प्लास्टिक कप में चाय पीने से हो सकते हैं गंभीर स्वास्थ्य जोखिम, जानें एक्सपर्ट की राय

प्लास्टिक कप में चाय पीने से हो सकते हैं गंभीर स्वास्थ्य जोखिम, जानें एक्सपर्ट की राय

ऑफिस या स्ट्रीट वेंडर से मिलने वाली गरम चाय अगर प्लास्टिक कप में पी जाए, तो स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसमें मौजूद रसायन हार्मोन असंतुलन, माइक्रोप्लास्टिक जमा और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। सुरक्षित विकल्प कांच, स्टील, सिरेमिक या मिट्टी के कप हैं।

Microplastic Health Effects: गरम चाय का प्लास्टिक कप में सेवन लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। भारत में ऑफिस और स्ट्रीट वेंडर से मिलने वाली चाय अक्सर प्लास्टिक या डिस्पोजेबल कप में परोसी जाती है, जिससे फ्थैलेट्स और बिस्फेनॉल जैसे रसायन शरीर में हार्मोन असंतुलन, वजन बढ़ना, नींद की गड़बड़ी और माइक्रोप्लास्टिक जमा जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि सुरक्षित विकल्प के रूप में कांच, स्टील, सिरेमिक या मिट्टी के कप का उपयोग करें।

हार्मोन और स्वास्थ्य पर असर

डॉ. शर्मा बताते हैं कि ये रसायन एंडोक्राइन डिसरप्टर्स की तरह काम करते हैं। यानी एस्ट्रोजन, टेस्टोस्टेरोन, इंसुलिन और थायरॉइड जैसे हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। लगातार दो-चार बार रोजाना प्लास्टिक कप में चाय पीने से शरीर में इन हानिकारक तत्वों का जमा होना शुरू हो सकता है। इसके नतीजे के रूप में वजन बढ़ना, थकान, नींद की गड़बड़ी और बांझपन जैसी स्थितियां देखी जा सकती हैं।

रिसर्च और माइक्रोप्लास्टिक खतरा

आईआईटी खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि डिस्पोजेबल कप में हजारों माइक्रोप्लास्टिक कण पाए जा सकते हैं। लंबे समय तक इसका सेवन करने पर शरीर में ग्रामों तक प्लास्टिक जमा हो सकता है। विदेशी अध्ययन में तो मानव मस्तिष्क में भी माइक्रोप्लास्टिक के अंश पाए गए हैं। लैब और पशु स्टडी में ये संकेत मिले हैं कि प्लास्टिक रसायन डीएनए को नुकसान पहुंचाकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

सुरक्षित विकल्प और विशेषज्ञ की सलाह

भारत में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ने फूड-ग्रेड प्लास्टिक का इस्तेमाल मान्यता दी है, लेकिन जमीनी स्तर पर सस्ते और रिसाइक्ल्ड प्लास्टिक का उपयोग अब भी आम है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गरम चाय हमेशा कांच, स्टील या सिरेमिक के बर्तन में ही पी जाए। कुल्हड़ या मिट्टी के कप भी सुरक्षित और पारंपरिक विकल्प माने जाते हैं।

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