नोएडा में पानी की पाइपलाइन फटने के बाद सड़क पर अचानक तेज बहाव के साथ पानी फैल गया। पाइपलाइन से लगातार पानी निकलने के कारण आसपास के रास्ते पर जलभराव की स्थिति बन गई और लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़क पर पानी फैलने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई और उन्होंने संबंधित विभाग से पाइपलाइन की जल्द से जल्द मरम्मत कराने की मांग की है।
पाइपलाइन फटने के बाद पानी का दबाव इतना अधिक रहा कि कुछ ही समय में सड़क का एक बड़ा हिस्सा पानी से भर गया। सड़क पर बहते पानी के कारण पैदल चलने वाले लोगों के साथ वाहन चालकों को भी परेशानी हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पाइपलाइन को समय रहते ठीक नहीं किया गया तो पानी की बर्बादी जारी रहने के साथ सड़क की स्थिति भी खराब हो सकती है।
नोएडा और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ समय से पानी की पाइपलाइन से जुड़ी शिकायतें सामने आती रही हैं। हाल ही में सेक्टर-55 में नालियों के निर्माण कार्य के दौरान जेसीबी से पानी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद सड़क पर जलभराव हुआ और स्थानीय लोगों ने समस्या के समाधान की मांग की थी।
पाइपलाइन में खराबी के कारण सड़क पर जमा पानी से लोगों के लिए आवागमन प्रभावित होना स्वाभाविक है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों को ऐसे स्थानों से गुजरते समय अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। पानी सड़क की सतह पर जमा रहने से यह पता लगाना भी मुश्किल हो जाता है कि नीचे सड़क की स्थिति कैसी है और कहीं गड्ढा या क्षतिग्रस्त हिस्सा तो नहीं है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क पर पानी लगातार बहने से आसपास का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है। लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके पर टीम भेजकर पाइपलाइन की जांच करे और जिस हिस्से में पाइप फटा है, वहां स्थायी मरम्मत की जाए। केवल पानी का बहाव रोकना ही नहीं, बल्कि पाइपलाइन टूटने के कारण की भी जांच किए जाने की मांग की जा रही है।
पानी की पाइपलाइन में लीकेज या टूटने की समस्या केवल पानी की बर्बादी तक सीमित नहीं रहती। लंबे समय तक पानी सड़क पर बहने से सड़क की ऊपरी सतह को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा लगातार नमी रहने से आसपास की मिट्टी कमजोर होने और सड़क के किनारे कटाव जैसी स्थिति बनने की आशंका भी रहती है।
नोएडा के कुछ अन्य सेक्टरों में भी पुरानी पाइपलाइनों को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। सितंबर में सेक्टर डेल्टा-1 के निवासियों ने कम पानी के दबाव की समस्या बताई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, वहां पुरानी पाइपलाइन के कारण पानी का दबाव बढ़ाए जाने पर कई बार पाइपलाइन फटने की समस्या सामने आती है। लोगों ने जलापूर्ति व्यवस्था की जांच और समस्या के स्थायी समाधान की मांग की थी।
ग्रेटर नोएडा के पुराने सेक्टरों में भी पाइपलाइन की उम्र और बार-बार होने वाले लीकेज को लेकर प्राधिकरण के स्तर पर काम की योजना सामने आ चुकी है। जुलाई में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने नौ पुराने सेक्टरों में पेयजल पाइपलाइन बदलने के लिए करीब 33 करोड़ रुपये खर्च करने की जानकारी दी थी। इन क्षेत्रों में लंबे समय से लीकेज और कम पानी के दबाव की शिकायतें बताई गई थीं।
नोएडा में पानी से जुड़ी समस्या का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। हाल में कई सेक्टरों में घरों की टोंटियों से गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायतें भी रिपोर्ट हुई हैं। इससे साफ है कि शहर में पानी की आपूर्ति और पाइपलाइन नेटवर्क की नियमित निगरानी स्थानीय निवासियों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
ऐसे में पाइपलाइन फटने की ताजा घटना को लेकर स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित अधिकारी केवल तत्काल पानी बंद कराने के बजाय पाइपलाइन नेटवर्क की स्थिति का भी निरीक्षण करें। यदि पाइपलाइन किसी पुराने या कमजोर हिस्से के कारण क्षतिग्रस्त हुई है तो उस हिस्से को बदलने की जरूरत हो सकती है, ताकि भविष्य में दोबारा ऐसी स्थिति न बने।
सड़क पर पानी आने के बाद आसपास के दुकानदारों और राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पानी जमा होने की स्थिति में दुकानों के सामने पहुंचना मुश्किल हो जाता है और वाहनों के गुजरने पर पानी उछलकर आसपास खड़े लोगों या दुकानों तक पहुंच सकता है। यदि पानी लंबे समय तक जमा रहता है तो मच्छरों और गंदगी की समस्या भी बढ़ सकती है।
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि पाइपलाइन की मरम्मत में देरी न की जाए। उनका कहना है कि पेयजल की एक-एक बूंद कीमती है और पाइपलाइन फटने के बाद हजारों लीटर पानी सड़क पर बहना रोकना जरूरी है। साथ ही, मरम्मत के बाद सड़क की स्थिति को भी पहले की तरह किया जाना चाहिए, ताकि पाइपलाइन की मरम्मत के बाद सड़क पर गड्ढे या टूट-फूट की समस्या न रहे।
नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में पानी की आपूर्ति का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है। अलग-अलग सेक्टरों में पाइपलाइन की उम्र, निर्माण कार्य के दौरान पाइपलाइन को नुकसान, पानी के दबाव में बदलाव और रखरखाव की कमी जैसी वजहों से लीकेज की समस्या सामने आ सकती है। ऐसे मामलों में समय पर शिकायत दर्ज होने और त्वरित मरम्मत से पानी की बर्बादी और सड़क को होने वाले नुकसान दोनों को कम किया जा सकता है।
फिलहाल स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग पाइपलाइन की मरम्मत कितनी जल्दी कराता है और सड़क पर जमा पानी को कब तक हटाया जाता है। लोगों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है, ताकि आने वाले दिनों में दोबारा पाइपलाइन फटने या लीकेज होने पर सड़क पर इसी तरह पानी न फैले।
नोएडा में पाइपलाइन से जुड़ी लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच यह घटना जलापूर्ति व्यवस्था के नियमित रखरखाव की जरूरत को भी सामने लाती है। स्थानीय लोगों की मांग है कि पाइपलाइन नेटवर्क की समय-समय पर जांच की जाए, कमजोर हिस्सों की पहचान कर उन्हें बदला जाए और किसी भी तरह की लीकेज की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए। इससे पानी की बर्बादी रोकने के साथ-साथ सड़क और आसपास के इलाकों को होने वाले नुकसान से भी बचाया जा सकेगा।











