उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों ने सोमवार को एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के सरकारी आवास के बाहर पहुंच गए और वहां बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने ‘राजभर चाचा न्याय करो’ के नारे लगाए और भर्ती से जुड़े लंबित मामलों का समाधान कर नियुक्ति का रास्ता साफ करने की मांग की। करीब आधे घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाने का प्रयास किया, जिसके बाद स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई।
अभ्यर्थियों का कहना है कि 2018 में शुरू हुई 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। प्रदर्शनकारी आरक्षण से जुड़ी कथित विसंगतियों का समाधान करने और उन अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग कर रहे हैं, जिन्हें उनके अनुसार भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित आरक्षण व्यवस्था का लाभ नहीं मिला। उनका कहना है कि कई वर्षों से वे अलग-अलग स्तरों पर अपनी मांग रखते आ रहे हैं, लेकिन अब तक इस मामले में उन्हें नियुक्ति को लेकर स्पष्ट समाधान नहीं मिला है।
सोमवार को प्रदर्शनकारी मंत्री के आवास के दरवाजे के बाहर बैठ गए। उनके हाथों में बैनर और पोस्टर थे और वे लगातार नारे लगा रहे थे। ‘ऐसी क्या मजबूरी है-आरक्षण की चोरी है’ और ‘पिछड़ा आयोग ने माना है-आरक्षण घोटाला है’ जैसे नारे भी लगाए गए। इन नारों के जरिए अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों के पालन को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। हालांकि, आरक्षण में कथित गड़बड़ी और संबंधित प्रक्रियागत विवादों पर अंतिम स्थिति संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और न्यायिक/प्रशासनिक प्रक्रियाओं से तय होगी।
प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों ने बताया कि वे पहले भी सरकार के अलग-अलग मंत्रियों और अधिकारियों के सामने अपनी मांग रख चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थियों ने 10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी के साथ हुई बैठक का भी उल्लेख किया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उस बैठक में भर्ती से जुड़ी गड़बड़ियों पर चर्चा हुई थी और अधिकारियों की मौजूदगी में मामले को उठाया गया था। यह अभ्यर्थियों का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि सभी बिंदुओं पर उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है।
अभ्यर्थियों ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से जुड़े आदेशों के अनुपालन की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि आयोगों के स्तर से आरक्षण संबंधी मामले में जो निर्देश या टिप्पणियां सामने आई हैं, उन्हें भर्ती प्रक्रिया में लागू किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि संबंधित आदेशों के आधार पर प्रक्रिया में संशोधन होता है तो उन अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति का रास्ता खुल सकता है, जो लंबे समय से इसका इंतजार कर रहे हैं।
68,500 शिक्षक भर्ती को लेकर प्रदर्शनकारियों की एक प्रमुख मांग परीक्षा के न्यूनतम अंकों में पांच प्रतिशत की छूट से जुड़ी है। अभ्यर्थियों के अनुसार, वर्ष 2018 की भर्ती में दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए पांच प्रतिशत छूट का प्रावधान था। उनका आरोप है कि इस प्रावधान का लाभ नहीं दिया गया और परिणाम सामान्य श्रेणी के समान आधार पर जारी किया गया। इसी आधार पर वे परिणाम में संशोधन और नई चयन सूची जारी करने की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक परीक्षा 150 अंकों की थी और वे आरक्षित वर्ग के लिए 40 प्रतिशत यानी 60 अंक को आधार मानकर परिणाम संशोधित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह पात्र अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिल सकता है। यह मांग अभ्यर्थियों के संगठन और प्रदर्शनकारियों की ओर से रखी जा रही है; इसके लागू होने का निर्णय संबंधित सरकारी और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
मंत्री के आवास के बाहर अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। इसी दौरान पुलिसकर्मियों और अभ्यर्थियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने बाद में प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया और उन्हें ईको गार्डन भेजा। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बदसलूकी और कपड़े फाड़ने के आरोप भी लगाए हैं, जबकि इन आरोपों पर पुलिस की ओर से उपलब्ध रिपोर्टों में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रदर्शन के कारण लखनऊ की यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा। मुख्यमंत्री आवास से लालबत्ती चौराहे की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और भीषण जाम की स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारियों के जुटने और पुलिस की मौजूदगी के कारण सड़क पर काफी देर तक यातायात का दबाव बना रहा। ट्रैफिक पुलिस को वाहनों की आवाजाही सामान्य कराने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं है। उनका दावा है कि 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थी पिछले कई वर्षों से नियुक्ति की मांग को लेकर अलग-अलग स्तरों पर आंदोलन कर रहे हैं। इससे पहले भी लखनऊ में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास के बाहर प्रदर्शन किया गया था। सितंबर में हुए उस प्रदर्शन के दौरान भी आरक्षण संबंधी मांगें उठाई गई थीं और पुलिस तथा अभ्यर्थियों के बीच धक्का-मुक्की की खबर सामने आई थी।
24 सितंबर को भी इस भर्ती से जुड़े कुछ अभ्यर्थियों ने लखनऊ स्थित भाजपा कार्यालय में पहुंचकर प्रदर्शन किया था। उस दौरान अभ्यर्थियों ने आरक्षण से संबंधित अपनी मांगें उठाईं और भर्ती प्रक्रिया में कथित विसंगतियों को लेकर नारेबाजी की थी। इससे स्पष्ट है कि पिछले कुछ सप्ताह में अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर राजधानी में अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन किए हैं।
वर्तमान प्रदर्शन में ओम प्रकाश राजभर के आवास को चुने जाने की वजह भी अभ्यर्थियों की ओर से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की रणनीति के तौर पर बताई जा रही है। प्रदर्शनकारी मंत्री से मुलाकात और अपनी मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई की मांग कर रहे थे। ‘राजभर चाचा न्याय करो’ का नारा इसी मांग को लेकर लगाया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे आश्वासन के बजाय भर्ती से संबंधित स्पष्ट निर्णय और नियुक्ति की प्रक्रिया चाहते हैं।
अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक भर्ती को लेकर नया शेड्यूल जारी नहीं किया जाता और उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होता। उनका कहना है कि वर्षों से नौकरी का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह मामला केवल परीक्षा या परिणाम तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके करियर और भविष्य से जुड़ा हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जल्द इस मामले को सुलझाने की मांग की है।
68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का मामला अब एक बार फिर राजधानी की सड़कों पर दिखाई दे रहा है। एक तरफ अभ्यर्थी आरक्षण संबंधी अपनी मांगों और नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन के सामने प्रदर्शन को नियंत्रित रखने और यातायात व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। सोमवार को राजभर के आवास के बाहर हुए प्रदर्शन में दोनों स्थितियां एक साथ देखने को मिलीं।
फिलहाल अभ्यर्थियों की मांगों में पांच प्रतिशत छूट के आधार पर परिणाम में संशोधन, नई चयन सूची, संबंधित आयोगों के आदेशों के अनुपालन और नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग प्रमुख है। वहीं प्रदर्शन के बाद पुलिस ने अभ्यर्थियों को मौके से हटाकर ईको गार्डन भेजा। आगे सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं, इस पर आंदोलन से जुड़े अभ्यर्थियों की नजर बनी हुई है।












