असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने नगांव उपचुनाव से पहले दावा किया कि BJP को अल्पसंख्यक समुदाय के वोट मिलते रहे हैं। उन्होंने चार विधानसभा क्षेत्रों में 40,000 से अधिक वोट मिलने का उल्लेख किया। नगांव में 6 अक्टूबर को मतदान होगा।
गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने नगांव लोकसभा उपचुनाव से पहले दावा किया है कि अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ मतदाता लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का समर्थन करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि नगांव लोकसभा क्षेत्र के मुस्लिम बहुल इलाकों में भी BJP को वोट मिलते हैं। मुख्यमंत्री ने अपने दावे के समर्थन में पिछले लोकसभा चुनाव में कुछ विधानसभा क्षेत्रों में BJP को मिले वोटों का उल्लेख किया।
नगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर को मतदान होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। यह सीट पूर्व कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। बोरदोलोई बाद में BJP में शामिल हुए और असम विधानसभा चुनाव में दिसपुर सीट से BJP के टिकट पर चुनाव लड़े।
हिमंत सरमा ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को दीफू में पत्रकारों से बातचीत के दौरान नगांव उपचुनाव और BJP के समर्थन आधार पर बात की। उन्होंने कहा कि पार्टी को अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का भी समर्थन मिलता रहा है। सरमा ने नगांव लोकसभा क्षेत्र के चार विधानसभा क्षेत्रों—धिंग, रूपोहीहाट, लाहरीघाट और सामागुरी—का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में BJP को इन क्षेत्रों में 40,000 से अधिक वोट मिले थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन विधानसभा क्षेत्रों में हिंदू आबादी बहुत अधिक नहीं है। उनके मुताबिक, यह इस बात का संकेत है कि अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ मतदाता भी BJP को वोट देते रहे हैं। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय से BJP को मिलने वाले समर्थन का प्रतिशत सीमित हो सकता है, लेकिन पार्टी को इस वर्ग से वोट मिलते हैं।
आगामी उपचुनाव में समर्थन बढ़ने का दावा
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि BJP को उम्मीद है कि नगांव उपचुनाव में अल्पसंख्यक समुदाय से मिलने वाला समर्थन बढ़ सकता है।
उन्होंने इस समर्थन को राज्य सरकार की विकास योजनाओं, शांति और सामाजिक सद्भाव से जोड़ते हुए कहा कि सरकार के कामकाज के कारण अलग-अलग समुदायों के लोगों में BJP के प्रति समर्थन बना है।
यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक दावा है। उपलब्ध रिपोर्ट में इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र मतदाता सर्वेक्षण या आधिकारिक समुदाय-वार मतदान आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए उनके बयान को चुनावी दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
नगांव BJP का पारंपरिक गढ़ नहीं रहा
सरमा ने यह भी कहा कि नगांव लोकसभा सीट पारंपरिक रूप से BJP की सीट नहीं रही है। हालांकि, उनके अनुसार पिछले कुछ समय में क्षेत्र में BJP के समर्थन में बदलाव देखने को मिला है।
नगांव का चुनावी समीकरण इस बार कई दलों की मौजूदगी के कारण भी चर्चा में है। BJP ने पूर्व IAS अधिकारी देवाशीष शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा को मैदान में उतारा है, जबकि ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल भी चुनाव लड़ रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अब्दुल सलाम को उम्मीदवार बनाया है।
कैसे खाली हुई नगांव लोकसभा सीट?
नगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव की जरूरत पूर्व कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद पड़ी। बोरदोलोई ने कांग्रेस छोड़कर BJP का दामन थामा और बाद में 2026 के असम विधानसभा चुनाव में दिसपुर विधानसभा सीट से BJP उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।
उनके लोकसभा से इस्तीफा देने के बाद नगांव सीट रिक्त हो गई और निर्वाचन आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा की। मतदान 6 अक्टूबर और मतगणना 9 अक्टूबर को निर्धारित है।
BJP ने पूर्व IAS अधिकारी देवाशीष शर्मा को उतारा
BJP ने नगांव उपचुनाव में पूर्व IAS अधिकारी देवाशीष शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है। शर्मा नगांव के जिला आयुक्त के रूप में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने 3 सितंबर को सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और इसके बाद BJP में शामिल हुए। पार्टी ने उन्हें उपचुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया।
उनकी उम्मीदवारी को लेकर BJP ने प्रशासनिक अनुभव और स्थानीय स्तर पर उनकी पूर्व भूमिका को चुनावी अभियान का हिस्सा बनाया है। उन्होंने 16 सितंबर को अपना नामांकन दाखिल किया था।
कांग्रेस की सिबामोनी बोरा मैदान में
कांग्रेस ने नगांव सीट से पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा को उम्मीदवार बनाया है। बोरा असम विधानसभा में बटद्रवा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
उनके नामांकन के साथ BJP और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबले के अलावा AIUDF और TMC की मौजूदगी ने चुनाव को बहुकोणीय बना दिया है। 16 सितंबर को BJP के देवाशीष शर्मा, कांग्रेस की सिबामोनी बोरा और AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल समेत कई उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था।
बदरुद्दीन अजमल की मौजूदगी से बदला मुकाबला
AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल भी नगांव उपचुनाव में उम्मीदवार हैं। अजमल फिलहाल बिन्नाकांडी विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और इससे पहले लोकसभा सदस्य रह चुके हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में धुबरी सीट से हारने के बाद अब वह नगांव के जरिए संसद में वापसी की कोशिश कर रहे हैं। AIUDF ने 15 सितंबर को उनकी उम्मीदवारी की घोषणा की थी।
TMC ने भी नगांव सीट से अब्दुल सलाम को उम्मीदवार बनाया है। इससे चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला और व्यापक हो गया है।
अल्पसंख्यक वोट क्यों चर्चा में हैं?
नगांव लोकसभा क्षेत्र में अल्पसंख्यक मतदाताओं की मौजूदगी चुनावी चर्चा का एक प्रमुख विषय बनी हुई है। हाल की रिपोर्टों में राजनीतिक विश्लेषकों ने भी इस वर्ग के मतदाताओं की भूमिका पर चर्चा की है। हालांकि, किसी समुदाय के सभी मतदाताओं के एक ही राजनीतिक दल को वोट देने का निष्कर्ष केवल जनसांख्यिकीय आंकड़ों से नहीं निकाला जा सकता।
ऐसे में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का यह दावा कि BJP को अल्पसंख्यक समुदाय के वोट मिलते हैं, आगामी उपचुनाव के राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है। वास्तविक मतदान व्यवहार का आकलन 6 अक्टूबर को मतदान और बाद में आधिकारिक परिणाम आने के बाद ही किया जा सकेगा।
6 अक्टूबर को मतदान, 9 अक्टूबर को परिणाम
नगांव लोकसभा उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी। BJP, कांग्रेस, AIUDF और TMC समेत कई दलों के उम्मीदवार मैदान में हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का अल्पसंख्यक मतदाताओं के समर्थन से जुड़ा बयान ऐसे समय आया है जब सभी प्रमुख दल नगांव में अपने-अपने सामाजिक और राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। चुनाव में किस उम्मीदवार को कितना समर्थन मिलता है, इसका फैसला मतदाता करेंगे और परिणाम 9 अक्टूबर को सामने आएगा।











