बिहार में जमुई की नाबालिग छात्रा से जुड़ी घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए भाजपा विधायक और लोकगायिका मैथिली ठाकुर को भी निशाने पर लिया। प्रशांत किशोर ने मैथिली ठाकुर के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने का जिक्र करते हुए कहा कि दरभंगा के लोगों ने उन्हें अपना आइकन मानकर वोट दिया, लेकिन वह अंबानी परिवार के गणेश उत्सव में प्रस्तुति दे रही हैं, जबकि उनके क्षेत्र के लोग बाढ़ और अपराध जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यह टिप्पणी प्रशांत किशोर के राजनीतिक बयान का हिस्सा है।
प्रशांत किशोर ने जमुई की घटना को लेकर बिहार में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए और कहा कि जिस तरह से घटना से जुड़ा वीडियो सामने आया, उसके बाद कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने चाहिए। उनका तर्क था कि यदि घटना का वीडियो सामने नहीं आता तो आम लोगों को इस मामले की जानकारी कैसे मिलती। उन्होंने इसी संदर्भ में वीडियो वायरल करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की चर्चा को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।
प्रशांत किशोर ने मैथिली ठाकुर के पुराने बयानों का संदर्भ लेते हुए महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की सुरक्षा की स्थिति को अलग-अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई विधायक रात में सुरक्षित तरीके से घूम सकती हैं, तो आम लड़कियों और महिलाओं को भी समान सुरक्षा का भरोसा मिलना चाहिए। यह प्रशांत किशोर का सरकार की कानून-व्यवस्था पर राजनीतिक तर्क था।
मैथिली ठाकुर का नाम इस पूरे विवाद में इसलिए भी आया क्योंकि वह अलीनगर से भाजपा विधायक हैं और जमुई की घटना पर खुद भी सार्वजनिक प्रतिक्रिया दे चुकी हैं। 22 सितंबर को मैथिली ठाकुर ने घटना को निंदनीय और शर्मनाक बताते हुए कहा था कि बेटियों को ही नहीं, बेटों को भी यह सिखाना जरूरी है कि किसी लड़की को उसकी सहमति के बिना छूना, रोकना या उसके साथ दुर्व्यवहार करना अपराध है। उन्होंने मामले में प्रशासन और मुख्यमंत्री की ओर से की गई कार्रवाई के लिए धन्यवाद भी दिया था।
मैथिली ठाकुर ने यह भी कहा था कि इस मामले में कानून के तहत ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे समाज में स्पष्ट संदेश जाए कि किसी लड़की की गरिमा के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने महिलाओं को डर के बजाय सम्मान और निर्भयता के साथ जीवन जीने की जरूरत पर जोर दिया। इस तरह जमुई घटना पर मैथिली ठाकुर की सार्वजनिक प्रतिक्रिया सरकार की कार्रवाई के समर्थन और आरोपितों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग के रूप में सामने आई थी।
दूसरी ओर, प्रशांत किशोर ने इसी मामले को लेकर सरकार पर अधिक व्यापक सवाल उठाए। उन्होंने बिहार में महिलाओं की सुरक्षा के साथ-साथ अपराध और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में रखा। इससे पहले भी उन्होंने जमुई मामले पर जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की ‘छिटपुट घटना’ वाली टिप्पणी को लेकर सवाल उठाए थे और पूछा था कि गंभीर अपराध की परिभाषा क्या है।
जमुई की घटना के बाद बिहार की राजनीति में यह मुद्दा तेजी से उभरा है। विपक्षी नेताओं की ओर से सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से घटना पर कार्रवाई और पुलिस की कार्रवाई को सामने रखा जा रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर का ताजा बयान भी इसी राजनीतिक बहस की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
प्रशांत किशोर ने अपने बयान में ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ अभियान का भी जिक्र किया और सरकार पर तंज किया। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां ऐसी बन गई हैं कि बेटियों को खुद पढ़ने के साथ खुद अपनी सुरक्षा भी करनी पड़ेगी। यह टिप्पणी उन्होंने महिला सुरक्षा और सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए की। यह उनका राजनीतिक आरोप है, न कि किसी आधिकारिक जांच का निष्कर्ष।
मैथिली ठाकुर को लेकर प्रशांत किशोर की टिप्पणी का दूसरा हिस्सा उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों से जुड़ा था। उन्होंने अंबानी परिवार के गणेश उत्सव में मैथिली ठाकुर की प्रस्तुति का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जिन लोगों ने उन्हें अपने क्षेत्र का प्रतिनिधि चुना है, उनके स्थानीय मुद्दों पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए। खास तौर पर उन्होंने बाढ़ और अपराध से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया।
यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि किसी विधायक का सांस्कृतिक या सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होना अपने आप में उनके क्षेत्रीय दायित्वों के निर्वहन के बारे में कोई निष्कर्ष साबित नहीं करता। प्रशांत किशोर ने इस घटना का इस्तेमाल अपने राजनीतिक तर्क के लिए किया है। उनके बयान में क्षेत्र की समस्याओं और विधायक की सार्वजनिक भूमिका को लेकर सवाल उठाया गया है, जबकि इसका मूल्यांकन अलग-अलग तथ्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर किया जा सकता है।
जमुई मामले को लेकर सोशल मीडिया पर मैथिली ठाकुर से जुड़ा एक पुराना वीडियो भी वायरल हुआ था। इसमें उनके पुराने बयान को हाल की घटना से जोड़कर प्रसारित किया जा रहा था। आजतक फैक्ट चेक के अनुसार, वह वीडियो अप्रैल 2026 का था और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिया गया था। उस समय मैथिली ठाकुर ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बिहार में महिलाओं की सुरक्षा संबंधी बयान के जवाब में बिहार को लेकर अपनी बात रखी थी। फैक्ट चेक के मुताबिक, वह वीडियो जमुई की हालिया घटना से संबंधित नहीं था।
यह तथ्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल की घटना के बाद पुराने राजनीतिक बयानों और वीडियो को नए संदर्भ में सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है। ऐसे मामलों में किसी नेता के पुराने बयान को मौजूदा घटना से जोड़ने से पहले उसके मूल समय और संदर्भ की पुष्टि करना जरूरी होता है। जमुई मामले में भी पुराने वीडियो को लेकर तथ्य-जांच सामने आ चुकी है।
जमुई की घटना पर मैथिली ठाकुर ने बाद में जो प्रतिक्रिया दी, उसमें उन्होंने बिना सहमति किसी लड़की को छूने या उसके साथ दुर्व्यवहार को अपराध बताया और आरोपित के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रशासन को धन्यवाद दिया। इसलिए प्रशांत किशोर की मौजूदा टिप्पणी और मैथिली ठाकुर की जमुई घटना पर प्रतिक्रिया दोनों अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं।
प्रशांत किशोर ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि घटना का वीडियो सामने आने के बाद ही व्यापक स्तर पर लोगों का ध्यान इस मामले की ओर गया। उन्होंने वीडियो प्रसारित करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की चर्चा को लेकर सवाल किया कि यदि वीडियो बनाया ही नहीं जाता तो घटना की जानकारी सामने कैसे आती। उन्होंने इसी के साथ बिहार में अपराध, शराब और बालू माफिया से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। इन बातों को उनके आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई भी इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मुख्य आरोपित नंदन यादव को पुलिस ने गिरफ्तार किया है और गिरफ्तारी से पहले पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में उसके पैर में गोली लगी थी। इस घटना के बाद राजनीतिक बहस और तेज हुई है तथा सरकार की ओर से की गई कार्रवाई को लेकर भी अलग-अलग राजनीतिक दल अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
बिहार में महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप पहले भी होते रहे हैं, लेकिन जमुई की घटना के बाद यह मुद्दा एक बार फिर प्रमुख राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। प्रशांत किशोर ने इसे सरकार की व्यापक कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए हमला किया, जबकि मैथिली ठाकुर ने घटना की निंदा करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई और कड़ी कानूनी सजा की मांग की।
इस पूरे विवाद में एक तरफ जमुई की घटना और पुलिस कार्रवाई की जांच महत्वपूर्ण है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक नेताओं के बयानों को उनके राजनीतिक संदर्भ में देखना भी जरूरी है। प्रशांत किशोर का बयान सरकार की जवाबदेही और महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठाता है, जबकि मैथिली ठाकुर की प्रतिक्रिया आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई और सामाजिक स्तर पर लड़कों को भी जिम्मेदार व्यवहार सिखाने की बात पर केंद्रित रही है।
फिलहाल जमुई की घटना को लेकर बिहार में राजनीतिक बयानबाजी जारी है। प्रशांत किशोर ने सरकार के साथ-साथ मैथिली ठाकुर को भी अपने निशाने पर लिया है और उनके सार्वजनिक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर सवाल उठाया है। वहीं मैथिली ठाकुर पहले ही घटना को गंभीर और शर्मनाक बताते हुए प्रशासनिक कार्रवाई का समर्थन कर चुकी हैं। आने वाले दिनों में इस मामले पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं और तेज हो सकती हैं, लेकिन घटना से जुड़े आरोपों और कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।










