पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं और जंतर-मंतर पर भी छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसी बीच, NEET-UG 2026 परीक्षा के पेपर लीक से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।
Paper Leak Case: नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में बार-बार होने वाली गलतियों का सिलसिला अब खत्म करना होगा। कोर्ट ने केंद्र सरकार से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी है।
देशभर में NEET UG 2026 पेपर लीक को लेकर विवाद जारी है। इस मुद्दे पर छात्रों और विभिन्न संगठनों की ओर से प्रदर्शन किए जा रहे हैं, जबकि विपक्षी दल भी केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच मामले से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।
NTA की व्यवस्था पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की परीक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गई है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए मौजूदा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया जाए। याचिकाओं में यह भी मांग की गई है कि सरकार ऐसी स्वतंत्र और तकनीकी रूप से मजबूत संस्था या व्यवस्था तैयार करे, जो देशभर में होने वाली महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं को सुरक्षित तरीके से संचालित कर सके। इसके अलावा, पेपर लीक मामले की जांच और उसकी प्रगति को लेकर भी अदालत से आवश्यक निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है।
पूरे साल मामले पर नजर रखेगा सुप्रीम कोर्ट
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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह NEET UG पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े मामले की लगातार निगरानी करेगा। अदालत ने केंद्र सरकार से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इसमें भविष्य में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रस्तावित कदमों की जानकारी देने को कहा गया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल तत्काल समाधान पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ऐसी संस्थागत व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं की आशंका को न्यूनतम किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि परीक्षा प्रक्रिया मजबूत, सुरक्षित और भरोसेमंद बने।
केंद्र ने बताया, कई स्तरों पर हो रहा काम
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए कई कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रिंटिंग प्रेस से लेकर अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र पहुंचने की पूरी प्रक्रिया के बारे में अदालत को विस्तृत जानकारी देगी। केंद्र ने यह भी कहा कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए पहले से मौजूद सुझावों और रिपोर्टों को लागू किया जाएगा।
सरकार की ओर से यह आश्वासन भी दिया गया कि बच्चों और अभ्यर्थियों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
साइबर सिक्योरिटी और कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान परीक्षा प्रणाली के तकनीकी पहलुओं पर भी सवाल किए। अदालत ने पूछा कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा की व्यवस्था किस तरह लागू की जा सकती है और प्रश्नपत्रों को सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक कैसे पहुंचाया जाएगा। कोर्ट ने साइबर सिक्योरिटी को लेकर भी विस्तृत जानकारी मांगी। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि प्रश्नपत्र की तैयारी, प्रिंटिंग, भंडारण, परिवहन और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में गलतियों की पुनरावृत्ति को रोकना जरूरी है और इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।










