पटना जिले के मनेर थाना क्षेत्र में कर्मा-धर्मा पूजा के बाद झुरमुर बहाने के दौरान बुधवार को बड़ा हादसा हो गया। हल्दी छपरा स्थित सूर्य मंदिर के समीप गंगा घाट पर पूजा के बाद नदी में झुरमुर बहाने पहुंची एक महिला और दो बच्चियां गंगा में डूबकर लापता हो गईं। घटना की जानकारी मिलते ही घाट पर मौजूद लोगों और ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय तैराकों और गोताखोरों ने तुरंत नदी में उतरकर तीनों की तलाश शुरू कर दी। प्रशासन और एसडीआरएफ को भी घटना की सूचना दी गई।
लापता लोगों की पहचान हल्दी छपरा के सात आना टोला निवासी बब्बन राय की पत्नी संजू देवी, राजेंद्र राय की पुत्री अंजली कुमारी और बलिराम राय की पुत्री प्रीती कुमारी के रूप में हुई है। बताया गया कि कर्मा-धर्मा पर्व की पूजा के बाद परिवार और आसपास की महिलाएं झुरमुर बहाने के लिए सूर्य मंदिर के समीप गंगा घाट पहुंची थीं। इसी दौरान यह हादसा हुआ। घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और अपने स्तर पर भी बचाव कार्य में सहयोग करने लगे।
जानकारी के मुताबिक, पूजा के बाद झुरमुर नदी में बहाने के दौरान सभी लोग गंगा के पानी के पास पहुंचे थे। इसी दौरान एक महिला गहरे पानी में जाने लगी। उसे बचाने की कोशिश में बाकी दोनों भी पानी की चपेट में आ गईं। कुछ ही देर में तीनों गंगा की धारा में लापता हो गईं। मौके पर मौजूद लोगों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को जानकारी दी और इसके बाद घाट पर बचाव की कोशिशें तेज कर दी गईं।
स्थानीय मुखिया अशोक कुमार ने बताया कि घटना की सूचना प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम को दे दी गई है। स्थानीय तैराकों की मदद से नदी में लगातार तलाश की जा रही है। गंगा में डूबने की घटनाओं में तेज बहाव और गहराई के कारण बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण हो जाता है, इसलिए स्थानीय लोगों के साथ प्रशिक्षित बचाव दल की मदद भी ली जा रही है।
घटना की खबर फैलते ही हल्दी छपरा और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग गंगा घाट पर पहुंच गए। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है और घाट पर मौजूद ग्रामीण लगातार लापता महिला और दोनों बच्चियों के मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पूजा के अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे घाट पर पहुंचे थे, जिसके कारण हादसे के बाद कुछ समय के लिए वहां भारी भीड़ जमा हो गई।
मनेर की घटना के बीच पटना जिले के ही अथमलगोला क्षेत्र से भी गंगा में डूबने की एक अन्य घटना सामने आई है। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, बुधरा गांव के समीप गौर गणेश विसर्जन करने गए भाई-बहन सूरज कुमार और शिवानी कुमारी भी गंगा नदी में डूब गए। उनकी भी तलाश की जा रही थी। वहीं धनरुआ में भी एक बच्ची की डूबने से मौत की सूचना सामने आई है।
एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि मनेर के हल्दी छपरा गंगा घाट पर कुल सात महिलाएं, किशोरियां और युवतियां पूजा के बाद झुर-मुर बहाने पहुंची थीं। नदी में जाने के दौरान चार लोगों को स्थानीय लोगों और नाविकों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि संजू देवी, अंजली कुमारी और प्रीती कुमारी लापता हो गईं।
कर्मा-धर्मा पूजा के बाद नदी या तालाब में पूजा सामग्री बहाने और स्नान करने की परंपरा के दौरान भीड़ बढ़ने से कई बार सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो जाते हैं। गंगा के घाटों पर पानी की गहराई हर जगह एक जैसी नहीं होती और कई स्थानों पर नदी का बहाव भी काफी तेज रहता है। ऐसे में किनारे से कुछ दूरी तक जाने पर अचानक गहराई बढ़ने की स्थिति बन सकती है। मनेर की घटना में भी इसी तरह पानी में जाने के दौरान तीन लोगों के लापता होने की बात सामने आई है।
फिलहाल प्राथमिकता लापता तीनों लोगों की तलाश है। स्थानीय गोताखोर नदी में अलग-अलग स्थानों पर तलाश कर रहे हैं और प्रशासनिक टीमों को भी सूचना दी गई है। तलाश के दौरान नदी में बहाव, पानी की गहराई और दृश्यता जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखा जा रहा है। परिवार के लोग भी घाट पर मौजूद हैं और लगातार बचाव दल से जानकारी ले रहे हैं।
मनेर में हुई इस घटना ने एक बार फिर पूजा और धार्मिक आयोजनों के दौरान नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। खासकर जब पूजा सामग्री या झुरमुर नदी में बहाने के लिए लोग पानी के भीतर जाते हैं, तब बच्चों और महिलाओं के साथ अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। स्थानीय स्तर पर लोगों की मौजूदगी के बावजूद गहरे पानी में अचानक किसी के फिसलने या तेज बहाव की चपेट में आने से स्थिति गंभीर हो सकती है।
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भी चिंता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा घाट पर पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों के दौरान लोगों की संख्या बढ़ जाती है, ऐसे में नदी किनारे सुरक्षा के इंतजाम और बचाव दल की मौजूदगी महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि इस घटना में प्रशासन और एसडीआरएफ को सूचना दिए जाने की बात सामने आई है और तलाश अभियान जारी है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि लापता तीनों को कब तक बरामद किया जा सकेगा। बचाव दल और स्थानीय गोताखोर लगातार नदी में संभावित स्थानों पर तलाश कर रहे हैं। परिवारों की नजरें नदी की ओर टिकी हुई हैं और सभी सुरक्षित बरामदगी की उम्मीद कर रहे हैं। पुलिस और प्रशासन की ओर से भी घटना की जानकारी जुटाई जा रही है तथा बचाव अभियान की निगरानी की जा रही है।











