मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेहमचंद सिंह ने कहा कि ब्रूस ली की फिल्म ‘Enter the Dragon’ ने उन्हें ताइक्वांडो सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सिनेमा लोगों को सकारात्मक रूप से प्रेरित करने की ताकत रखता है। ब्रूस ली से प्रेरित होकर ताइक्वांडो तक पहुँचे मणिपुर के मुख्यमंत्री के. खेमचंद सिंह: जानिए पूरी कहानी
इम्फाल: मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अपने जीवन से जुड़ा एक दिलचस्प और प्रेरणादायक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके जीवन पर विश्व प्रसिद्ध मार्शल आर्ट्स कलाकार और अभिनेता Bruce Lee का गहरा प्रभाव पड़ा, जिसके कारण उन्होंने युवावस्था में ताइक्वांडो सीखने का निर्णय लिया।
यह बयान उन्होंने 28 मई को इम्फाल में आयोजित एक मणिपुरी फिल्म कार्यक्रम के दौरान दिया, जहाँ उन्होंने सिनेमा और खेलों के सामाजिक प्रभाव पर भी विस्तार से बात की।
1978-79 में ‘एंटर द ड्रैगन’ ने बदली सोच
मुख्यमंत्री ने बताया कि जब वे किशोरावस्था में थे, तब 1978-79 के आसपास ब्रूस ली की प्रसिद्ध फिल्म “Enter the Dragon” देखने का अवसर मिला। इस फिल्म ने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला और उन्हें मार्शल आर्ट्स की ओर आकर्षित किया।
उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने पहली बार यह महसूस किया कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह लोगों के विचारों, सपनों और जीवन के लक्ष्यों को भी प्रभावित कर सकता है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस फिल्म को देखने के बाद उनके अंदर ताइक्वांडो सीखने की इच्छा मजबूत हुई और उन्होंने इस दिशा में गंभीरता से कदम बढ़ाने का निर्णय लिया।
लखनऊ तक की यात्रा और ताइक्वांडो की शुरुआत
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि प्रेरणा मिलने के बाद वे प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश के लखनऊ गए। वहीं उन्होंने ताइक्वांडो का प्रशिक्षण लेना शुरू किया।
धीरे-धीरे उन्होंने इस खेल में अपनी दक्षता बढ़ाई और वर्षों के अभ्यास के बाद वे ब्लैक बेल्ट तक पहुंचे। उनका यह सफर इस बात का उदाहरण है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासन हो तो किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मार्शल आर्ट्स ने उन्हें न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाया, बल्कि मानसिक अनुशासन और आत्मविश्वास भी दिया, जो उनके सार्वजनिक जीवन में भी उपयोगी साबित हुआ।
16 वर्ष की उम्र से मार्शल आर्ट्स का जुड़ाव
वाई. खेमचंद सिंह ने बताया कि वे मात्र 16 वर्ष की उम्र से ही मार्शल आर्ट्स से जुड़े हुए हैं। लंबे समय तक उन्होंने इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से अभ्यास किया और प्रतियोगिताओं व संगठनों से भी जुड़े रहे।
वे ताइक्वांडो से जुड़े विभिन्न मंचों पर भी सक्रिय रहे हैं और खेल को बढ़ावा देने में योगदान देते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खेल और शिक्षा दोनों ही युवाओं के समग्र विकास के लिए आवश्यक हैं।
ताइक्वांडो संघ से जुड़ी जिम्मेदारियाँ
मुख्यमंत्री ने अपने खेल करियर के दौरान ताइक्वांडो से जुड़े संगठनों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। वे ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।
इस दौरान उन्होंने देश में, विशेषकर पूर्वोत्तर भारत में, मार्शल आर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें कीं। उनका मानना है कि खेल न केवल फिटनेस का माध्यम हैं, बल्कि यह अनुशासन, नेतृत्व और आत्म-नियंत्रण जैसे गुणों को भी विकसित करते हैं।

सिनेमा की शक्ति पर जोर
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने सिनेमा की भूमिका पर भी विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि फिल्में समाज को प्रेरित करने और सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे ब्रूस ली की फिल्म ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उनके अनुसार, यदि सिनेमा को सही संदेश के साथ प्रस्तुत किया जाए तो यह युवाओं को न केवल प्रेरित कर सकता है, बल्कि उन्हें अपने लक्ष्य निर्धारित करने में भी मदद कर सकता है।
मणिपुरी सिनेमा के विकास को लेकर सरकार का समर्थन
इम्फाल में आयोजित इस फिल्म कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मणिपुरी सिनेमा के विकास के लिए सरकार की ओर से पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन भी दिया।
उन्होंने कहा कि मणिपुर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में सिनेमा की अहम भूमिका है। इसलिए राज्य सरकार स्थानीय फिल्म उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि मणिपुरी फिल्में न केवल राज्य के भीतर बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकती हैं, यदि उन्हें उचित संसाधन और मंच मिले।
युवाओं के लिए प्रेरणा का संदेश
मुख्यमंत्री ने अपने जीवन अनुभव को साझा करते हुए युवाओं को संदेश दिया कि प्रेरणा कहीं से भी मिल सकती है—चाहे वह फिल्म हो, कोई व्यक्ति हो या कोई घटना।
उन्होंने कहा कि यदि युवा अनुशासन, मेहनत और समर्पण को अपनाते हैं, तो वे अपने जीवन में किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
ताइक्वांडो के माध्यम से उन्होंने सीखा कि आत्मरक्षा के साथ-साथ आत्मविश्वास भी जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।









