ओडिशा के नए खनन कानून पर BJP-BJD में टकराव, 12 हजार करोड़ नुकसान के दावे पर सियासत तेज

ओडिशा में नए MMDR संशोधन कानून को लेकर BJP और BJD के बीच विवाद बढ़ गया है। नवीन पटनायक ने सालाना ₹12 हजार करोड़ नुकसान का दावा किया, BJP ने जवाब मांगा।

ओडिशा में नए MMDR संशोधन कानून को लेकर BJP और BJD के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। नवीन पटनायक ने राज्य को सालाना 12 हजार करोड़ रुपये नुकसान का दावा किया। BJP अध्यक्ष मनमोहन सामल ने इस गणना पर सवाल उठाए।

भुवनेश्वर: ओडिशा में खनन क्षेत्र से जुड़े नए कानून को लेकर भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल के बीच राजनीतिक विवाद गहरा गया है। ओडिशा BJP अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मनमोहन सामल ने पूर्व मुख्यमंत्री तथा BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक से नए Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2026 को लेकर किए गए दावों का आधार स्पष्ट करने को कहा है।

सामल ने विशेष रूप से पटनायक के उस अनुमान पर सवाल उठाया, जिसमें दावा किया गया है कि नए कानून के लागू होने के बाद ओडिशा को हर साल करीब 12,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो सकता है। BJP नेता ने कहा कि सांसदों को कानून का विरोध करने के लिए पत्र लिखने के बजाय इस अनुमान की स्पष्ट और तथ्यात्मक व्याख्या की जानी चाहिए।

मनमोहन सामल ने नवीन पटनायक से मांगा जवाब

मनमोहन सामल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि नवीन पटनायक को सांसदों को भ्रमित करने के बजाय उन्हें तथ्यों के आधार पर समझाना चाहिए कि राज्य को सालाना 12,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान किस आधार पर लगाया गया है।

सामल के अनुसार, नए कानून के लागू होने से ओडिशा के राजस्व में किसी तरह की कमी नहीं होगी। उन्होंने पटनायक से पूछा कि यदि राज्य को वास्तव में इतना बड़ा आर्थिक नुकसान होने वाला है, तो इसकी गणना का आधार सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

BJP प्रदेश अध्यक्ष ने खनन राजस्व में ओडिशा की पिछली वृद्धि का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य को पहले खनन से सालाना लगभग 5,000 करोड़ रुपये की आय होती थी, जो अब बढ़कर करीब 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उनके मुताबिक नए कानून को विभिन्न पहलुओं और कानूनी प्रभावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

नवीन पटनायक ने BJP सांसदों से कानून वापस लेने की मांग की

मनमोहन सामल की प्रतिक्रिया से दो दिन पहले नवीन पटनायक ने ओडिशा से जुड़े सभी BJP सांसदों को पत्र लिखा था। उन्होंने सांसदों से अपने विवेक के आधार पर नए MMDR Amendment Act, 2026 का विरोध करने और कानून में बदलाव या उसे वापस लेने की मांग करने की अपील की थी।

पटनायक का आरोप है कि नया कानून ओडिशा के खनन क्षेत्रों और खनन भूमि से जुड़े अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कानून लागू होने के बाद राज्य को हर वर्ष लगभग 12,000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो सकता है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने ओडिशा के BJP सांसदों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा में कानून के समर्थन में खड़े होने वाले कुल 25 BJP सांसदों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें राज्य के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए थी।

BJD ने सामल पर ही पलटवार किया

BJP अध्यक्ष के बयान के बाद BJD ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने कहा कि मनमोहन सामल स्वयं उन 25 सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने संसद में नए कानून के समर्थन में मतदान किया या उसका समर्थन किया। BJD ने उनसे पूछा कि यदि यह कानून ओडिशा के हित में है, तो वे राज्य की जनता को इसके फायदे स्पष्ट करें।

