महाराष्ट्र के लातूर शहर में महानगरपालिका चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अंदर मचा असंतोष अब खुले बगावत का रूप लेने लगा है। टिकट वितरण को लेकर नाराज पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने पार्टी लाइन को छोड़कर स्वतंत्र रूप से चुनावी मैदान में उतरने का बड़ा फैसला किया है।
Maharashtra Municipal Elections 2026: महाराष्ट्र के लातूर शहर में आगामी महानगरपालिका चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर बड़े स्तर पर असंतोष देखने को मिल रहा है। टिकट वितरण को लेकर नाराज पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने पार्टी की लाइन से हटकर चुनावी मैदान में उतरने का बड़ा कदम उठाया है। इस बगावत ने न केवल शहर की सियासत को गरमाया है, बल्कि BJP की चुनावी रणनीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
टिकट वितरण से नाराज पुराने कार्यकर्ता
बीजेपी से लंबे समय से जुड़े और समर्पित कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस बार टिकट वितरण में उनके साथ अन्याय हुआ। उनका कहना है कि वर्षों तक पार्टी और संगठन की सेवा करने वाले पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर बाहरी नेताओं को प्राथमिकता दी गई। कई कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे जनसंघ काल से पार्टी के लिए काम करते आए हैं और असली भाजपाई हैं, लेकिन इस बार उन्हें टिकट से वंचित रखा गया। उनका मानना है कि यह निर्णय पार्टी की निष्ठावान सदस्यता और मेहनत का सम्मान नहीं करता।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे नाराज कार्यकर्ता यदि चुनाव में अलग मोर्चे से उतरते हैं, तो यह पार्टी की छवि और वोट बैंक दोनों पर असर डाल सकता है।
‘नमो आघाड़ी’ के बैनर तले 22 उम्मीदवार
नाराज कार्यकर्ताओं ने ‘नमो आघाड़ी’ के बैनर तले अलग मोर्चा बना लिया और 22 उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा। इस कदम को बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि ये सभी उम्मीदवार मूल रूप से पार्टी की विचारधारा और संगठन से जुड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे शहर में वोटों के बंटवारे की आशंका बढ़ गई है। एक ही विचारधारा के उम्मीदवार आमने-सामने आने से पार्टी के लिए मतों का नुकसान होना स्वाभाविक है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लातूर महानगरपालिका चुनाव में यह आंतरिक बगावत बीजेपी के लिए चुनौती बन सकती है। विरोधी दल इस स्थिति का फायदा उठाकर अपने उम्मीदवारों को बढ़त दिलाने की कोशिश कर सकते हैं।











