मणिपुर विधानसभा सत्र से नौ नागा विधायक दूर, छह नागरिकों की हत्या पर विरोध

मणिपुर मे छह नागा नागरिकों की हत्या के विरोध में नौ नागा विधायको ने विधानसभा सत्र का बहिष्कार किया। MLA न्याय और उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को हटाने की मांग की।

मणिपुर में छह नागा नागरिकों की हत्या के विरोध में नौ नागा विधायकों ने सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार किया। विधायकों ने मामले में न्याय की मांग करते हुए उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को पद से हटाने की मांग भी उठाई।

इम्फाल: मणिपुर में जारी जातीय तनाव के बीच छह नागा नागरिकों की हत्या का मामला एक बार फिर राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गया है। सोमवार को नौ नागा विधायकों ने राज्य विधानसभा के चल रहे सत्र की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया। विधायकों ने यह कदम मई में कांगपोकपी जिले के लीलोन वैफेई इलाके में छह नागा नागरिकों की कथित हत्या के मामले में न्याय नहीं मिलने के विरोध में उठाया। नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के नेता और विधायक अवांगबोउ न्यूमैई ने कहा कि विधायकों ने मामले में न्याय मिलने तक विधानसभा की कार्यवाही से दूर रहने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि लीलोन वैफेई में हुई हत्याओं के मामले में अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

नौ विधायकों का यह विरोध दलगत सीमाओं से परे रहा। रिपोर्टों के अनुसार, सभी नौ नागा विधायक सोमवार की बैठक से अनुपस्थित रहे और उन्होंने मामले की जांच पूरी होने तक उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को पद से हटाने या निलंबित करने की मांग दोहराई।

13 मई को 18 लोगों के अपहरण का आरोप

यह मामला 13 मई 2026 को लीलोन वैफेई गांव में हुई घटना से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उस दिन कुल 18 नागा लोगों के अपहरण का आरोप सामने आया था। बाद में 12 लोगों को छोड़ दिया गया, जबकि छह लोग लापता रहे।

मणिपुर पुलिस के अनुसार, इन छह लोगों के अवशेष 10 जून को एक व्यापक तलाशी अभियान के बाद बरामद किए गए। करीब 24 घंटे चले अभियान में मणिपुर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और असम राइफल्स के लगभग 450 जवान शामिल थे। तलाशी अभियान में खोजी कुत्तों और फोरेंसिक विशेषज्ञों की भी मदद ली गई थी।

पुलिस ने उस समय कहा था कि बरामद अवशेष उन लोगों के होने की आशंका है, जिन्हें 13 मई को लीलोन वैफेई से बंधक बनाया गया था। पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं शुरू करने और मामले की जांच जारी रहने की जानकारी दी थी।

उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन पर लगाए आरोप

नागा पीपुल्स फ्रंट के नेता अवांगबोउ न्यूमैई ने विधानसभा में उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन की मौजूदगी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि किपगेन के पति और केएनएफ (पी) के नेता इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी हैं।

न्यूमैई ने कहा कि उनके पास कथित घटना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों के बयान हैं और इन्हीं के आधार पर वह यह आरोप लगा रहे हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये आरोप हैं और मामले की जांच अभी जारी है। किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही किया जा सकता है।

नागा विधायकों ने उपमुख्यमंत्री को पद से हटाने या निलंबित करने की मांग की है। उनकी दलील है कि मामले की जांच पूरी होने तक इस पद पर बने रहना राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से उचित नहीं होगा।

जांच के बीच राजनीतिक विवाद तेज

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब छह नागा नागरिकों की हत्या की जांच में पहले ही गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। 10 जुलाई को मणिपुर पुलिस, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और CRPF की संयुक्त टीम ने कांगपोकपी जिले में दो लोगों को गिरफ्तार किया था।

पुलिस के अनुसार, दोनों को लीलोन वैफेई इलाके से हिरासत में लिया गया था और उनके खिलाफ छह नागा नागरिकों की हत्या से जुड़े मामले में कार्रवाई की गई। यह गिरफ्तारी जांच में एक महत्वपूर्ण कदम मानी गई थी।

