नेपाल में सैलाब के बाद पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय की बहू लापता, 21 अगस्त को गई थीं यात्रा पर

नेपाल-तिब्बत सीमा पर विनाशकारी बाढ़ के बाद पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय की बहू शर्मिष्ठा भौमिक रॉय लापता हैं। भारत के 288 नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा।

नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय की बहू शर्मिष्ठा भौमिक रॉय लापता हैं। वह 21 अगस्त को नेपाल गई थीं। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

उत्तर 24 परगना: नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे की चपेट में बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। इसी बीच पश्चिम बंगाल से जुड़ा एक परिवार भी चिंता में है। दिवंगत पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय की बहू शर्मिष्ठा भौमिक रॉय के नेपाल में लापता होने की जानकारी सामने आई है। परिवार के मुताबिक, शर्मिष्ठा 21 अगस्त को एक ट्रैवल एजेंसी के साथ नेपाल गई थीं और 26 अगस्त को आई आपदा के बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पाया है।

शर्मिष्ठा के पति शुवरांग्शु रॉय ने बताया कि उनकी पत्नी इस समय लापता लोगों की सूची में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि परिवार प्रशासन और संबंधित एजेंसियों से संपर्क कर जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहा है। इस बीच नेपाल में बड़े पैमाने पर राहत और तलाश अभियान चलाया जा रहा है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में 288 भारतीय नागरिकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है।

21 अगस्त को नेपाल गई थीं शर्मिष्ठा

शर्मिष्ठा भौमिक रॉय 21 अगस्त को नेपाल यात्रा पर रवाना हुई थीं। परिवार के अनुसार, वह एक ट्रैवल एजेंसी के साथ गई थीं। बुधवार को नेपाल और चीन के सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्र में अचानक आई बाढ़, मलबे और चट्टानों के तेज बहाव के बाद उनसे संपर्क टूट गया।

उनके पति शुवरांग्शु रॉय ने बताया कि अब तक पत्नी से किसी भी माध्यम से बात नहीं हो पाई है। उन्होंने प्रशासन से संपर्क बनाए रखा है और उम्मीद है कि खोज अभियान के दौरान उनकी स्थिति के बारे में जानकारी मिल सकेगी।

परिवार ने यह भी बताया कि शुवरांग्शु और उनके बच्चे भारत में ही हैं। फिलहाल उनकी प्राथमिकता शर्मिष्ठा का पता लगाना है।

नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीयों से संपर्क नहीं

नेपाल में आई आपदा के बाद भारतीय नागरिकों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। भारत के विदेश मंत्रालय ने 27 अगस्त को बताया कि नेपाल में 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा करीब 200 भारतीय नागरिक चीन की ओर सीमावर्ती क्षेत्र में फंसे हुए बताए गए हैं। भारतीय और नेपाली अधिकारियों के बीच उन्हें सुरक्षित निकालने और लापता लोगों का पता लगाने के लिए समन्वय जारी है।

यह आंकड़ा बदल सकता है क्योंकि दुर्गम इलाकों में संचार व्यवस्था और परिवहन ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई सड़कों, पुलों और सीमावर्ती मार्गों के क्षतिग्रस्त होने से राहत टीमों को भी घटनास्थल तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है।

नेपाल-तिब्बत सीमा पर विनाशकारी बाढ़

26 अगस्त को नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्र में भारी मलबे और पानी का तेज बहाव आया। शुरुआती रिपोर्टों में घटना को भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन बाद के विश्लेषण में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS ने स्पष्ट किया कि दर्ज की गई 5.2 तीव्रता की भूकंपीय गतिविधि वास्तव में किसी सामान्य भूकंप के कारण नहीं थी।

USGS के विश्लेषण के अनुसार, बड़े पैमाने पर ग्लेशियर टूटने और उसके बाद बर्फ, चट्टानों तथा मलबे के बहाव ने विनाशकारी स्थिति पैदा की। इस बहाव ने नीचे की ओर नदियों और बस्तियों को प्रभावित किया। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, इस आपदा में नेपाल और तिब्बत दोनों तरफ बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग लापता हैं।

5.2 तीव्रता की भूकंपीय रीडिंग, लेकिन भूकंप नहीं

इस आपदा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी USGS की ओर से सामने आई है। एजेंसी ने बताया कि 26 अगस्त को सीमा क्षेत्र में 5.2 तीव्रता का एक भूकंपीय संकेत रिकॉर्ड हुआ था। शुरुआती तौर पर इसे भूकंप माना गया, लेकिन बाद में नजदीकी भूकंपीय स्टेशनों, लंबी अवधि की भूकंपीय तरंगों और सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करने के बाद निष्कर्ष निकाला गया कि यह ग्लेशियर के टूटने और मलबे के बहाव से पैदा हुई भूकंपीय गतिविधि थी, न कि कोई अलग भूकंप।

इस अंतर ने हादसे की वास्तविक प्रकृति को समझने में अहम भूमिका निभाई है। विशेषज्ञ अब इसे ग्लेशियर टूटने, बर्फ-चट्टान के बड़े पैमाने पर खिसकने और अचानक आई बाढ़ से जोड़कर देख रहे हैं।

चीन पर जानकारी देर से देने के आरोप, लेकिन पुष्टि नहीं

आपदा के शुरुआती घंटों में कुछ रिपोर्टों और दावों में आरोप लगाया गया कि चीन की ओर से नेपाल को सीमा क्षेत्र में हुई तबाही के बारे में पर्याप्त जानकारी समय पर नहीं दी गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

