नगर निगम चुनाव के दौरान महाराष्ट्र के मंत्री गणेश नाइक का नाम वोटर लिस्ट में नहीं मिलने से हड़कंप मच गया। मतदान केंद्र को लेकर भ्रम के चलते उन्हें घंटों परेशान होना पड़ा, जिसके बाद अधिकारियों की मदद से वोट डाल पाए।
Maharashtra Election: महाराष्ट्र की राजनीति में नगर निगम चुनाव के दिन एक अजीब स्थिति सामने आई, जब राज्य के वन मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता गणेश नाइक का नाम मतदाता सूची में नहीं मिला। नवी मुंबई नगर निगम चुनाव के दौरान यह मामला सामने आते ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। खुद मंत्री को घंटों तक मतदान केंद्रों के चक्कर लगाने पड़े, जिसके बाद जाकर वे अपना वोट डाल पाए।
इस घटना ने चुनावी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए, क्योंकि जब एक मंत्री को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा, तो आम मतदाताओं की स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ गई।
सुबह मतदान से पहले आई परेशानी
गणेश नाइक ने बताया कि वे हमेशा की तरह सुबह मतदान करने के लिए घर से निकले थे। उनका दावा है कि वे पिछले कई वर्षों से नवी मुंबई के स्कूल नंबर 94 में अपने परिवार के साथ वोट डालते आ रहे हैं। इस बार जब वे वहां पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि उनका मतदान केंद्र बदल दिया गया है।
इसके बाद उन्हें सेंट मैरी हाई स्कूल जाने के लिए कहा गया। मंत्री वहां पहुंचे, लेकिन वहां भी स्थिति साफ नहीं थी। उन्हें जिस कमरे में वोट डालना था, वह कमरा वहां मौजूद नहीं था। इसके साथ ही जब मतदाता सूची देखी गई, तो उसमें उनका नाम दर्ज नहीं मिला।
चुनाव आयोग पर उठाया सवाल
मतदान न कर पाने की स्थिति में गणेश नाइक ने नाराजगी जताई। उन्होंने सीधे तौर पर इस चूक के लिए राज्य चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और इसकी जांच होनी चाहिए।
उनका कहना था कि अगर एक कैबिनेट मंत्री का नाम मतदाता सूची से गायब हो सकता है, तो आम नागरिकों के साथ क्या हो रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
मतदान केंद्र को लेकर बनी उलझन

कुछ समय बाद गणेश नाइक ने स्पष्ट किया कि मामला पूरी तरह नाम हटने का नहीं था, बल्कि मतदान केंद्र को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई थी। उन्होंने बताया कि उन्हें सही कमरे और सही सूची तक पहुंचने में दिक्कत हुई।
मंत्री ने कहा कि वे दोबारा सेंट मैरी हाई स्कूल जाएंगे और स्थिति साफ करेंगे। इसके बाद चुनाव अधिकारियों से संपर्क किया गया और जानकारी को दोबारा जांचा गया।
घंटों की मशक्कत के बाद डाला वोट
काफी प्रयास और अधिकारियों से बातचीत के बाद आखिरकार गणेश नाइक का मतदान संभव हो सका। उन्होंने अपने आधिकारिक Facebook हैंडल पर तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वे मतदान करते हुए नजर आए।
इन तस्वीरों के साथ उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समस्या का समाधान हो गया है। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि इस तरह की अव्यवस्था लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए ठीक नहीं है।
परिवार के वोट अलग-अलग केंद्रों पर
गणेश नाइक ने एक और चौंकाने वाली जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के सदस्य और रिश्तेदार नवी मुंबई की एक ही इमारत में रहते हैं, लेकिन उनके नाम तीन अलग-अलग मतदान केंद्रों में दर्ज हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक ही पते पर रहने वाले लोगों के मतदान केंद्र अलग-अलग हो सकते हैं, तो यह व्यवस्था कितनी व्यावहारिक है। मंत्री के मुताबिक, इससे मतदाताओं में भ्रम पैदा होता है और मतदान प्रतिशत पर भी असर पड़ सकता है।
आम मतदाताओं की चिंता
इस घटना के बाद आम मतदाताओं के बीच भी चर्चा शुरू हो गई है। कई लोगों का कहना है कि वे पहले ही मतदाता सूची में नाम ढूंढने को लेकर परेशान रहते हैं। ऐसे में जब एक अनुभवी नेता को इतनी दिक्कत हुई, तो आम नागरिकों के लिए प्रक्रिया और मुश्किल हो सकती है।












