नई Solar Technology से बढ़ेगी पैनलों की क्षमता, कम धूप और छाया में भी बनेगी ज्यादा बिजली

नई Solar Technology से सोलर पैनल कम धूप और छाया में भी बेहतर प्रदर्शन करेंगे। नई तकनीक से बिजली उत्पादन 26% से अधिक बढ़ने की उम्मीद है।

हॉन्गकॉन्ग पोलिटेक्निक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने नया पेरोव्स्काइट-ऑर्गेनिक टैंडम सोलर सेल विकसित किया है। यह छाया और नेगेटिव वोल्टेज में भी बेहतर प्रदर्शन करता है तथा बिजली उत्पादन क्षमता 26% से अधिक बढ़ाने का दावा करता है।

Tech: Solar Technology में बड़ी प्रगति करते हुए हॉन्गकॉन्ग पोलिटेक्निक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऐसा सोलर सेल विकसित किया है, जो छाया पड़ने पर भी अपनी दक्षता बनाए रखता है। नई तकनीक से सोलर पैनलों की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ उनकी लाइफ और विश्वसनीयता में भी सुधार होने की उम्मीद है।

छाया में भी बेहतर प्रदर्शन करेगा नया सोलर सेल

नई Solar Technology से बढ़ेगी पैनलों की क्षमता, कम धूप और छाया में भी बनेगी ज्यादा बिजली

सोलर पैनल लगाने के दौरान हमेशा ऐसी जगह चुनने की सलाह दी जाती है, जहां पेड़, इमारत या बादलों की छाया न पड़े। छाया पड़ने पर पैनलों में नेगेटिव वोल्टेज (रिवर्स बायस स्ट्रेस) पैदा होता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। अब हॉन्गकॉन्ग पोलिटेक्निक यूनिवर्सिटी (PolyU) के शोधकर्ताओं ने इस समस्या का समाधान खोजने का दावा किया है। उन्होंने पेरोव्स्काइट-ऑर्गेनिक टैंडम सोलर सेल विकसित किया है, जो कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन करता है।

क्यों खराब हो जाते हैं सामान्य सोलर पैनल?

कैडमियम टेल्यूराइड, पेरोव्स्काइट और ऑर्गेनिक जैसे थिन-फिल्म सोलर सेल हल्के और किफायती होते हैं, लेकिन छाया पड़ने पर इनमें नेगेटिव चार्ज बनने लगता है। शोधकर्ताओं के अनुसार इसकी वजह सोलर सेल की बिजली बनाने वाली परत में मौजूद डीप ट्रैप स्टेट्स हैं, जहां इलेक्ट्रिक चार्ज फंस जाता है। इससे धीरे-धीरे पैनल की बिजली उत्पादन क्षमता कम होने लगती है और लंबे समय में उसकी परफॉर्मेंस प्रभावित होती है।

नई तकनीक में इन कमियों को दूर किया गया है, जिससे ऑर्गेनिक सोलर सेल अधिक नेगेटिव वोल्टेज सहने में सक्षम हो गए हैं। इससे उनकी स्थिरता और काम करने की क्षमता पहले के मुकाबले काफी बेहतर हो जाती है।

माइनस 40 वोल्ट पर भी बरकरार रही क्षमता

शोध के दौरान विकसित नए सोलर सेल्स ने माइनस 40 वोल्ट तक के तनाव के बाद भी अपनी 90 प्रतिशत से अधिक दक्षता बनाए रखी। वहीं माइनस 20 वोल्ट पर 12 घंटे तक परीक्षण के बाद भी इनकी लगभग 90 प्रतिशत क्षमता बनी रही। इसके अलावा माइनस 4.5 वोल्ट पर करीब 2,000 घंटे (लगभग 83 दिन) तक परीक्षण करने के बाद भी इन सेल्स ने लगभग 97 प्रतिशत दक्षता बरकरार रखी।

ये परिणाम दिखाते हैं कि नई तकनीक छाया और कठिन परिस्थितियों में भी सोलर पैनलों को अधिक टिकाऊ और भरोसेमंद बना सकती है।

बिजली उत्पादन में 26% से ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक 2025 के अध्ययन पर आधारित है और इससे सोलर सेल्स की बिजली उत्पादन क्षमता 26 प्रतिशत से अधिक बढ़ सकती है। इसके साथ ही पैनलों की लाइफ बढ़ेगी और रखरखाव की जरूरत भी कम होगी। यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर व्यावसायिक उपयोग में आती है, तो घरों, उद्योगों और बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स में ऊर्जा उत्पादन पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकेगा।

शोध टीम के प्रोफेसर ली गैंग के अनुसार यह नई तकनीक स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इससे भविष्य में ऐसे सोलर पैनल विकसित किए जा सकेंगे, जो कम धूप, आंशिक छाया और कठिन मौसम में भी बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

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