कनाडा की RCMP ने स्पष्ट किया कि भारत का खालिस्तानी मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं है। ट्रूडो के आरोपों को सबूतहीन बताया गया, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को सुधारने की संभावना बढ़ी है।
World News: कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के कमिश्नर माइक डुहेम ने स्पष्ट किया है कि कनाडा में भारत सरकार से जुड़ी कोई गुप्त गतिविधि या सीमा पार दमन नहीं चल रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान जांच और उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी विदेशी संस्था से ऐसी गतिविधियों का कोई संबंध नहीं पाया गया है।
कमिश्नर डुहेम ने विशेष इंटरव्यू में कहा कि RCMP के पास मौजूद फाइलों में ट्रांसनेशनल रिप्रेशन (Transnational Repression) से जुड़े कुछ मामलों में लोगों को धमकाने या परेशान करने की घटनाएं दर्ज हैं, लेकिन इन घटनाओं को किसी विदेशी संस्था या सरकार से जोड़ने वाले ठोस सबूत नहीं मिले हैं। उनके अनुसार, इन घटनाओं को केवल व्यक्तिगत मामलों के रूप में देखा जा सकता है, न कि किसी अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत।
भारत-कनाडा के बीच कूटनीतिक तनाव का इतिहास
यह बयान पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत का खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में हाथ हो सकता है। भारत ने इन आरोपों को तत्काल बेतुका बताते हुए खारिज कर दिया था। इस विवाद के चलते 2024 में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव चरम पर पहुँच गया।
अक्टूबर 2024 में भारत ने कनाडा से अपने उच्चायुक्त और पांच अन्य राजनयिकों को वापस बुला लिया था। इसके जवाब में कनाडा ने भी समान संख्या में भारतीय राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। इस कड़ी में दोनों देशों के संबंधों में ठंडापन देखने को मिला और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह मामला चर्चा में रहा।
सुधार की दिशा में कदम

हालांकि, पिछले साल अप्रैल में हुए संसदीय चुनावों में लिबरल पार्टी के नेता मार्क कार्नी की जीत ने भारत-कनाडा संबंधों में सुधार की नई उम्मीद जगाई। दोनों देशों ने अपने उच्चायुक्तों को फिर से नियुक्त किया और द्विपक्षीय बातचीत को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए।
इस महीने की शुरुआत में कार्नी ने भारत का दौरा किया। इस दौरे के दौरान दोनों देशों ने यूरेनियम आपूर्ति, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा संसाधनों पर प्रमुख समझौतों पर अंतिम रूप दिया। यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए अहम माना जा रहा है।
ट्रूडो के आरोप
पूर्व प्रधानमंत्री ट्रूडो ने पिछले वर्षों में दावा किया था कि भारत ने कनाडा में खालिस्तानी नेताओं और समर्थकों को निशाना बनाया। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और मानवाधिकार के दृष्टिकोण से गंभीर मुद्दा बताया था।
कमिश्नर डुहेम ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि RCMP ने अपनी जांच में किसी भी विदेशी सरकार के हस्तक्षेप या संलिप्तता के ठोस सबूत नहीं पाए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आरोपों से दोनों देशों के बीच संबंधों में अनावश्यक तनाव पैदा हुआ।
कनाडा में भारतीय समुदाय की स्थिति
कनाडा में भारतीय समुदाय बड़ी संख्या में रहता है और यहाँ का राजनीतिक माहौल संवेदनशील है। डुहेम ने कहा कि RCMP सभी समुदायों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के प्रति गंभीर है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी विदेशी सरकार के दबाव में आकर स्थानीय नागरिकों या समुदाय को परेशान करना स्वीकार्य नहीं है।









