बजरंगबली के भरोसे प्रयागराज की सरकारी बिल्डिंग 'इंदिरा भवन' आग बुझाने के उपकरण की जगह रखी भगवान की मूर्ति, भास्कर की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा

प्रयागराज के इंदिरा भवन में फायर सेफ्टी व्यवस्था की पोल खुली। जहां आग बुझाने के उपकरण होने चाहिए थे, वहां भगवान की मूर्ति रखी मिली।
बजरंगबली के भरोसे प्रयागराज की सरकारी बिल्डिंग 'इंदिरा भवन' आग बुझाने के उपकरण की जगह रखी भगवान की मूर्ति, भास्कर की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा
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प्रयागराज की बहुमंजिला सरकारी इमारत इंदिरा भवन में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। हाल के दिनों में देशभर में आग की घटनाओं के बाद जब सरकारी और निजी भवनों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच शुरू हुई तो इंदिरा भवन की तस्वीरें और हालात चौंकाने वाले मिले। भवन में कई स्थानों पर जहां आग बुझाने के उपकरण और सुरक्षा संसाधन मौजूद होने चाहिए थे, वहां उनकी जगह भगवान बजरंगबली की मूर्ति रखी मिली। इस दृश्य ने भवन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इंदिरा भवन प्रयागराज की प्रमुख सरकारी इमारतों में गिनी जाती है, जहां विभिन्न सरकारी कार्यालय संचालित होते हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में कर्मचारी और आम नागरिक यहां पहुंचते हैं। ऐसे में भवन की सुरक्षा व्यवस्था और फायर सेफ्टी सिस्टम का दुरुस्त होना बेहद जरूरी माना जाता है। लेकिन पड़ताल के दौरान कई जगह अग्निशमन उपकरण या तो नदारद मिले या फिर खराब स्थिति में पाए गए।

जांच में सामने आया कि कुछ निर्धारित स्थानों पर फायर एक्सटिंग्विशर मौजूद नहीं थे। कई जगहों पर उपकरणों की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी, जबकि कुछ स्थानों पर सुरक्षा संबंधी निर्देश तक दिखाई नहीं दिए। सबसे ज्यादा चर्चा उस स्थान की हो रही है जहां अग्निशमन उपकरण रखने के लिए निर्धारित जगह पर बजरंगबली की प्रतिमा स्थापित कर दी गई थी। स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से वहां मूर्ति रखी हुई है और किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।

फायर सेफ्टी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सरकारी भवन में धार्मिक आस्था अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा उपकरणों का विकल्प नहीं हो सकती। किसी आपात स्थिति में समय पर उपलब्ध अग्निशमन संसाधन ही लोगों की जान बचा सकते हैं। यदि उपकरण निर्धारित स्थान पर मौजूद न हों तो राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो सकता है।

हाल के महीनों में देश के कई शहरों में आग की बड़ी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें सुरक्षा मानकों की अनदेखी प्रमुख कारण के रूप में उभरी है। ऐसे में इंदिरा भवन की स्थिति ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि भवन में नियमित फायर ऑडिट और सुरक्षा जांच की आवश्यकता है।

भवन में आने वाले लोगों का भी मानना है कि सरकारी कार्यालयों को सुरक्षा मानकों के पालन में उदाहरण पेश करना चाहिए। जब सरकारी भवनों में ही फायर सेफ्टी के बुनियादी नियमों का पालन नहीं होगा तो निजी संस्थानों से नियमों के पालन की अपेक्षा करना मुश्किल हो जाएगा।

मामला सामने आने के बाद संबंधित विभागों में हलचल बढ़ गई है। अधिकारियों से फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा जा रहा है और भवन में मौजूद सुरक्षा संसाधनों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। संभावना है कि आने वाले दिनों में इंदिरा भवन में व्यापक सुरक्षा निरीक्षण कराया जाए और जहां भी कमियां हैं उन्हें दूर करने के निर्देश दिए जाएं।

यह मामला केवल एक भवन की लापरवाही नहीं, बल्कि उन व्यवस्थागत खामियों की ओर भी इशारा करता है जो किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि श्रद्धा और आस्था महत्वपूर्ण हैं, लेकिन आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी सुरक्षा उपायों का होना अनिवार्य है। यदि समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गईं तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना का खतरा बना रह सकता है।

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