महाराष्ट्र सरकार मकर संक्रांति के अवसर पर लाडली बहन योजना के तहत लगभग 1 करोड़ लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में 3000 रुपए जमा करने वाली है। यह राशि दिसंबर और जनवरी की किस्तों का जोड़ है।
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार मकर संक्रांति के महापर्व पर लाडली बहनों को बड़ी सौगात देने की तैयारी में है। सरकार दिसंबर और जनवरी महीने की किस्त एक साथ लाभार्थियों के खातों में जमा करने जा रही है, जिसकी कुल राशि 3000 रुपये होगी। हालांकि, इस फैसले पर सियासी विवाद भी शुरू हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने इस किस्त को लेकर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा है और सरकार के कदम पर आपत्ति जताई है।
महाराष्ट्र सरकार की लाडली बहन योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं के खाते में नियमित किस्तों का भुगतान किया जाता है। इस बार मकर संक्रांति (14 जनवरी) के महापर्व के अवसर पर 3000 रुपए की राशि जमा की जाएगी। सरकार का कहना है कि यह योजना महिलाओं के सशक्तिकरण और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए चलाई गई है। योजना के अंतर्गत लाभार्थी महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वयं के आर्थिक विकास के लिए यह राशि उपयोग कर सकती हैं।
कांग्रेस का आरोप और चुनाव आयोग को खत

कांग्रेस ने इस योजना की किस्त को बीएमसी चुनाव से पहले जमा किए जाने पर आपत्ति जताई है। पार्टी ने अपने खत में कहा कि 15 जनवरी को मतदान होने वाला है और उससे पहले इस तरह की धनराशि का वितरण आचार संहिता का उल्लंघन माना जा सकता है। कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव से पहले लाडली बहनों के खाते में पैसे जमा होने से लाभार्थी महिलाएं सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में मतदान कर सकती हैं, जिससे इसे सरकारी प्रोत्साहन या वोट बैंक के रूप में देखा जा सकता है।
पार्टी ने यह स्पष्ट किया कि वे लाडली बहन योजना के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार से अनुरोध किया कि योजना की यह किस्त मतदान के बाद ही लाभार्थी महिलाओं के खाते में जमा की जाए। चुनाव आयोग ने इस शिकायत पर महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को सुबह 11 बजे तक अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कहा है। आयोग की निगरानी में ही तय होगा कि राशि का वितरण मतदान से पहले होगा या बाद में।
बीजेपी का पलटवार
इस मामले में भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों का पलटवार किया। पार्टी ने कहा कि कांग्रेस की आपत्ति महिलाओं के अधिकारों और लाभों के खिलाफ है। भाजपा का कहना है कि लाडली बहन योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, न कि वोट बैंक के लिए कोई रणनीति। महाराष्ट्र में 15 जनवरी को बीएमसी चुनाव होने वाले हैं और नतीजे 16 जनवरी को घोषित होंगे। मुंबई में बीएमसी का राजनीतिक महत्व अत्यधिक है क्योंकि शहर की सत्ता जिस पार्टी के हाथ में होती है, उसका प्रभाव पूरे नगर निगम और राजनीतिक परिदृश्य पर पड़ता है।
इस वजह से सभी राजनीतिक दल इस चुनाव पर पूरी तरह से फोकस कर रहे हैं। चुनाव से पहले सरकारी योजनाओं के वितरण को लेकर उठ रहे सवाल और चुनाव आयोग की निगरानी, दोनों ही राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।











