महाराष्ट्र विधानसभा ने पास किया ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026’, जबरन धर्मांतरण पर कड़ी सजा का प्रावधान

महाराष्ट्र विधानसभा ने ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026’ पास किया है। इस कानून में जबरन धर्मांतरण करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। जानें कानून

महाराष्ट्र विधानसभा ने सोमवार देर रात ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026’ पास कर दिया। यह कानून राज्य में जबरन और धोखे से धर्मांतरण रोकने के उद्देश्य से लाया गया है। बिल में अपराधियों को 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। 

मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा में सोमवार देर रात लंबी बहस के बाद 'धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026' पास हो गया। सरकार ने कहा कि यह कानून गैरकानूनी और जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए अत्यंत जरूरी है। इस विधेयक को लेकर विपक्षी गठबंधन 'महा विकास अघाड़ी' में भी फूट दिखाई दी, क्योंकि शिवसेना (यूबीटी) ने बिल का समर्थन किया, जबकि कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) और समाजवादी पार्टी ने इसका कड़ा विरोध किया।

अब मंगलवार को यह बिल महाराष्ट्र विधान परिषद में चर्चा के लिए पेश होगा, जहां इस पर विधायकों की राय और बहस सुनने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

बिल के मुख्य प्रावधान

इस नए कानून के तहत शादी या प्रेम के झांसे में किसी का धर्म बदलवाना अपराध माना जाएगा।

  • सामान्य मामले में दोषी को 7 साल की जेल और 1 लाख रुपये जुर्माना होगा।
  • यदि अपराध नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति-जनजाति (एससी/एसटी) के खिलाफ किया गया है, तो जुर्माना 5 लाख रुपये तक हो सकता है।
  • सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में भी 7 साल की जेल और 5 लाख रुपये जुर्माना होगा।
  • बार-बार अपराध करने वालों के लिए 10 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है।

बिल के अनुसार, जो व्यक्ति अपना धर्म बदलना चाहता है, उसे कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस देना होगा। धर्म परिवर्तन के 21 दिनों के भीतर प्रशासन को जानकारी देना भी अनिवार्य होगा। यदि यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती है, तो धर्मांतरण अवैध माना जाएगा।

महाराष्ट्र विधानसभा ने पास किया ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026’, जबरन धर्मांतरण पर कड़ी सजा का प्रावधान

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान

मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने सदन में स्पष्ट किया कि यह कानून किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य केवल धोखे और लालच से किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकना है। फडणवीस ने कहा कि संविधान हर व्यक्ति को अपना धर्म चुनने की आजादी देता है, लेकिन किसी को डर, धमकी या लालच देकर धर्म बदलवाना गलत है। 

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार महिलाओं को प्रेम जाल में फंसाकर शादी की जाती है और बाद में छोड़ा जाता है। यह कानून ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद करेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत हर नागरिक को धर्म मानने और प्रचार करने का अधिकार है, लेकिन किसी को मजबूर करना कानूनी रूप से गलत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिल का उद्देश्य नागरिकों को गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन से बचाना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। प्रभावित व्यक्ति या उनके करीबी रिश्तेदार शिकायत दर्ज करा सकते हैं, और कुछ मामलों में पुलिस भी स्वतः कार्रवाई कर सकती है। इसके अलावा, यदि अवैध धर्मांतरण के आधार पर कोई शादी होती है और उससे बच्चे का जन्म होता है, तो उस बच्चे को माँ के मूल धर्म (धर्मांतरण से पहले) का पालन करना होगा।

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