नॉर्वे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया, जो उनका 32वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। मोदी ने कहा कि भारत और यूरोप के बीच 100 अरब डॉलर निवेश की संभावना है, जिससे आर्थिक सहयोग और मजबूत होगा।
ओस्लो: भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को नॉर्वे सरकार ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान नॉर्वे द्वारा विदेशी नेताओं को दिए जाने वाले सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है।
इस सम्मान के साथ प्रधानमंत्री मोदी को अब तक 32 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक भूमिका को दर्शाता है।
ओस्लो में भव्य स्वागत और द्विपक्षीय वार्ता
नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया गया, जहां भारतीय समुदाय के लोगों ने भी बड़ी संख्या में उनका अभिनंदन किया। होटल और एयरपोर्ट पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए उनका स्वागत किया गया।
इसके बाद उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री Jonas Gahr Støre के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें व्यापार, निवेश, हरित ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत-नॉर्वे संबंधों में बढ़ता आर्थिक सहयोग
भारत और नॉर्वे के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 2.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है।
इसके अलावा नॉर्वे का sovereign wealth fund भारतीय बाजारों में लगभग 28 बिलियन डॉलर का निवेश कर चुका है, जिससे भारत विदेशी निवेश के लिए एक प्रमुख गंतव्य बनकर उभरा है।
भारत-EFTA समझौता और भविष्य की निवेश संभावनाएं
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के बीच हाल ही में लागू हुआ व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता एक ऐतिहासिक कदम है।
इस समझौते के तहत आने वाले 15 वर्षों में भारत में लगभग 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है। यह समझौता भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

भारत में निवेश का बड़ा रोडमैप
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यूरोपीय देशों से भारत में बड़े पैमाने पर निवेश की संभावना है। भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और तेजी से डिजिटल, ग्रीन एनर्जी और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने निवेशकों को भारत में अवसरों का लाभ उठाने और साझेदारी को ‘इरादे’ से आगे बढ़ाकर ‘निवेश’ के चरण तक ले जाने की अपील की।
भारत-नॉर्डिक समिट: सहयोग के नए अवसर
19 मई को ओस्लो में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता शामिल होंगे। यह समिट भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करेगा।
इससे पहले यह सम्मेलन 2018 में स्टॉकहोम और 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित किया गया था।
ग्रीन एनर्जी और टेक्नोलॉजी पर फोकस
इस शिखर सम्मेलन में ग्रीन एनर्जी, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा सहयोग और आर्कटिक नीति जैसे विषयों पर विशेष चर्चा होने की संभावना है।
भारत और नॉर्डिक देश जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के क्षेत्रों में मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भारत-यूरोप साझेदारी का रणनीतिक महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत और यूरोप जैसे लोकतांत्रिक देशों के बीच साझेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने कहा कि समान मूल्यों और साझा हितों के आधार पर यह सहयोग वैश्विक स्थिरता और विकास में अहम भूमिका निभा सकता है।
ऊर्जा, निवेश और नवाचार में सहयोग
भारत और नॉर्वे के बीच सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रीन एनर्जी, समुद्री तकनीक और क्लाइमेट टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित हो रहा है।
नॉर्वे के निवेश और भारत के बड़े बाजार को मिलाकर दोनों देश वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भारतीय समुदाय की भूमिका और सांस्कृतिक जुड़ाव
ओस्लो में भारतीय समुदाय ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह प्रवासी भारतीय समुदाय भारत और यूरोप के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक सेतु के रूप में कार्य कर रहा है।
इससे दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संबंध और अधिक मजबूत हो रहे हैं।
वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती भूमिका
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी संकेत दिया कि भारत अब वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भागीदार बन चुका है।
स्वीडन और नॉर्वे जैसे देशों के साथ बढ़ते संबंध यह दर्शाते हैं कि भारत अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में भी आगे बढ़ रहा है।










