Uttarakhand में बढ़े Cancer के मामले, पांच साल में मरीजों की संख्या 12,642 पहुंची

उत्तराखंड में 5 साल में कैंसर के मामलों में 7.3% बढ़ोतरी दर्ज हुई। ICMR रिपोर्ट के अनुसार मरीजों की संख्या 12,642 पहुंची, जानें प्रमुख कारण।

उत्तराखंड में पिछले पांच वर्षों के दौरान कैंसर के मामलों में 7.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ICMR की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में कैंसर मरीजों की संख्या बढ़कर 12,642 हो गई है, जिसमें जीवनशैली और तंबाकू सेवन प्रमुख कारण बताए गए हैं।

देहरादून: उत्तराखंड में कैंसर के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में राज्य में कैंसर मरीजों की संख्या 7.3 प्रतिशत बढ़कर 12,642 तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली, तंबाकू और नशे का सेवन इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

पांच वर्षों में तेजी से बढ़े कैंसर के मामले

उत्तराखंड में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (NCRP) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कैंसर मरीजों की संख्या बढ़कर 12,642 हो गई है। वर्ष 2021 में यह संख्या 11,779 थी, यानी पिछले पांच वर्षों में 863 नए मरीज सामने आए हैं। यह करीब 7.3 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है, लेकिन राज्य में तेजी से बढ़ते आंकड़े चिंता का विषय हैं। समय पर जांच और शुरुआती पहचान से कई प्रकार के कैंसर का सफल इलाज संभव है, इसलिए जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी माना जा रहा है।

ये हैं कैंसर बढ़ने के प्रमुख कारण

रिपोर्ट के अनुसार, बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधियों में कमी, तंबाकू और धूम्रपान का सेवन, शराब और अन्य नशीले पदार्थों का उपयोग कैंसर के मामलों में वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा बढ़ती उम्र और कुछ पर्यावरणीय कारकों को भी जोखिम बढ़ाने वाला माना गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, तंबाकू और नशे से दूरी बनाने तथा संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना कई बार बीमारी को गंभीर बना सकता है।

पर्वतीय राज्यों में दूसरे स्थान पर उत्तराखंड

कैंसर मरीजों की संख्या के मामले में उत्तराखंड पर्वतीय राज्यों में जम्मू-कश्मीर के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में 14,112 कैंसर मरीज दर्ज किए गए हैं, जबकि उत्तराखंड में यह संख्या 12,642 है।

वहीं, हिमाचल प्रदेश में कैंसर के 9,566 मरीज दर्ज किए गए हैं, जो उत्तराखंड से करीब 3,076 कम हैं। यदि पूर्वोत्तर भारत के पर्वतीय राज्यों को भी इस तुलना में शामिल किया जाए, तब भी उत्तराखंड कैंसर मरीजों की संख्या के लिहाज से शीर्ष राज्यों में बना हुआ है।

रोकथाम और जागरूकता पर रहेगा जोर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर के बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने के लिए केवल इलाज ही नहीं, बल्कि रोकथाम पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। इसके लिए नियमित स्क्रीनिंग, समय पर जांच, स्वस्थ भोजन, नियमित व्यायाम और नशामुक्त जीवनशैली को बढ़ावा देना आवश्यक है।

राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग विभिन्न स्तरों पर कैंसर जांच और जागरूकता कार्यक्रम चला रहे हैं, ताकि लोगों में बीमारी के शुरुआती लक्षणों को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कैंसर का समय रहते पता चल जाए, तो कई मामलों में उपचार की सफलता की संभावना काफी अधिक रहती है।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि लंबे समय तक कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें, जैसे लगातार वजन घटना, शरीर में गांठ, असामान्य रक्तस्राव, लंबे समय तक खांसी या अन्य गंभीर लक्षण, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। समय पर जांच और सही उपचार ही कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

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