जुलाई में हुई इन गिरफ्तारियों के बावजूद नागा संगठनों और नेताओं की ओर से मामले में व्यापक कार्रवाई की मांग जारी रही। समुदाय के नेताओं ने आरोपियों की गिरफ्तारी और मुकदमे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

नागा समुदाय में नाराजगी

छह लोगों के अवशेष मिलने के बाद नागा समुदाय में व्यापक आक्रोश देखने को मिला था। विभिन्न संगठनों ने घटना की निंदा करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी और न्याय की मांग की थी।

नागा संगठनों ने इस घटना को समुदाय की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। जून में यूनाइटेड नागा काउंसिल ने भी मामले को लेकर सरकार के सामने कई मांगें रखी थीं। इनमें कथित रूप से घटना में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी और कुकी उग्रवादी समूहों के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते को खत्म करने की मांग शामिल थी।

नागा संगठनों ने उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को हटाने की मांग भी उठाई थी। हालांकि, इन संगठनों द्वारा लगाए गए आरोपों और मांगों को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

मणिपुर में जातीय तनाव की पृष्ठभूमि

मणिपुर लंबे समय से जातीय हिंसा और समुदायों के बीच तनाव से प्रभावित रहा है। नागा और कुकी-जो समुदायों के बीच भी इस घटना के बाद तनाव और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़े हैं।

मई की घटना के दौरान अलग-अलग स्थानों पर हुई हिंसा और अपहरण के मामलों ने स्थिति को और जटिल बनाया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उसी अवधि में दोनों समुदायों से जुड़े लोगों के अपहरण की घटनाएं भी सामने आई थीं और बाद में कुछ बंधकों को छोड़ा गया।

छह नागा नागरिकों के अवशेष मिलने के बाद इस मामले ने व्यापक राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया को जन्म दिया। समुदाय के प्रतिनिधियों ने सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने और दोषियों को कानून के तहत दंडित करने की मांग की।

विधायकों ने शांति बनाए रखने की बात कही

अवांगबोउ न्यूमैई ने कहा कि नागा नेता राज्य में जारी तनाव के बीच विभिन्न समुदायों के बीच शांति बनाए रखने और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने की कोशिश करते रहे हैं।

उनके मुताबिक, नागा समुदाय की ओर से न्याय की मांग का उद्देश्य तनाव बढ़ाना नहीं बल्कि मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करना है। विधायकों का कहना है कि छह नागरिकों की हत्या जैसे गंभीर मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई से ही प्रभावित समुदाय में भरोसा बहाल किया जा सकता है।

विधानसभा सत्र का बहिष्कार इसी राजनीतिक दबाव का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, सरकार और जांच एजेंसियों की ओर से मामले में आगे की कार्रवाई के बाद ही इस विवाद की दिशा स्पष्ट होगी।

जांच के निष्कर्ष पर टिकी नजर

मणिपुर में छह नागा नागरिकों की हत्या का मामला अब राजनीतिक विरोध, सामुदायिक तनाव और जांच—तीनों के केंद्र में है। नौ नागा विधायकों के विधानसभा से दूर रहने के फैसले ने सरकार पर मामले में तेजी से कार्रवाई करने का दबाव बढ़ाया है।

मामले में पहले ही गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच जारी है। अब प्रमुख सवाल यह है कि जांच एजेंसियां घटना की पूरी कड़ी को किस तरह स्थापित करती हैं और किन लोगों की भूमिका सामने आती है। उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन के पति पर लगाए गए आरोप भी जांच के दायरे में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मुद्दा बने हुए हैं। हालांकि, किसी भी आरोपी की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा।

फिलहाल नौ नागा विधायकों का बहिष्कार मणिपुर में छह नागरिकों की हत्या को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव का संकेत है। आने वाले दिनों में विधानसभा, राज्य सरकार और जांच एजेंसियों की कार्रवाई इस मामले में आगे की स्थिति तय कर सकती है।

Leave a comment