लखनऊ में किसानों की महापंचायत, राकेश टिकैत बोले- गन्ने और धान का हक भी छीन रही सरकार; गन्ने का दाम बढ़ाने की मांग

किसानों की महापंचायत में राकेश टिकैत ने गन्ने का दाम बढ़ाने की मांग उठाई। उन्होंने सरकार पर गन्ने और धान के किसानों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
लखनऊ में किसानों की महापंचायत, राकेश टिकैत बोले- गन्ने और धान का हक भी छीन रही सरकार; गन्ने का दाम बढ़ाने की मांग
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लखनऊ में किसानों की महापंचायत के दौरान गन्ने का उचित मूल्य बढ़ाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। किसान नेता राकेश टिकैत ने किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और गन्ने तथा धान की खेती करने वाले किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है। महापंचायत में किसानों की आय, फसलों की कीमत और कृषि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। राकेश टिकैत ने अपने संबोधन में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए किसानों को उनके अधिकार दिलाने की जरूरत पर जोर दिया।

राकेश टिकैत ने अपने बयान में सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि गन्ने और धान के किसानों के साथ भी अन्याय हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, उससे उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है। उनके अनुसार, खेती में बीज, खाद, सिंचाई, बिजली, डीजल और मजदूरी जैसे खर्च लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिलना जरूरी है, ताकि वे खेती जारी रख सकें और परिवार की जरूरतों को पूरा कर सकें।

महापंचायत में गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग को विशेष महत्व दिया गया। उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए राज्य सरकार की ओर से घोषित गन्ना मूल्य महत्वपूर्ण विषय रहता है। किसानों को उम्मीद रहती है कि उनकी फसल का मूल्य उत्पादन लागत और खेती से जुड़े खर्चों को ध्यान में रखकर तय किया जाए। किसान संगठनों का कहना है कि उचित मूल्य मिलने से किसानों को आर्थिक राहत मिल सकती है और खेती को टिकाऊ बनाए रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, गन्ने के मूल्य में किसी संभावित बढ़ोतरी की आधिकारिक घोषणा और उसकी दर की पुष्टि संबंधित सरकारी आदेश से ही होगी।

धान की खेती करने वाले किसानों की समस्याएं भी कृषि क्षेत्र की चर्चाओं में शामिल रहती हैं। किसानों को फसल की बिक्री, सरकारी खरीद केंद्रों की व्यवस्था, भुगतान में देरी और बाजार में मिलने वाले मूल्य जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। किसान संगठनों की ओर से अक्सर मांग की जाती है कि उपज की खरीद पारदर्शी तरीके से हो और किसानों को भुगतान समय पर मिले। राकेश टिकैत ने भी अपने संबोधन में किसानों के हितों से जुड़े मुद्दे उठाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।

महापंचायत किसानों की मांगों को सामूहिक रूप से उठाने का एक माध्यम होती है। ऐसे आयोजनों में किसान संगठन अपनी समस्याओं और मांगों को सार्वजनिक मंच पर रखते हैं, ताकि सरकार और संबंधित विभागों तक उनकी बात पहुंच सके। गन्ने के मूल्य में बढ़ोतरी की मांग के साथ-साथ खेती की लागत कम करने, फसलों का उचित मूल्य सुनिश्चित करने और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने जैसे विषय भी महत्वपूर्ण हैं। किसानों का कहना है कि कृषि क्षेत्र से जुड़े फैसलों में उनकी वास्तविक समस्याओं और उत्पादन लागत को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

राकेश टिकैत ने अपने राजनीतिक बयान में सरकार को 'वोट चोर सरकार' कहकर आलोचना की और आरोप लगाया कि किसानों की फसलों के मामले में भी उनके हितों की अनदेखी की जा रही है। यह उनकी ओर से लगाया गया राजनीतिक आरोप है। महापंचायत में उठाई गई मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया और गन्ने के मूल्य को लेकर आगे क्या निर्णय होता है, इस पर किसानों की नजर रहेगी।

फिलहाल, लखनऊ में आयोजित किसानों की महापंचायत के जरिए गन्ने का दाम बढ़ाने की मांग और धान किसानों की समस्याओं को फिर से प्रमुखता मिली है। किसान संगठनों की अपेक्षा है कि सरकार उनकी मांगों पर विचार करे और कृषि से जुड़े फैसलों में किसानों को राहत देने वाले कदम उठाए। गन्ने के मूल्य में किसी बदलाव या अन्य मांगों पर सरकारी निर्णय सामने आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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