नैनीताल में मूसलाधार बारिश से बढ़ा झील का जलस्तर, 6 इंच पानी की निकासी जारी

नैनीताल में लगातार बारिश से नैनीझील का जलस्तर बढ़ गया है। सिंचाई विभाग ने दोनों निकासी गेट खोलकर छह इंच पानी बाहर निकालना शुरू किया है।
नैनीताल में मूसलाधार बारिश से बढ़ा झील का जलस्तर, 6 इंच पानी की निकासी जारी
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उत्तराखंड के नैनीताल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर नैनीझील के जलस्तर पर भी दिखाई दे रहा है। बारिश के कारण झील का पानी लगातार बढ़ने के बाद सिंचाई विभाग ने जल निकासी की प्रक्रिया तेज कर दी है। सुरक्षा और जलस्तर को नियंत्रित रखने के लिए झील के दोनों निकासी गेट खोलकर करीब छह-छह इंच पानी बाहर निकाला जा रहा है। प्रशासन और संबंधित विभाग झील के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, ताकि बारिश जारी रहने की स्थिति में पानी निर्धारित सीमा से ज्यादा न बढ़े।

नैनीताल में पिछले कुछ दिनों से मौसम लगातार करवट ले रहा है। रुक-रुककर और कई बार तेज बारिश होने के कारण शहर के नालों में पानी का बहाव बढ़ गया है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण भारी बारिश का सीधा असर जलस्रोतों और झील के जलस्तर पर पड़ता है। नैनीझील में आसपास के जलग्रहण क्षेत्र से पानी पहुंचने के कारण बारिश तेज होते ही झील का स्तर भी तेजी से ऊपर जाने लगता है। इसी वजह से जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर निकासी गेट खोले जाते हैं।

हाल में नैनीताल में झील का जलस्तर 87 फीट 7 इंच तक पहुंचने के बाद सिंचाई विभाग ने दोनों निकासी द्वार छह-छह इंच खोले थे। विभाग के अनुसार अगस्त में 87 फीट से अधिक जलस्तर होने पर पानी की निकासी शुरू करने का मानक रहा है। इससे पहले भी बारिश बढ़ने पर निकासी गेट को अलग-अलग स्तर पर खोला जाता रहा है।

बारिश अगर इसी तरह जारी रहती है तो झील के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी हो सकती है। इसी संभावना को देखते हुए विभाग की ओर से जल निकासी की व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है। जरूरत के अनुसार गेट को कम या ज्यादा खोलने का निर्णय लिया जा सकता है। इसका उद्देश्य एक तरफ झील का जलस्तर नियंत्रित रखना है और दूसरी तरफ अचानक अत्यधिक पानी बाहर निकलने से निचले इलाकों में किसी तरह की समस्या न पैदा हो।

नैनीझील का जलस्तर नैनीताल शहर की सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। झील का पानी बढ़ने पर सबसे पहले इसके आसपास के निचले हिस्सों में पानी पहुंचने की आशंका रहती है। सामान्य स्थिति में जलस्तर नियंत्रित रखने के लिए निकासी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है। भारी बारिश के दौरान यह व्यवस्था और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि कम समय में बड़ी मात्रा में पानी झील में पहुंच सकता है।

नैनीताल में हुई तेज बारिश का असर सिर्फ झील तक सीमित नहीं है। जिले के कई ग्रामीण और पहाड़ी मार्गों पर भी बारिश के कारण मलबा आने, जलभराव और यातायात प्रभावित होने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। इससे प्रशासन के सामने एक साथ कई मोर्चों पर निगरानी की चुनौती बनी हुई है। मौसम खराब होने के दौरान सड़क मार्गों के साथ-साथ झील और नालों की स्थिति पर नजर रखना भी जरूरी हो जाता है।

हाल के दिनों में दो घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश के दौरान शहर के कई नाले उफान पर आ गए थे और नैनीझील के जलस्तर में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। उस दौरान झील के दोनों गेट नौ-नौ इंच तक खोलने पड़े थे। इससे स्पष्ट है कि तेज बारिश होने पर झील के जलस्तर में तेजी से बदलाव हो सकता है।

नैनीताल की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां बारिश के पानी का असर बहुत जल्दी दिखाई देता है। पहाड़ों से पानी नीचे की ओर आने के कारण कई छोटे नाले कुछ ही समय में तेज धार में बदल जाते हैं। इसी तरह झील में भी आसपास के क्षेत्रों से पानी पहुंचता है। यदि लगातार कई घंटे तक बारिश होती है तो जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए निकासी व्यवस्था का इस्तेमाल करना पड़ता है।

झील के दोनों निकासी गेटों से छह इंच पानी बाहर निकाला जाना इसी निगरानी व्यवस्था का हिस्सा है। जल निकासी के दौरान संबंधित विभाग यह भी देखता है कि झील के स्तर में कितनी कमी आ रही है और बारिश के कारण कितनी तेजी से नया पानी झील में पहुंच रहा है। यदि बारिश की तीव्रता कम होती है तो जलस्तर स्थिर हो सकता है, जबकि लगातार तेज बारिश की स्थिति में निकासी बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।

