तेनाली रमन और चोर: बुद्धि से मुसीबत को अवसर बनाया

तेनाली रमन और चोर: बुद्धि से मुसीबत को अवसर बनाया

मुसीबत आने पर घबराने की बजाय अगर ठंडे दिमाग से काम लिया जाए, तो बड़ी से बड़ी परेशानी को भी फायदे में बदला जा सकता है। तेनाली रमन अपनी बुद्धिमानी के लिए प्रसिद्ध थे। यह कहानी बताती है कि कैसे उन्होंने अपने घर में आए चोरों से ही अपना खेत सींचवा लिया और मुसीबत को अवसर में बदल दिया।

मुख्य कहानी 

विजयनगर साम्राज्य में भीषण गर्मी का मौसम चल रहा था। बारिश न होने के कारण खेत सूख रहे थे और कुओं का जलस्तर भी काफी नीचे चला गया था।

एक रात, तेनाली रमन खाना खाकर अपने घर के आंगन में टहल रहे थे। तभी उनकी नजर घर के पिछवाड़े की झाड़ियों पर पड़ी। उन्होंने देखा कि झाड़ियों में कुछ हलचल हो रही है और कुछ परछाइयां दिखाई दे रही हैं। तेनाली अपनी तीक्ष्ण बुद्धि से तुरंत समझ गए कि आज रात उनके घर में चोरों ने धावा बोला है और वे झाड़ियों में छिपे सही मौके का इंतजार कर रहे हैं।

तेनाली रमन घबराए नहीं, बल्कि उनके दिमाग में एक योजना आई। वे वापस घर के अंदर गए और अपनी पत्नी से जोर-जोर से (ताकि बाहर छिपे चोर सुन सकें) बातें करने लगे।

तेनाली बोले, 'अजी सुनती हो? आजकल नगर में चोरी की वारदातें बहुत बढ़ गई हैं। हमें सावधान रहना चाहिए।'

उनकी पत्नी ने पूछा, 'तो हम क्या करें?'

तेनाली ने थोड़ा और ऊँची आवाज़ में कहा, 'मैंने सोचा है कि हम अपने घर के सारे सोने-चांदी के जेवर और कीमती सामान एक बड़े से लोहे के संदूक (Box) में भरकर, उसे घर के पिछवाड़े वाले पुराने कुएं में छिपा देंगे। कुएं में पानी बहुत गहरा है, वहां कोई चोर नहीं जाएगा। जब हालात ठीक होंगे, तब हम उसे निकाल लेंगे।'

झाड़ियों में छिपे चोरों ने यह सब सुना और बहुत खुश हुए। उन्होंने सोचा कि अब उन्हें घर में घुसकर मेहनत करने की जरूरत नहीं है, माल तो सीधा कुएं में मिल जाएगा।

इधर तेनाली और उनकी पत्नी ने जल्दी से एक बड़ा सा पुराना संदूक निकाला और उसमें घर के भारी-भारी पत्थर और ईंटें भर दीं। फिर दोनों ने बड़ी मुश्किल से उस भारी संदूक को उठाया और कुएं के पास ले गए।

तेनाली ने जोर से कहा, 'चलो, इसे कुएं में गिरा देते हैं, अब हमारा धन सुरक्षित है।' और 'छपाक!' की जोरदार आवाज के साथ उन्होंने वह संदूक कुएं में गिरा दिया। इसके बाद वे दोनों घर के अंदर जाकर सोने का नाटक करने लगे।

चोरों ने संदूक गिरने की आवाज सुनी। वे तुरंत कुएं के पास आए। उन्होंने देखा कि कुएं में पानी तो है, लेकिन संदूक नीचे तलहटी में है। संदूक निकालने के लिए कुएं का पानी खाली करना जरूरी था।

चोरों ने सोचा, 'आज रात ही मालामाल हो जाएंगे।' उन्होंने पास ही पड़ी एक बाल्टी ली और कुएं से पानी निकालना शुरू कर दिया। वे पानी निकालते और उसे पास ही बनी नाली में फेंकते जाते। वह नाली सीधे तेनाली रमन के सूखे बगीचे और खेतों में जाती थी।

पूरी रात चोर पसीना बहाते रहे और पानी निकालते रहे। इससे तेनाली के पूरे बगीचे और खेत की सिंचाई हो गई।

सुबह होते-होते कुआं लगभग खाली हो गया और संदूक दिखने लगा। चोरों की खुशी का ठिकाना नहीं था। उन्होंने जल्दी से रस्सी डालकर वह भारी संदूक बाहर निकाला।

थकान से चूर चोरों ने जैसे ही उत्सुकता में संदूक का ढक्कन खोला, वे सन्न रह गए। उसमें सोने-चांदी की जगह सिर्फ पत्थर और ईंटें भरी थीं।

तभी घर का दरवाजा खुला और तेनाली रमन मुस्कुराते हुए बाहर आए। उन्होंने चोरों को देखकर हाथ जोड़े और कहा, 'मेरे मित्रों! आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरे खेत सूख रहे थे और मुझे सिंचाई के लिए मजदूरों की जरूरत थी। आप लोगों ने पूरी रात जागकर मेरे खेतों को पानी दिया, आपका यह एहसान मैं कभी नहीं भूलूंगा।'

तेनाली की बात सुनकर चोर शर्मिंदा हो गए और अपनी जान बचाकर वहां से भाग खड़े हुए।

सीख

शारीरिक ताकत के बजाय मानसिक ताकत ज्यादा शक्तिशाली होती है। तेनाली रमन ने चोरों से लड़ने या डरने की बजाय, अपनी बुद्धिमानी का इस्तेमाल किया और उनसे अपना ही काम करवा लिया। अगर हम भी शांत दिमाग से सोचें, तो हर समस्या का हल निकाल सकते हैं।

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