क्षेत्रीय पार्टी ने आरोप लगाया कि नए कानून से ओडिशा को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। BJD का दावा है कि राज्य के लंबित बकाये के रूप में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रभावित हो सकती है और भविष्य में हर साल लगभग 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है।

हालांकि, ये आंकड़े राजनीतिक दलों के दावे हैं और इनके वास्तविक वित्तीय प्रभाव को लेकर दोनों पक्षों की राय अलग-अलग है। कानून के आर्थिक असर को समझने के लिए राजस्व व्यवस्था, खनन अधिकारों और केंद्र तथा राज्य के बीच वित्तीय हिस्सेदारी का विस्तृत आकलन जरूरी होगा।

खुले मंच पर बहस की BJD की चुनौती

BJD प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने कहा कि पार्टी 12,000 करोड़ रुपये सालाना नुकसान के अपने अनुमान को सार्वजनिक बहस में समझाने के लिए तैयार है। उन्होंने BJP नेतृत्व से भी कानून के समर्थन के कारण और इससे ओडिशा को होने वाले संभावित लाभ को स्पष्ट करने की मांग की।

BJD का तर्क है कि नवीन पटनायक जब भी राज्य से जुड़े किसी मुद्दे पर निर्णय लेते या बयान देते हैं, तो ओडिशा के हितों को प्राथमिकता देते हैं। पार्टी ने सामल से पूछा कि उन्होंने संसद में कानून का समर्थन क्यों किया और इससे राज्य को किस तरह फायदा होगा।

इस बयान के बाद विवाद केवल कानून के प्रावधानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि BJP और BJD के बीच व्यापक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का रूप ले चुका है।

खनन राजस्व ओडिशा की अर्थव्यवस्था के लिए अहम

ओडिशा भारत के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है। लौह अयस्क, कोयला और अन्य खनिज संसाधनों से होने वाला राजस्व राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए खनन कानूनों में होने वाले बदलावों का राज्य के राजस्व और औद्योगिक गतिविधियों पर असर राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील विषय है।

नए MMDR संशोधन कानून को लेकर विवाद का मुख्य केंद्र यही है कि भविष्य में खनन से मिलने वाले राजस्व और संसाधनों पर राज्य के अधिकार किस तरह प्रभावित होंगे। BJP जहां राजस्व नुकसान के दावे को चुनौती दे रही है, वहीं BJD इसे राज्य के आर्थिक हितों के लिए नुकसानदायक बता रही है।

संसद के बाद ओडिशा में बढ़ी राजनीतिक बहस

नए कानून पर संसद में हुई राजनीतिक प्रक्रिया के बाद अब इसका असर ओडिशा की राज्य राजनीति में दिखाई दे रहा है। BJP और BJD दोनों इस मुद्दे को राज्य के हितों से जोड़कर जनता के सामने अपना पक्ष रख रहे हैं।

नवीन पटनायक लंबे समय तक ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे हैं और वर्तमान में BJD का नेतृत्व कर रहे हैं। दूसरी ओर मनमोहन सामल राज्य BJP के प्रमुख नेताओं में हैं और राज्यसभा सांसद भी हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच यह विवाद ओडिशा की राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

आगे क्या होगा?

अब निगाहें इस बात पर हैं कि केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाएं नए खनन कानून के वित्तीय प्रभाव को लेकर क्या स्पष्टीकरण देती हैं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि ओडिशा सरकार और राजनीतिक दल राज्य के संभावित राजस्व प्रभाव का कौन-सा आधिकारिक आंकड़ा सामने रखते हैं।

फिलहाल BJP और BJD के बीच 12,000 करोड़ रुपये सालाना नुकसान के अनुमान को लेकर मतभेद स्पष्ट हैं। BJP इस दावे का आधार मांग रही है, जबकि BJD इसे राज्य के आर्थिक अधिकारों से जोड़कर कानून के विरोध में खड़ी है। आने वाले समय में संसद, राज्य विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर यह मुद्दा और जोर पकड़ सकता है।

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