नैनीताल में झील के जलस्तर को लेकर निर्धारित मानक लंबे समय से इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जून, जुलाई और अगस्त के अलग-अलग समय के लिए जल निकासी के अलग-अलग स्तर तय हैं। 30 अगस्त के लिए ब्रिटिशकालीन मानक 87 फीट बताया गया है, जबकि 15 सितंबर के लिए यह सीमा 88 फीट और 30 सितंबर के लिए 89 फीट तक जाती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य मौसम और मौसम के साथ बदलने वाले जलस्तर को ध्यान में रखते हुए झील में अतिरिक्त पानी को नियंत्रित करना है। बारिश के मौसम में झील का पानी बढ़ना सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन जलस्तर को एक सुरक्षित सीमा के भीतर रखना जरूरी होता है। इसी कारण सिंचाई विभाग के अधिकारी लगातार जलस्तर की निगरानी करते हैं और आवश्यकता के अनुसार निकासी गेट संचालित करते हैं।

इस साल भी नैनीझील के जलस्तर में बारिश के साथ लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया है। अगस्त की शुरुआत में झील का जलस्तर पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत कम था। नौ अगस्त को 2026 में जलस्तर 85 फीट 3 इंच दर्ज किया गया था, जबकि 2025 में इसी अवधि में यह 86 फीट और 2024 में 86 फीट 6 इंच था। इसके बाद मानसूनी बारिश बढ़ने के साथ झील का स्तर तेजी से ऊपर गया।

बारिश के कारण झील का जलस्तर बढ़ना नैनीताल के लिए चिंता का विषय इसलिए भी होता है क्योंकि शहर का बड़ा हिस्सा झील के आसपास बसा हुआ है। माल रोड, तल्लीताल और मल्लीताल जैसे प्रमुख इलाके झील से जुड़े हैं। जलस्तर बहुत अधिक बढ़ने की स्थिति में झील का पानी आसपास की सड़कों और निचले हिस्सों तक पहुंच सकता है। ऐसे में समय रहते जल निकासी करना जरूरी हो जाता है।

प्रशासन के लिए चुनौती सिर्फ झील से पानी निकालने की नहीं बल्कि निकासी के बाद पानी के बहाव को नियंत्रित रखने की भी होती है। यदि बाहर निकाला गया पानी तेज गति से निचले क्षेत्रों की ओर जाता है तो वहां जलभराव की स्थिति बन सकती है। इसलिए निकासी प्रक्रिया के दौरान झील के साथ-साथ आसपास के नालों और जल निकासी मार्गों की स्थिति पर भी नजर रखना आवश्यक है।

भारी बारिश के दौरान पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए भी सावधानी जरूरी है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के समय अचानक मलबा आने, सड़क पर पानी बहने और फिसलन बढ़ने का खतरा रहता है। झील के आसपास भी पानी के तेज बहाव वाले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए। प्रशासन की ओर से जारी मौसम और सड़क संबंधी चेतावनियों का पालन करना यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है।

नैनीताल में लगातार बारिश का असर पर्यटन गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। खराब मौसम में पर्यटक स्थलों पर आवाजाही प्रभावित होती है और कई बार दृश्यता कम होने के कारण सड़क यात्रा जोखिमपूर्ण हो जाती है। इसके बावजूद बारिश नैनीझील और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोतों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे जलस्रोतों को पानी मिलता है और गर्मियों के दौरान कम हुए जलस्तर में सुधार होता है।

हालांकि इस समय सबसे जरूरी बात जलस्तर की लगातार निगरानी है। पिछले दिनों तेज बारिश के दौरान झील के गेट नौ-नौ इंच तक खोलने पड़े थे, जबकि इससे पहले छह-छह इंच पर भी जल निकासी की गई थी। इससे पता चलता है कि बारिश की तीव्रता के अनुसार विभाग निकासी की मात्रा में बदलाव करता है।

नैनीताल में मानसून के दौरान झील नियंत्रण व्यवस्था पहले से तय प्रक्रिया के अनुसार संचालित की जाती है। अधिकारियों के लिए जलस्तर का रिकॉर्ड रखना, निकासी गेट की स्थिति की निगरानी करना और मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर आगे की रणनीति तैयार करना महत्वपूर्ण होता है। लगातार बारिश की स्थिति में इन सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

मौजूदा हालात में छह इंच पानी की निकासी जारी रहने से झील के बढ़ते जलस्तर को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि बारिश की रफ्तार कम होती है तो जलस्तर स्थिर होने की संभावना रहती है, जबकि बारिश तेज होने पर निकासी की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। इसलिए आने वाले घंटों में मौसम की स्थिति और झील के जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी रहेगी।

नैनीताल में लगातार बारिश के बीच नैनीझील का जलस्तर बढ़ना फिलहाल प्रशासन के लिए निगरानी का विषय है। सिंचाई विभाग की ओर से दोनों निकासी गेटों के जरिए पानी बाहर निकाला जा रहा है और आवश्यकता के अनुसार आगे कदम उठाए जाएंगे। भारी बारिश के बीच झील के जलस्तर को नियंत्रित रखना इसलिए जरूरी है, ताकि शहर और झील के आसपास के क्षेत्रों में जलभराव या अन्य समस्या की स्थिति पैदा न हो।

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