लेबनान में इजरायली हमलों पर भारत की चुप्पी से राजनीतिक विवाद तेज, कांग्रेस ने पीएम मोदी से पूछे सवाल

लेबनान में इजरायली हमलों को लेकर भारत की प्रतिक्रिया पर सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से सरकार की विदेश नीति और रुख पर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कथित तौर पर फटकार लगाए जाने की खबर का हवाला देते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मंगलवार को बयान दिया है।

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच लेबनान में कथित इजरायली सैन्य कार्रवाई को लेकर भारत की राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए सरकार की विदेश नीति पर टिप्पणी की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच कथित बातचीत को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में रिपोर्ट्स चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इन रिपोर्ट्स में लेबनान में चल रहे सैन्य अभियानों पर असंतोष और कूटनीतिक दबाव की बात कही गई है।

कांग्रेस का आरोप: भारत की चुप्पी सवालों के घेरे में

कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध रोकने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, जिसका संभावित असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खुलता है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में गिरावट संभव है, जो भारत के आर्थिक हितों से जुड़ा विषय है।

जयराम रमेश ने कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर भारत की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया न आना चिंता का विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार इस मुद्दे पर चुप क्यों है, जबकि कई देश लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना कर रहे हैं।

“मदरलैंड बनाम फादरलैंड” टिप्पणी से बढ़ा विवाद

अपने बयान में जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले दिए गए एक बयान का अप्रत्यक्ष रूप से उल्लेख करते हुए सवाल किया कि क्या सरकार के लिए “फादरलैंड” (पितृभूमि) “मदरलैंड” (मातृभूमि) से अधिक महत्वपूर्ण है। इस टिप्पणी ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि भारत जैसे वैश्विक शक्ति बनने की ओर बढ़ते देश को अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर अधिक स्पष्ट और संतुलित रुख अपनाना चाहिए।

पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच लेबनान में इजरायली सैन्य गतिविधियों को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस संघर्ष के कारण क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, इस पूरे संकट से प्रभावित हो सकता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव संभव है, जिसका सीधा प्रभाव भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ेगा।

ट्रंप-नेतन्याहू बातचीत को लेकर चर्चा

अमेरिकी मीडिया में प्रकाशित कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति Donald Trump ने इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ फोन पर बातचीत के दौरान लेबनान में सैन्य कार्रवाई को लेकर असंतोष जताया। इन रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि ट्रंप ने कड़ी भाषा का इस्तेमाल करते हुए क्षेत्रीय स्थिति पर चिंता व्यक्त की। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में इस पर चर्चा तेज है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भारत सरकार इस पूरे मामले में अपेक्षाकृत चुप है, जबकि वैश्विक स्तर पर कई देश इस संघर्ष पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। पार्टी का कहना है कि भारत को अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

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