलाकारों, कलाकारों के समूहों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों तक पहुंचे।
2025 की पूरी संख्या से आगे निकला पर्यटक आंकड़ा
लद्दाख पर्यटन के लिहाज से लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 16 सितंबर तक लद्दाख में 4.37 लाख पर्यटक पहुंच चुके थे। यह संख्या वर्ष 2025 में पूरे साल दर्ज किए गए कुल पर्यटक आगमन से भी अधिक है।
यह आंकड़ा क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के बढ़ते विस्तार को दर्शाता है। प्रशासन अब पर्यटन को केवल एक निश्चित मौसम तक सीमित रखने के बजाय पूरे साल आगंतुकों को आकर्षित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
विंटर पर्यटन के अलावा एस्ट्रो टूरिज्म, वेलनेस, संस्कृति, इको-टूरिज्म, एडवेंचर और गांव आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
लद्दाख फेस्टिवल बना सांस्कृतिक पहचान का मंच
लद्दाख फेस्टिवल क्षेत्र की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों में शामिल है। यह महोत्सव लद्दाख की जीवंत विरासत, सांस्कृतिक पहचान और लोगों की सामूहिक भावना को सामने लाता है।
समय के साथ यह आयोजन भारत और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लोगों के लिए लद्दाख की परंपराओं, प्राकृतिक परिदृश्य, आतिथ्य और पर्यटन क्षमता को समझने का मंच बन गया है।
उपराज्यपाल ने कहा कि लद्दाख फेस्टिवल सदियों पुरानी परंपराओं को संरक्षित करने और क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास और आधुनिकीकरण के रास्ते पर आगे बढ़ते हुए लद्दाख की गहरी सांस्कृतिक जड़ों को सुरक्षित रखना और भी जरूरी हो जाता है।
स्थानीय कलाकारों और उद्यमियों को मिलेगा अवसर
सक्सेना ने कहा कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों, कलाकारों, कलाकारों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर पैदा होते हैं।
लद्दाख की पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा कला को महोत्सव में विशेष स्थान दिया गया है। प्रदर्शनी और लाइव प्रदर्शन के माध्यम से स्थानीय कारीगर अपने काम और कौशल को पर्यटकों के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं।
इस तरह महोत्सव को केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
जिम्मेदार पर्यटन का संदेश
उपराज्यपाल ने पर्यटकों से लद्दाख की यात्रा जिम्मेदारी के साथ करने की अपील की। उन्होंने आगंतुकों से स्थानीय समुदायों के साथ संवाद करने, स्थानीय परंपराओं को समझने और स्थानीय कारीगरों तथा उद्यमियों का समर्थन करने का आग्रह किया।
उन्होंने लद्दाख के संवेदनशील पर्यावरण की सुरक्षा में भी पर्यटकों की भूमिका पर जोर दिया। क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी को देखते हुए जिम्मेदार पर्यटन को भविष्य की पर्यटन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
सक्सेना ने कहा कि पर्यटन के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना लद्दाख की एक बड़ी ताकत है। इससे क्षेत्र की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।
विंटर से विलेज टूरिज्म तक कई क्षेत्रों पर फोकस
लद्दाख को वास्तविक अर्थों में सालभर पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए प्रशासन कई क्षेत्रों को एक साथ विकसित करने पर जोर दे रहा है।
विंटर टूरिज्म के जरिए ठंड के मौसम में पर्यटकों को आकर्षित करने की योजना है। वहीं, साफ आसमान और खगोलीय गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियों को देखते हुए एस्ट्रो टूरिज्म और स्टारगेजिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
इसके अलावा वेलनेस टूरिज्म, कल्चर-बेस्ड टूरिज्म, इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और विलेज टूरिज्म को भी पर्यटन विस्तार के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। इस रणनीति का उद्देश्य पर्यटन गतिविधियों को अलग-अलग मौसम और क्षेत्रों में फैलाना है, ताकि इसका आर्थिक लाभ स्थानीय समुदायों तक अधिक व्यापक रूप से पहुंच सके।
फेस्टिवल में खेल, खानपान और रोमांच का संगम
तीन दिवसीय लद्दाख फेस्टिवल में संस्कृति और पर्यटन के विभिन्न पहलुओं को एक साथ प्रस्तुत किया जा रहा है। पारंपरिक तीरंदाजी और हॉर्स पोलो आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं।
स्थानीय व्यंजनों के साथ हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। स्थानीय कारीगर अपने हुनर का लाइव प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
इसके अलावा खगोल विज्ञान और स्टारगेजिंग गतिविधियां, रिवर राफ्टिंग, लघु फिल्में और साउंड एंड लाइट शो भी महोत्सव का हिस्सा हैं। इन गतिविधियों के जरिए आयोजन में संस्कृति, साहसिक पर्यटन, रचनात्मकता और आधुनिक पर्यटक अनुभवों को एक साथ जोड़ा गया है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
महोत्सव के उद्घाटन दिवस पर Stringmo Sisters और Shillong Chamber Choir ने प्रस्तुति दी। इसके अलावा कई लोक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनमें लद्दाख की जीवंत कलात्मक परंपराओं की झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम से पहले एक सांस्कृतिक परेड भी निकाली गई। इसमें मठों से जुड़े समूह, लोक कलाकारों की टोलियां, पारंपरिक संगीतकार, घोड़े और ऊंट सवार तथा विभिन्न गांवों और जिलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। परेड करजू से शुरू होकर पोलो ग्राउंड पहुंची, जहां लद्दाख फेस्टिवल के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन को साथ लाने की कोशिश
लद्दाख फेस्टिवल 2026 ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब केंद्र शासित प्रदेश पर्यटन को अधिक विविध और टिकाऊ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बढ़ते पर्यटक आंकड़ों के बीच प्रशासन के सामने प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए पर्यटन विस्तार की चुनौती भी है।
सालभर पर्यटन, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण पर जोर इसी संतुलन को साधने की कोशिश का हिस्सा है। लद्दाख प्रशासन का लक्ष्य ऐसा पर्यटन मॉडल विकसित करना है, जिसमें क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे तथा पर्यटन से पैदा होने वाले आर्थिक अवसर स्थानीय स्तर तक पहुंचें।











