Nagpur Municipal Results: RSS के गढ़ नागपुर में BJP की दमदार बढ़त, कांग्रेस पीछे

Nagpur Municipal Results: RSS के गढ़ नागपुर में BJP की दमदार बढ़त, कांग्रेस पीछे

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 की मतगणना में RSS के गढ़ नागपुर से BJP को मजबूत बढ़त मिली है। 151 वार्डों में भाजपा बहुमत के करीब पहुंची, जबकि कांग्रेस पिछड़ गई। नतीजों ने राज्य की राजनीति के संकेत दिए साफ।

BMC Election: महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 की मतगणना जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे RSS के गढ़ माने जाने वाले नागपुर से भाजपा के लिए बेहद मजबूत संकेत सामने आ रहे हैं। नागपुर नगर निगम के 151 वार्डों में भारतीय जनता पार्टी स्पष्ट बढ़त के साथ जीत की ओर बढ़ती नजर आ रही है। शुरुआती रुझानों ने साफ कर दिया है कि शहर की राजनीति में भाजपा की पकड़ अभी भी बेहद मजबूत बनी हुई है।

नागपुर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का केंद्र माना जाता है, ऐसे में यहां का चुनावी परिणाम केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं है। यह नतीजे महाराष्ट्र की सियासत और आने वाले विधानसभा समीकरणों पर भी असर डाल सकते हैं।

151 वार्डों में BJP का दबदबा

मतगणना के लगभग दो घंटे बाद जो तस्वीर सामने आई है, उसके मुताबिक भाजपा 151 में से 78 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। यह आंकड़ा बहुमत के करीब पहुंच चुका है और भाजपा को स्पष्ट बढ़त की स्थिति में दिखाता है।

वहीं कांग्रेस इस मुकाबले में काफी पीछे नजर आ रही है और केवल 26 सीटों पर ही आगे चल रही है। महा विकास अघाड़ी से जुड़ी अन्य पार्टियां भी किसी भी स्तर पर भाजपा को चुनौती देती नहीं दिख रही हैं।

महायुति गठबंधन को नागपुर में मजबूती

नागपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और एनसीपी के साथ महायुति गठबंधन के तहत मैदान में उतरी थी। हालांकि, सीटों की बढ़त के मामले में भाजपा अकेले दम पर सबसे आगे दिखाई दे रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नागपुर में यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि शहरी मतदाता अब भी भाजपा की नीतियों और नेतृत्व पर भरोसा जता रहा है।

कांग्रेस के लिए बड़ा झटका

नागपुर जैसे बड़े और अहम शहर में कांग्रेस का पिछड़ना पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। कभी शहर की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाली कांग्रेस इस बार मतदाताओं को प्रभावित करने में असफल दिख रही है।

विश्लेषकों के अनुसार, संगठनात्मक कमजोरी, स्थानीय मुद्दों पर कमजोर पकड़ और नेतृत्व की कमी कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के प्रमुख कारण हो सकते हैं।

नागपुर का सामाजिक और चुनावी स्वरूप

2011 की जनगणना के अनुसार नागपुर की कुल आबादी लगभग 24.47 लाख थी। शहर के 38 वार्डों में बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाता रहते हैं।

नगर निगम चुनाव में महिलाओं के लिए 76 सीटें आरक्षित की गई थीं, जिससे लैंगिक संतुलन सुनिश्चित किया गया। इस बार के चुनाव में इन सभी वर्गों का रुझान भाजपा की ओर झुका हुआ दिखाई दे रहा है।

जनता की भागीदारी

नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, गुरुवार को हुए मतदान में नागपुर में करीब 51 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। यह आंकड़ा शहरी चुनावों के लिहाज से संतोषजनक माना जा रहा है।

इस चुनाव में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और RSS प्रमुख मोहन भागवत समेत कई प्रमुख हस्तियों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इन नामों की मौजूदगी ने चुनाव को और भी ज्यादा राजनीतिक महत्व दे दिया।

अमिट स्याही को लेकर उठा विवाद

मतदान के बाद नागपुर समेत कई नगर निगम क्षेत्रों में अमिट स्याही को लेकर विवाद सामने आया। शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेताओं उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि मतदाताओं की उंगलियों पर लगाई गई स्याही आसानी से मिटाई जा सकती है।

उनका कहना था कि अगर स्याही की गुणवत्ता कमजोर है, तो इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

राज्य चुनाव आयोग का जवाब

इन आरोपों पर राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने कड़ा रुख अपनाया। महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयुक्त डी टी वाघमारे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस्तेमाल की गई अमिट स्याही पूरी तरह मानकों के अनुसार है और उसे आसानी से नहीं मिटाया जा सकता। उन्होंने कहा कि मतदान प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं हुई है और विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप केवल भ्रम फैलाने का प्रयास हैं।

विपक्ष के आरोपों को बताया बेबुनियाद

चुनाव आयुक्त ने यह भी कहा कि हर चुनाव के बाद इस तरह के आरोप लगाना अब एक राजनीतिक ट्रेंड बनता जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चुनाव आयोग ने पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरी की है। उनके अनुसार, मतदाताओं का भरोसा बनाए रखना आयोग की प्राथमिकता है और किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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