महाराष्ट्र में क्यों रुका मानसून? भारतीय मौसम विभाग ने बताए 5 बड़े कारण

महाराष्ट्र में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इसके पीछे 5 बड़े कारण बताए हैं। जानें कब फिर तेज होगी बारिश और क्या है ताजा अपडेट।

महाराष्ट्र में भीषण गर्मी के बीच लोग मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून 8 जून को दक्षिण कोंकण और दक्षिण मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में पहुंचा था, लेकिन इसके बाद अनुकूल परिस्थितियां नहीं बनने के कारण इसकी प्रगति रुक गई।

नई दिल्ली: भारत में इस साल का दक्षिण-पश्चिम मानसून उम्मीद के मुताबिक गति नहीं पकड़ पा रहा है। महाराष्ट्र के दक्षिणी हिस्सों तक पहुंचने के बाद मानसून की प्रगति अचानक धीमी पड़ गई है, जिससे देशभर में बारिश के आंकड़ों में करीब 40–41% की कमी दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार यह स्थिति सामान्य से काफी कमजोर मानसून सिस्टम को दर्शाती है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया है कि 4 जून से 18 जून के बीच देश में केवल 42.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य औसत 72.2 मिलीमीटर होता है। यानी इस अवधि में बारिश में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

महाराष्ट्र में क्यों रुका मानसून?

मानसून 8 जून को कोंकण क्षेत्र और दक्षिण मध्य महाराष्ट्र तक पहुंचा था, लेकिन उसके बाद आगे बढ़ने की गति बेहद धीमी हो गई। 10 से 15 जून के बीच राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश फैलने की उम्मीद थी, लेकिन 18 जून तक मानसून मुख्य रूप से कोंकण बेल्ट में ही सीमित रहा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह “मानसून ब्रेक” जैसी स्थिति है, जिसमें बारिश देने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ जाती हैं।

IMD ने बताए मानसून की सुस्ती के 5 बड़े कारण

महाराष्ट्र में क्यों रुका मानसून? भारतीय मौसम विभाग ने बताए 5 बड़े कारण

  1. अरब सागर से कमजोर मानसूनी हवाएं: मानसून को आगे बढ़ाने में अरब सागर की नमी वाली हवाएं अहम भूमिका निभाती हैं। इस बार ये हवाएं अपेक्षाकृत कमजोर हैं, जिससे नमी की आपूर्ति कम हो रही है और बादल बनने की प्रक्रिया धीमी हो गई है।
  2. दक्षिण-पश्चिमी हवाओं का कमजोर प्रवाह: दक्षिण-पश्चिम दिशा से आने वाली हवाएं समुद्र से नमी उठाकर पश्चिमी भारत तक लाती हैं। लेकिन इस बार इन हवाओं की गति कम होने से महाराष्ट्र के तटीय और आंतरिक क्षेत्रों तक पर्याप्त नमी नहीं पहुंच रही।
  3. भूमध्य रेखा पार करने वाली हवाओं में कमजोरी: मानसून को नमी देने वाली कुछ महत्वपूर्ण हवाएं भूमध्य रेखा पार कर भारत तक पहुंचती हैं। इस बार ये हवाएं कमजोर हैं, जिससे वायुमंडल में पर्याप्त जलवाष्प नहीं बन पा रहा है।
  4. लो-प्रेशर सिस्टम का न बनना: मानसून की गति के लिए कम दबाव वाले क्षेत्र (Low Pressure System) का बनना जरूरी होता है। वर्तमान में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों में कोई मजबूत सिस्टम सक्रिय नहीं है। इसके अलावा पश्चिमी तट पर ऑफशोर ट्रफ (निम्न दबाव पट्टी) भी विकसित नहीं हुई है, जिससे बारिश की रफ्तार धीमी हो गई है।
  5. MJO का कमजोर प्रभाव: मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) मानसून को गति देने वाला एक महत्वपूर्ण वायुमंडलीय पैटर्न है। फिलहाल यह कमजोर अवस्था में है या भारत के अनुकूल नहीं है, जिससे मानसून को अतिरिक्त ऊर्जा नहीं मिल पा रही है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशांत महासागर में एल नीनो जैसी परिस्थितियां और पश्चिमी जेट स्ट्रीम का असामान्य व्यवहार भी मानसून की गति को प्रभावित कर रहा है। वेस्टर्न जेट स्ट्रीम ऊपरी वायुमंडल में तेज गति से बहने वाली हवाओं का समूह है, जो मौसम प्रणालियों को दिशा देता है। इसकी असामान्य स्थिति भी मानसूनी सिस्टम को कमजोर कर रही है।

IMD के अनुमान के मुताबिक, 24 से 25 जून के आसपास मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है। यदि लो-प्रेशर सिस्टम और नमी वाली हवाएं मजबूत होती हैं, तो महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में बारिश में सुधार देखने को मिल सकता है।

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