मक्का खरीद में देरी, तौल प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और भुगतान अटकने की शिकायतों पर कलेक्टर हेमंत केशव पाटिल ने बाजार यार्ड का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को खरीद प्रक्रिया तेज करने और किसानों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
नागरकुर्नूल: देश के कई कृषि क्षेत्रों में मक्का खरीद प्रक्रिया में देरी किसानों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनती जा रही है। किसानों ने खरीद में धीमी गति, भुगतान में देरी और तौल प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी जैसी समस्याओं को प्रशासन के सामने उठाया है।
इसी बीच जिला प्रशासन ने किसानों की समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाते हुए खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के निर्देश जारी किए हैं।
जिला कलेक्टर ने किया मंडी का निरीक्षण
जिला कलेक्टर हेमंत केशव पाटिल ने नगर स्थित नेल्लिकोंडा मार्केट यार्ड का दौरा कर मक्का खरीद प्रक्रिया का विस्तृत निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने किसानों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, तौल प्रणाली, गुणवत्ता जांच, भंडारण व्यवस्था और परिवहन सुविधाओं की समीक्षा की।
प्रशासन का कहना है कि किसानों को मंडी में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाएगा।
किसानों ने उठाए कई अहम मुद्दे
निरीक्षण के दौरान किसानों ने सीधे जिला कलेक्टर के सामने अपनी समस्याएं रखीं।
किसानों ने शिकायत की कि:
- मक्का खरीद प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है
- तौल प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं है
- भुगतान समय पर नहीं मिल रहा
- मंडी में पर्याप्त सुविधाओं की कमी है
किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने के बाद लंबे समय तक इंतजार करना आर्थिक रूप से भारी पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें परिवहन, भंडारण और श्रम लागत का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ता है।
खरीद प्रक्रिया तेज करने के निर्देश
जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीद प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और किसानों के भुगतान बिना किसी देरी के किए जाएं।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
तौल और गुणवत्ता जांच में पारदर्शिता पर जोर
मंडी में सबसे अधिक शिकायतें तौल प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों को लेकर सामने आईं।
इस पर कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक किसान को स्पष्ट और पारदर्शी तौल प्रक्रिया उपलब्ध कराई जाए। साथ ही गुणवत्ता जांच के दौरान नियमों का सख्ती से पालन किया जाए ताकि किसानों के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो।
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मजदूरों और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था की भी समीक्षा
निरीक्षण के दौरान जिला कलेक्टर ने मंडी में काम कर रहे मजदूरों से भी बातचीत की।
उन्होंने बिहार से आए श्रमिकों सहित अन्य कामगारों से कामकाज की स्थिति, मजदूरी भुगतान और दैनिक कार्य व्यवस्था के बारे में जानकारी ली।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यदि जरूरत हो तो अतिरिक्त श्रमिकों की व्यवस्था की जाए, ताकि लोडिंग और अनलोडिंग कार्य में देरी न हो।
परिवहन और भंडारण व्यवस्था पर विशेष ध्यान
मक्का खरीद प्रक्रिया में परिवहन और भंडारण सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक माने जाते हैं।
कलेक्टर ने प्रतिदिन मंडी में आने वाले ट्रकों और लोरियों की संख्या की जानकारी ली और पूछा कि माल की आवाजाही सुचारु रूप से हो रही है या नहीं।
उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि खरीदी गई फसल समय पर गोदामों तक पहुंचाई जाए ताकि मंडी में अनावश्यक भीड़ न बढ़े।
बिचौलियों से बचने की अपील
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की कि वे बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी उपज सीधे सरकारी खरीद केंद्रों पर लाएं।
प्रशासन का मानना है कि सीधे खरीद केंद्रों तक पहुंचने से किसानों को उचित मूल्य मिलेगा और अनियमितताओं की संभावना कम होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार कृषि क्षेत्र में बिचौलियों की भूमिका कई बार किसानों की आय को प्रभावित करती है, क्योंकि फसल का वास्तविक लाभ किसानों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता।
कृषि बाजारों में सुधार की जरूरत
यह मामला देशभर में कृषि खरीद प्रणाली से जुड़े व्यापक मुद्दों की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल तौल प्रणाली, ऑनलाइन भुगतान और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों को लागू कर खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सकता है।
इसके अलावा मंडियों में पर्याप्त श्रमिक, बेहतर सड़क संपर्क और आधुनिक भंडारण सुविधाएं भी जरूरी हैं।
किसानों की आर्थिक स्थिति पर असर
मक्का खरीद में देरी का सीधा असर किसानों की आय और आर्थिक स्थिरता पर पड़ता है।
समय पर भुगतान न मिलने से किसान अगली फसल की तैयारी, बीज खरीद और ऋण भुगतान जैसी जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई महसूस करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि क्षेत्र में समय पर भुगतान व्यवस्था मजबूत करना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।