बाद की रिपोर्टों में यह सामने आया कि आपदा की वजह को लेकर शुरुआती जानकारी ही अस्पष्ट थी। नेपाल के अधिकारियों ने शुरुआत में भूकंप या भूस्खलन की आशंका जताई थी, जबकि बाद में वैज्ञानिक विश्लेषण ने ग्लेशियर टूटने और मलबा बहने की घटना की ओर संकेत किया। इसलिए किसी देश पर जानबूझकर सूचना छिपाने का आरोप लगाने से पहले आधिकारिक और स्वतंत्र जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना जरूरी है।

चीन और नेपाल में जारी है राहत अभियान

बाढ़ प्रभावित इलाकों में नेपाल और चीन की एजेंसियां राहत और खोज अभियान चला रही हैं। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, प्रभावित भारतीय नागरिकों तक पहुंचने और लापता लोगों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए भी समन्वय किया जा रहा है। क्षेत्र में क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों के कारण जमीनी बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण है।

राहत टीमों को कई स्थानों पर हेलीकॉप्टर और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। कई परिवार अपने लापता परिजनों के बारे में जानकारी के लिए हेल्पलाइन और सरकारी एजेंसियों से संपर्क कर रहे हैं।

लापता लोगों में पर्यटक और तीर्थयात्री भी शामिल

आपदा का असर केवल स्थानीय आबादी पर नहीं पड़ा है। सीमा क्षेत्र में उस समय बड़ी संख्या में पर्यटक, ट्रेकर्स और कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े तीर्थयात्री भी मौजूद थे। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, 30 से अधिक देशों के नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।

कई विदेशी नागरिक दुर्गम पहाड़ी इलाकों में फंस गए थे और अचानक आए मलबे तथा पानी के तेज बहाव ने उनके लिए बच निकलना मुश्किल कर दिया। इसी वजह से लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आधिकारिक आंकड़े सामने आ रहे हैं।

नेपाल में मौत और लापता लोगों के आंकड़े बदल रहे

बचाव अभियान अभी जारी होने के कारण मृतकों और लापता लोगों की संख्या लगातार अपडेट हो रही है। 27 अगस्त की रिपोर्टों में नेपाल में 270 मौतों की पुष्टि और सैकड़ों लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई। पूरे नेपाल-तिब्बत क्षेत्र को मिलाकर लापता लोगों की संख्या 1,300 से अधिक बताई गई है, हालांकि विभिन्न एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर है।

इस तरह की आपदा में संचार व्यवस्था टूटने, लोगों के अलग-अलग स्थानों पर फंसे होने और सीमा पार आवाजाही बाधित होने के कारण शुरुआती आंकड़े बदलना सामान्य है। प्रशासन की कोशिश है कि अलग-अलग एजेंसियों के रिकॉर्ड का मिलान कर सटीक संख्या सामने लाई जाए।

शर्मिष्ठा के परिवार को उम्मीद, तलाश पर नजर

शर्मिष्ठा भौमिक रॉय के परिवार को अभी तक उनके बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। उनके पति शुवरांग्शु रॉय प्रशासन से संपर्क बनाए हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि राहत एजेंसियों को जल्द कोई जानकारी मिलेगी।

परिवार के लिए सबसे कठिन स्थिति यह है कि नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय भी लापता बताए गए हैं और प्रभावित इलाका काफी दुर्गम है। संचार बाधित होने के कारण कई लोगों का अपने परिवारों से संपर्क टूट गया है।

इस बीच भारतीय और नेपाली अधिकारी लापता भारतीय नागरिकों का पता लगाने तथा प्रभावित लोगों को सहायता पहुंचाने में जुटे हैं।

वैज्ञानिक जांच से स्पष्ट हुई आपदा की वजह

आपदा के कारण को लेकर पहले कई तरह की आशंकाएं सामने आईं। लेकिन USGS के विश्लेषण ने यह स्पष्ट किया कि 5.2 तीव्रता का संकेत एक भूकंप नहीं था, बल्कि ग्लेशियर टूटने और मलबे के बहाव से उत्पन्न भूकंपीय गतिविधि थी। इस घटना के बाद अचानक पानी और चट्टानों के साथ भारी मलबा नीचे की ओर आया, जिससे बस्तियों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान हुआ।

इससे यह भी पता चलता है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और भूस्खलन से जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कितना गंभीर हो सकता है। राहत कार्य के साथ अब प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा और भविष्य की चेतावनी प्रणाली पर भी ध्यान बढ़ने की उम्मीद है।

लापता नागरिकों की तलाश बनी सबसे बड़ी चुनौती

फिलहाल नेपाल में बचाव अभियान का सबसे बड़ा लक्ष्य उन लोगों का पता लगाना है, जिनसे हादसे के बाद संपर्क टूट गया है। भारतीय नागरिकों के अलावा कई देशों के पर्यटक और तीर्थयात्री भी प्रभावित हुए हैं।

शर्मिष्ठा भौमिक रॉय का मामला इसी बड़े मानवीय संकट का हिस्सा है। उनके परिवार को अब राहत एजेंसियों की ओर से किसी सूचना का इंतजार है। जब तक तलाश अभियान जारी है, परिवार और प्रशासन दोनों उनकी सुरक्षित बरामदगी की उम्मीद लगाए हुए हैं।

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