रोहन नाम का एक लड़का था जिसे अंतरिक्ष और तारों में बहुत दिलचस्पी थी। वह अक्सर अपनी छत पर लेटे हुए सोचा करता था कि क्या हम इस ब्रह्मांड में अकेले हैं? एक रात, उसका यह सवाल एक हकीकत में बदल गया जब उसके घर के पीछे एक अजीब सी नीली रोशनी उतरी। यह एक ऐसी अनोखी दोस्ती की शुरुआत थी जो इस दुनिया से परे थी।
कहानी
एक शांत मंगलवार की रात थी। रोहन अपनी दूरबीन से चाँद के गड्ढों को देख रहा था। तभी अचानक, आसमान में एक नीली रोशनी की लकीर खिंची और बिना किसी आवाज़ के, उसके घर के पीछे वाले खेत में जा गिरी।
रोहन का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। वह अपनी टॉर्च लेकर दबे पाँव पीछे के दरवाज़े से बाहर निकला। खेत के बीचों-बीच घास जली हुई थी और वहाँ एक छोटा, तश्तरी जैसा गोल यान खड़ा था। उसमें से हल्की भाप निकल रही थी।
रोहन एक पेड़ के पीछे छिप गया। तभी यान का दरवाज़ा खुला और एक सीढ़ी नीचे आई। उसमें से जो प्राणी बाहर निकला, उसे देखकर रोहन की साँस अटक गई।
वह प्राणी कद में रोहन जितना ही छोटा था। उसकी त्वचा चमकदार नीले रंग की थी, आँखें बड़ी और काली थीं, और उसके हाथों में तीन-तीन उंगलियाँ थीं। वह कोई डरावना मॉन्स्टर नहीं लग रहा था, बल्कि वह खुद डरा हुआ और खोया हुआ सा लग रहा था।
उस नीले प्राणी ने एक अजीब सी आवाज़ निकाली, जैसे कोई बिल्ली घुरघुरा रही हो, 'ब्रर्रप-बीप?'
रोहन समझ गया कि उसे डरने की ज़रूरत नहीं है। वह धीरे-धीरे पेड़ के पीछे से बाहर आया। उसने अपना हाथ हिलाया और कहा, 'हेलो। मेरा नाम रोहन है। तुम कौन हो?'
नीले प्राणी ने अपना सिर टेढ़ा किया। वह शायद इंसान की भाषा नहीं समझता था। उसने आसमान की तरफ उंगली उठाई, फिर अपनी छाती पर हाथ रखा और एक अजीब सी आवाज़ में बोला, 'ज़ोर्प।'
रोहन मुस्कुराया। 'तुम्हारा नाम ज़ोर्प है?'
ज़ोर्प ने अपनी कलाई पर बंधे एक गैजेट को दबाया। उससे हवा में एक 3D तस्वीर बन गई। उसमें एक बैंगनी रंग का ग्रह दिख रहा था जिसके दो चाँद थे। ज़ोर्प ने दुःख भरी नज़रों से अपने यान की तरफ इशारा किया। यान के ऊपर लगा एक छोटा एंटीना टेढ़ा हो गया था।
रोहन समझ गया। 'ओह! तुम्हारा यान खराब हो गया है और तुम अपने घर सिग्नल नहीं भेज पा रहे हो।'
रोहन ने इशारों में ज़ोर्प को रुकने के लिए कहा और दौड़कर अपने गैरेज में गया। वह कुछ पेंचकस, प्लास और एल्युमिनियम फॉयल का एक रोल लेकर लौटा।
रोहन ने यान के ऊपर चढ़कर टेढ़े एंटीना को सीधा करने की कोशिश की। यह आसान नहीं था। ज़ोर्प नीचे खड़ा 'बीप-बीप' करके शायद उसे निर्देश दे रहा था। अंत में, रोहन ने एंटीना सीधा किया और सिग्नल बढ़ाने के लिए उस पर एल्युमिनियम फॉयल लपेट दी।
'अब कोशिश करो, ज़ोर्प!' रोहन ने नीचे कूदते हुए कहा।
ज़ोर्प ने अपने यान के अंदर जाकर एक बड़ा लाल बटन दबाया। एंटीना से एक तेज़ नीली किरण निकली और सीधे आसमान की तरफ गई। यान के अंदर से एक खुशभरी आवाज़ आई, 'वूप-वूप-वूप!'
ज़ोर्प खुशी से उछल पड़ा। उसने रोहन को गले लगा लिया, हालांकि उसकी नीली त्वचा थोड़ी ठंडी थी। ज़ोर्प ने अपनी कलाई से एक छोटा, चमकता हुआ नीला पत्थर निकाला और रोहन की हथेली पर रख दिया। यह एक तोहफ़ा था।
'दोस्त,' ज़ोर्प ने अपनी टूटी-फूटी आवाज़ में इंसानी भाषा का पहला शब्द बोला।
कुछ ही देर में, यान फिर से शुरू हो गया। ज़ोर्प अंदर गया और उसने हाथ हिलाया। यान हवा में उठा और पलक झपकते ही तारों के बीच गायब हो गया।
रोहन खेत में अकेला खड़ा था, हाथ में वह नीला जादुई पत्थर पकड़े हुए। वह जानता था कि उसने अभी-अभी ब्रह्मांड का सबसे बड़ा राज़ जाना है, कि हम अकेले नहीं हैं, और दोस्ती किसी भी भाषा या ग्रह से बड़ी होती है।
सीख
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि दोस्ती और मदद की कोई सरहद नहीं होती। हमें किसी के रंग-रूप या वह कहाँ से आया है, यह देखकर उससे डरना नहीं चाहिए। सच्ची भाषा दिल की होती है, और जब हम निस्वार्थ भाव से किसी अजनबी की मदद करते हैं, तो हम ब्रह्मांड में सबसे अनोखे रिश्ते बना सकते हैं।













