पटना विश्वविद्यालय में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र अब विश्वविद्यालय परिसर में विरोध-प्रदर्शन को और आक्रामक कर रहे हैं। गुरुवार को आंदोलनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय के अलग-अलग कार्यालयों में पहुंचकर कामकाज रुकवाया और कर्मचारियों से कार्यालय बंद करने को कहा। प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर लाइटें भी बंद कर दी गईं। इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में कुछ समय के लिए कामकाज प्रभावित रहा और छात्रों तथा प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बन गई।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) के बैनर तले छात्र पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। इसी के विरोध में छात्रों ने पहले सीनेट हॉल के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। अब आंदोलन के चौथे दिन छात्रों ने विश्वविद्यालय बंद कराने की कोशिश की। इससे पहले भी छात्र नेताओं ने चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
छात्रों की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन पर संवाद नहीं करने का आरोप लगाया जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं और मांगों को विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रखते रहे हैं, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी वजह से छात्रों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की तबीयत बिगड़ने की भी जानकारी सामने आई थी, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की चिकित्सकीय टीम ने उनकी स्वास्थ्य जांच की थी।
AISF की प्रमुख मांगों में पटना विश्वविद्यालय की एलएलबी प्रवेश परीक्षा को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच और जरूरत पड़ने पर परीक्षा रद्द कर दोबारा पारदर्शी तरीके से परीक्षा कराने की मांग शामिल है। छात्र नेताओं का आरोप है कि परीक्षा शुरू होने के कुछ ही समय बाद प्रश्नपत्र विभिन्न व्हाट्सऐप ग्रुपों में प्रसारित होने लगा था। छात्रों का कहना है कि यदि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले या परीक्षा शुरू होने के तुरंत बाद बाहर पहुंचा था, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सभी अभ्यर्थियों के हित में पारदर्शी तरीके से आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रश्नपत्र बाहर आने की बात स्वीकार किए जाने का दावा भी छात्र नेताओं ने किया है, हालांकि परीक्षा दोबारा कराने की मांग को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बना हुआ है।
छात्रों की दूसरी बड़ी मांग पीजी पाठ्यक्रमों में बढ़ाई गई फीस को वापस लेने की है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि लगातार फीस बढ़ने से आर्थिक रूप से कमजोर और सामान्य परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उनका तर्क है कि उच्च शिक्षा को ज्यादा सुलभ बनाने के बजाय शुल्क में वृद्धि से कई विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई जारी रखने की चुनौती पैदा हो सकती है। विश्वविद्यालय कर्मचारी संगठन से जुड़े लोगों ने भी फीस वृद्धि को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि इसका असर गरीब विद्यार्थियों पर पड़ सकता है।
AISF ने पटना विश्वविद्यालय में MFA की पढ़ाई शुरू कराने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि पाठ्यक्रम से जुड़े विद्यार्थियों के लिए इसकी पढ़ाई शुरू होना जरूरी है। इसके अलावा केंद्रीय पुस्तकालय को 24 घंटे यानी 24×7 खोलने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है। छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों के लिए लाइब्रेरी का ज्यादा समय तक खुला रहना बेहद उपयोगी होगा।
छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय परिसर में लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग भी की है। आंदोलनकारी नेताओं का आरोप है कि छात्रों की आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में छात्रों को अपनी समस्याओं को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने और प्रशासन से संवाद करने का अधिकार मिलना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर AISF नेताओं ने कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए हैं। कुछ छात्र नेताओं ने कुलपति को तत्काल हटाने की मांग भी उठाई है।
भूख हड़ताल की शुरुआत सोमवार से हुई थी। पटना विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में तीन छात्र नेताओं बिट्टू भारद्वाज, प्रिंस राज और किशलय को माला पहनाकर आंदोलन की शुरुआत की गई थी। संगठन की ओर से साफ कहा गया था कि जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रहेगी। आंदोलन को विभिन्न छात्र नेताओं और कुछ अन्य लोगों का समर्थन भी मिला है।
मंगलवार को भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही थी। इस दौरान अनशन पर बैठे कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन की चिकित्सकीय टीम ने मौके पर पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य जांच की। इसके बावजूद छात्र नेताओं ने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि केवल आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा और मांगों को लेकर लिखित अथवा ठोस कार्रवाई जरूरी है।
अब चौथे दिन छात्रों के विश्वविद्यालय बंद कराने और कार्यालयों में काम रुकवाने की कार्रवाई से विवाद और बढ़ गया है। छात्रों ने कार्यालयों में पहुंचकर कर्मचारियों से काम बंद करने को कहा। कई जगह लाइटें बंद किए जाने की बात भी सामने आई है। आंदोलनकारियों का उद्देश्य विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाना है ताकि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय हो सके। हालांकि इस तरह कार्यालयी कामकाज बाधित होने से विश्वविद्यालय की सामान्य प्रशासनिक गतिविधियों पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
पटना विश्वविद्यालय में यह आंदोलन ऐसे समय में चल रहा है, जब परिसर पहले से ही तनावपूर्ण घटनाओं के कारण चर्चा में रहा है। 5 सितंबर को विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग परिसर में एक क्रूड बम फेंके जाने की घटना हुई थी। इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं थी, लेकिन पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपितों की पहचान करने में जुटी थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी सुरक्षा को लेकर सख्ती की बात कही थी।
ऐसे माहौल में छात्रों का आंदोलन विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है। एक तरफ छात्रों की मांगें हैं, जिनमें परीक्षा, फीस, पाठ्यक्रम, लाइब्रेरी और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने की जिम्मेदारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत कर किसी समाधान तक पहुंचता है या आंदोलन और व्यापक रूप लेता है।
छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने तक भूख हड़ताल जारी रखी जाएगी। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फिलहाल छात्रों की मांगों पर अंतिम समाधान की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। ऐसे में पटना विश्वविद्यालय में चल रहा छात्र आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। खासकर एलएलबी प्रवेश परीक्षा, पीजी फीस वृद्धि और अन्य शैक्षणिक मांगों को लेकर यदि प्रशासन की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं आता है तो छात्रों के आंदोलन का दायरा बढ़ने की संभावना बनी हुई है।










