राजस्थान के जोधपुर में एक कार सर्विस सेंटर में भीषण आग लगने से 10 से अधिक वाहन जल गए। आग पास के मकानों और टायर गोदाम तक फैल गई। दमकल की 16 गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर शहर में बुधवार देर रात एक कार सर्विस सेंटर में लगी भीषण आग ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। कमला नेहरू नगर स्थित एलएमजे कार सर्विस सेंटर में आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में लपटें तेजी से फैल गईं। आग ने सर्विस सेंटर में खड़े कई वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते पास स्थित टायर गोदाम तक पहुंच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी भयावह थी कि उसकी लपटें आसपास बने दो मकानों तक पहुंच गईं। आग के दौरान सीएनजी वाहनों में लगातार धमाके होने से आसपास रहने वाले लोग घबरा गए और कई परिवार सुरक्षा के लिए अपने घरों की छतों पर पहुंच गए।
10 से अधिक वाहन जलने की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस हादसे में 10 से अधिक वाहन पूरी तरह जल गए। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई किलोमीटर दूर तक धुएं का गुबार और आग की लपटें दिखाई दे रही थीं। हालांकि प्रशासन की ओर से क्षतिग्रस्त वाहनों की अंतिम संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
16 दमकल वाहनों ने संभाला मोर्चा
आग की सूचना मिलते ही प्रताप नगर पुलिस और फायर ब्रिगेड की कई टीमें मौके पर पहुंच गईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शहर के विभिन्न फायर स्टेशनों से अतिरिक्त दमकल वाहन बुलाए गए। बासनी, शास्त्री नगर, चौपासनी और नागौरी गेट सहित कई इलाकों से कुल लगभग 16 दमकल वाहन घटनास्थल पर पहुंचे। दमकल कर्मियों ने करीब डेढ़ घंटे तक लगातार मशक्कत कर आग पर काबू पाया।
फायर अधिकारियों के अनुसार एक अतिरिक्त दमकल वाहन को एहतियात के तौर पर स्टैंडबाय पर रखा गया ताकि आग दोबारा भड़कने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
सीएनजी कारों में धमाकों से बढ़ी चुनौती
आग बुझाने के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सर्विस सेंटर में खड़ी सीएनजी कारें थीं। आग की चपेट में आने के बाद कई वाहनों में जोरदार धमाके हुए, जिससे राहत और बचाव कार्य कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। धमाकों की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी, जिससे आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। सुरक्षा कारणों से पुलिस ने क्षेत्र को घेर लिया और लोगों को घटनास्थल से दूर रहने की सलाह दी।
आग बुझाने के लिए तोड़नी पड़ी दीवार
दमकल कर्मियों को आग तक पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। आग तेजी से फैल रही थी और सर्विस सेंटर के भीतर प्रवेश सीमित था। स्थिति को देखते हुए पास के एक खाली प्लॉट की दीवार तोड़नी पड़ी ताकि दमकल वाहन और पानी की पाइप सीधे आग वाले हिस्से तक पहुंच सकें। इस रणनीति के बाद आग पर नियंत्रण पाने में सफलता मिली। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति भी अस्थायी रूप से बंद कर दी, जिससे किसी प्रकार के करंट या अतिरिक्त आग लगने का खतरा टाला जा सके।
मकानों तक पहुंचीं लपटें
आग की तेज लपटें सर्विस सेंटर के पीछे स्थित दो मकानों तक पहुंच गईं। हालांकि समय रहते दमकल कर्मियों और स्थानीय लोगों के प्रयासों से बड़ा हादसा टल गया। फायर अधिकारियों के अनुसार मकानों में सीमित नुकसान हुआ है और किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं मिली है। राहत की बात यह रही कि सभी लोग समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए।
स्थानीय लोगों ने भी निभाई अहम भूमिका
घटना के दौरान स्थानीय निवासियों ने भी आग को फैलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रत्यक्षदर्शी विजय ने बताया कि रात में उन्हें जलने की गंध महसूस हुई। जब वे छत पर पहुंचे तो सर्विस सेंटर से उठती ऊंची लपटें दिखाई दीं। उन्होंने तुरंत पड़ोसियों को सतर्क किया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। एक अन्य स्थानीय निवासी सागर ने बताया कि आग तेजी से उनके घर की ओर बढ़ रही थी। उन्होंने आसपास के युवाओं को बुलाया और बाल्टियों तथा पाइप की मदद से लगातार पानी डालना शुरू किया। उनके प्रयासों से आग मकानों तक पूरी तरह फैलने से पहले ही नियंत्रित हो गई।
आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं
फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों का आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। प्रारंभिक आशंका जताई जा रही है कि किसी वाहन में शॉर्ट सर्किट होने से आग लगी हो सकती है, जिसके बाद उसने तेजी से पूरे सर्विस सेंटर को अपनी चपेट में ले लिया। पुलिस और फायर विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञ घटनास्थल का निरीक्षण कर यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि आग किस कारण से शुरू हुई और इतनी तेजी से कैसे फैली।
औद्योगिक और व्यावसायिक परिसरों में अग्नि सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक और व्यावसायिक परिसरों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कार सर्विस सेंटरों में बड़ी संख्या में वाहन, ईंधन, गैस सिलेंडर, लुब्रिकेंट और ज्वलनशील पदार्थ मौजूद रहते हैं। ऐसे में नियमित सुरक्षा ऑडिट, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और आपातकालीन निकासी योजना बेहद आवश्यक मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आग से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए आधुनिक फायर डिटेक्शन सिस्टम, स्वचालित स्प्रिंकलर और कर्मचारियों का नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।











