PoK चुनाव के बीच हिंसा का दावा: प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग में 8 मौतों की खबर, चुनाव बहिष्कार से बढ़ा राजनीतिक तनाव

PoK चुनाव के पहले चरण के दौरान प्रदर्शनकारियो पर फायरिंग मे कई लोगो के मारे जाने का दावा। चुनाव बहिष्कार, विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक तनाव से हालात गंभीर।

PoK विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान चुनाव बहिष्कार और विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रदर्शनकारियों पर कथित फायरिंग में आठ लोगों की मौत का दावा किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान राजनीतिक तनाव हिंसक रूप लेने का दावा किया गया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय स्रोतों के अनुसार, चुनाव के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सुरक्षाबलों द्वारा कथित फायरिंग की गई, जिसमें आठ लोगों की मौत होने का दावा किया गया है। हालांकि, इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और आधिकारिक स्तर पर भी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। 

सोमवार को PoK में पहले चरण के विधानसभा चुनाव के लिए मतदान कराया गया। इसी दौरान कई क्षेत्रों में चुनाव बहिष्कार, विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों की खबरें सामने आईं। घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और सुरक्षा हालात को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

चुनाव बहिष्कार के बीच सड़कों पर उतरे हजारों लोग

रिपोर्टों के अनुसार, कई इलाकों में मतदाताओं ने मतदान का बहिष्कार किया। कुछ मतदान केंद्रों पर बेहद कम मतदान दर्ज होने की बात कही गई, जबकि कुछ स्थानों पर मतदान केंद्र लगभग खाली दिखाई दिए। इसी दौरान हजारों प्रदर्शनकारी राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर मार्च निकालते हुए पाकिस्तान सरकार की नीतियों और चुनावी प्रक्रिया के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी राजनीतिक मांगों और स्थानीय मुद्दों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

फायरिंग और झड़पों के दावे

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबरें सामने आईं। स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में फायरिंग, घायल प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों की मौजूदगी के दृश्य साझा किए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में आठ लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अधिकारियों की ओर से घटनाओं को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

विरोध प्रदर्शनों के पीछे क्या है कारण?

इन प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है। संगठन लंबे समय से PoK की राजनीतिक व्यवस्था और चुनावी प्रणाली में बदलाव की मांग करता रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शनों से पहले प्रशासन ने संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया और उसके कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। इसके बाद संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए। कुछ नेता भूमिगत बताए जा रहे हैं, जबकि कई स्थानों पर धरने और रैलियां लगातार जारी हैं।

कई सप्ताह से जारी है अशांति

PoK के विभिन्न क्षेत्रों में पिछले कुछ सप्ताह से लगातार विरोध प्रदर्शन, सड़क जाम और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों की घटनाएं सामने आती रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इन घटनाओं के कारण कई इलाकों में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हुईं और कुछ क्षेत्रों में मोबाइल तथा इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया। भारत की सीमा से सटे पुंछ डिवीजन सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी असर पड़ने की खबरें सामने आई हैं।

तीन चरणों में हो रहे हैं विधानसभा चुनाव

PoK की 45 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव पहले एक ही चरण में कराए जाने थे, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए चुनाव कार्यक्रम को तीन चरणों में विभाजित किया गया।

चुनाव कार्यक्रम इस प्रकार निर्धारित किया गया है:

  • 27 जुलाई – मीरपुर डिवीजन
  • 2 अगस्त – मुजफ्फराबाद डिवीजन तथा शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटें
  • 10 अगस्त – पुंछ डिवीजन

प्रशासन का कहना है कि चरणबद्ध मतदान से सुरक्षा व्यवस्था बेहतर ढंग से संभाली जा सकेगी।

12 आरक्षित सीटों पर विवाद

PoK विधानसभा की कुल 45 निर्वाचित सीटों में 12 सीटें पाकिस्तान में बसे जम्मू-कश्मीर से आए शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। JAAC सहित कई स्थानीय समूहों का कहना है कि इन सीटों की वजह से स्थानीय मतदाताओं के जनादेश का प्रभाव कम हो जाता है। उनका आरोप है कि इन आरक्षित सीटों से राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को लाभ मिलता है। दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार और न्यायिक संस्थाओं का कहना है कि यह व्यवस्था संविधान का हिस्सा है और इसमें किसी भी बदलाव के लिए संवैधानिक संशोधन आवश्यक होगा।

प्रमुख दलों ने झोंकी पूरी ताकत

इन चुनावों में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने कई चुनावी सभाओं को संबोधित किया। नवाज शरीफ ने क्षेत्र में विकास परियोजनाओं का वादा करते हुए कहा कि PoK उनके लिए विशेष महत्व रखता है। दूसरी ओर PPP अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी व्यापक चुनाव प्रचार किया और पार्टी के पक्ष में समर्थन जुटाने का प्रयास किया। दिलचस्प बात यह है कि इस्लामाबाद में दोनों दल केंद्र सरकार में सहयोगी हैं, लेकिन PoK चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

2021 के चुनाव के बाद लगातार राजनीतिक अस्थिरता

PoK में पिछला विधानसभा चुनाव 2021 में हुआ था, जिसमें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। इसके बाद क्षेत्र में लगातार राजनीतिक बदलाव देखने को मिले। कई प्रधानमंत्रियों का कार्यकाल बीच में समाप्त हुआ और अविश्वास प्रस्तावों, न्यायिक फैसलों तथा राजनीतिक पुनर्गठन के कारण सत्ता परिवर्तन होता रहा। राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक चुनौतियों के बीच इस बार का चुनाव क्षेत्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगे क्या?

चुनाव के पहले चरण के दौरान सामने आए विरोध प्रदर्शन और हिंसा के दावों ने PoK की राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना दिया है। यदि तनाव जारी रहता है तो आगामी चरणों के मतदान पर भी इसका असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की नजर अब आगामी चुनावी चरणों, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक दलों की रणनीति पर बनी हुई है। वहीं, फायरिंग और मौतों के दावों की आधिकारिक पुष्टि तथा निष्पक्ष जांच की मांग भी तेज हो सकती है।

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