देश के पावर फाइनेंस सेक्टर में एक बड़ा कदम उठाते हुए पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC) के बोर्ड ने दोनों कंपनियों के विलय (मर्जर) को मंजूरी दे दी है।
बिजनेस न्यूज़: भारत के पावर सेक्टर फाइनेंसिंग में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सरकारी स्वामित्व वाली दो प्रमुख कंपनियां—पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC)—के प्रस्तावित मर्जर को दोनों कंपनियों के बोर्ड से मंजूरी मिल गई है। इस कदम के बाद देश की सबसे बड़ी पावर फाइनेंसिंग संस्था बनने का रास्ता साफ होता दिख रहा है।
इस मर्जर के बाद संयुक्त इकाई की अनुमानित लोन बुक 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी पावर फाइनेंसर कंपनी बन जाएगी।
क्या है PFC-REC मर्जर योजना?
प्रस्तावित योजना के अनुसार, REC का मर्जर PFC में किया जाएगा। इसका मतलब है कि REC के शेयरधारकों को बदले में PFC के शेयर दिए जाएंगे। मर्जर स्कीम के तहत शेयर-स्वैप अनुपात (Share Swap Ratio) तय किया गया है, REC के 100 शेयरों के बदले PFC के 88 शेयर दिए जाएंगे। इसका मतलब यह है कि रिकॉर्ड डेट पर जिन निवेशकों के पास REC के शेयर होंगे, उन्हें मर्जर के बाद PFC के शेयरों में बदला जाएगा और REC के शेयर समाप्त हो जाएंगे।
सरकार और हिस्सेदारी की स्थिति
इस डील में सरकारी हिस्सेदारी संरचना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है:
- PFC में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी लगभग 55.99% है
- PFC के पास पहले से ही REC में लगभग 52.63% हिस्सेदारी है
- REC में केंद्र सरकार की कोई प्रत्यक्ष हिस्सेदारी नहीं है
यह संरचना मर्जर को रणनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है क्योंकि यह एकीकृत सरकारी पावर फाइनेंस सिस्टम को मजबूत करती है।

मर्जर से क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस मर्जर से कई स्तरों पर फायदे हो सकते हैं:
- भारत के पावर सेक्टर के लिए एक मजबूत और एकीकृत फाइनेंसिंग संस्था बनेगी
- बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग क्षमता बढ़ेगी
- बैलेंस शीट अधिक मजबूत और स्थिर होगी
- ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार होगा
- ग्लोबल लेवल पर भारत की पावर फाइनेंसिंग क्षमता को मजबूती मिलेगी
विशेष रूप से रिन्यूएबल एनर्जी और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या मतलब है यह डील?
मर्जर को लेकर निवेशकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनके शेयरों पर क्या असर पड़ेगा। REC शेयरधारकों को तय अनुपात के अनुसार PFC के शेयर मिलेंगे. रिकॉर्ड डेट अभी घोषित नहीं की गई है. सभी नियामकीय मंजूरी (SEBI, स्टॉक एक्सचेंज, NCLT और अन्य प्राधिकरण) के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।
इस प्रक्रिया के पूरा होने तक दोनों कंपनियों के शेयर मार्केट में अलग-अलग ट्रेड करते रहेंगे। मर्जर की घोषणा के बाद शेयर बाजार में भी हलचल देखी गई, PFC के शेयरों में लगभग 1.5% से अधिक गिरावट दर्ज की गई. वहीं REC के शेयरों में हल्की बढ़त देखने को मिली। यह रिएक्शन निवेशकों की मर्जर को लेकर शुरुआती अनिश्चितता और आर्बिट्रेज अवसरों को दर्शाता है।











