बिहार के पटना एयरपोर्ट पर 1400 करोड़ खर्च के बावजूद रनवे विस्तार अटका हुआ है, जिससे बड़े विमान नहीं उतर पा रहे और सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है, क्योंकि जमीन अधिग्रहण, टावर और रेलवे लाइन जैसी बाधाएं अब भी बनी हुई हैं।
पटना: बिहार की राजधानी में स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल एयरपोर्ट (पटना एयरपोर्ट) को आधुनिक बनाने के लिए करीब 1400 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद इसकी सबसे बड़ी समस्या—छोटा रनवे—अब भी जस की तस बनी हुई है।
वर्तमान में रनवे की लंबाई लगभग 2072 मीटर है, जिसे बढ़ाकर 3657 मीटर करने का प्रस्ताव है। हालांकि, एक साल से अधिक समय बीतने के बावजूद भूमि अधिग्रहण और तकनीकी बाधाओं के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई है।
पटना एयरपोर्ट पर रनवे की सीमाएं कई बार संभावित हादसों का कारण बन चुकी हैं। जुलाई 2025 में एक इंडिगो फ्लाइट लैंडिंग के दौरान तय बिंदु से आगे निकल गई थी, हालांकि पायलट की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया। एक अन्य घटना में टेकऑफ के तुरंत बाद विमान पक्षी से टकरा गया, जिससे इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।
ये घटनाएं बताती हैं कि सीमित रनवे और आसपास का पर्यावरण विमानों की सुरक्षा के लिए चुनौती बन रहे हैं।रनवे छोटा ही नहीं, पूरी तरह इस्तेमाल भी नहीं हो पाता।
विशेषज्ञों के अनुसार, पटना एयरपोर्ट की समस्या केवल रनवे की लंबाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका पूरा उपयोग भी संभव नहीं हो पाता।
1. सचिवालय टावर बना बाधा
एयरपोर्ट के पास स्थित पुराना सचिवालय टावर विमानों की लैंडिंग एंगल को प्रभावित करता है। इसकी ऊंचाई के कारण विमान सामान्य 2.5 डिग्री की बजाय
3 डिग्री के एंगल से उतरते हैं,
जिससे लैंडिंग दूरी बढ़ जाती है।
2. रेलवे लाइन और पोल
दूसरी ओर, फुलवारीशरीफ की तरफ रेलवे लाइन और पोल के कारण रनवे का एक बड़ा हिस्सा उपयोग में नहीं लाया जा सकता। इससे विमानों को रुकने के लिए कम दूरी मिलती है, जो जोखिम बढ़ाता है।
पर्यावरण और भौगोलिक बाधाएं
एयरपोर्ट के आसपास मौजूद संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू) और घनी आबादी वाले क्षेत्र परियोजना के सामने बड़ी चुनौती हैं।
- रनवे विस्तार के लिए जू की जमीन लेने का प्रस्ताव है
- इससे वन्यजीव और पर्यावरण पर असर का आकलन जरूरी है
- पास में रेलवे लाइन और शहरी ढांचा विस्तार को और जटिल बनाते हैं
इसके अलावा, आसपास खुले में मांस और मछली की दुकानों के कारण पक्षियों की संख्या अधिक रहती है, जिससे “बर्ड हिट” का खतरा बना रहता है।
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‘डेथ ज़ोन’ जैसी स्थिति: कम दूरी में ज्यादा हादसे
पटना एयरपोर्ट के आसपास का इलाका सुरक्षा मानकों के लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है। कम दूरी में अधिक बाधाएं होने के कारण पायलटों को लैंडिंग और टेकऑफ के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है।
लो विजिबिलिटी (कम दृश्यता) की स्थिति में यह चुनौती और बढ़ जाती है, जिससे हार्ड ब्रेकिंग जैसी स्थिति उत्पन्न होती है और यात्रियों को झटका महसूस होता है।
समाधान के प्रयास: कई कमेटियां, लेकिन जमीन पर असर कम
रनवे विस्तार के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कई समितियां बनाई गई हैं। इनमें तकनीकी विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हैं।
- हालिया प्रस्तावों में शामिल हैं:
- रनवे को 3657 मीटर तक बढ़ाना
- सचिवालय टावर की ऊंचाई कम करना
- करीब 25–29 एकड़ जमीन अधिग्रहित करना
- हालांकि, इन प्रस्तावों पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
- बुनियादी ढांचे में बदलाव की योजना
- एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों में कुछ सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं:
- कचरा डंपिंग स्टेशन को शिफ्ट किया जा रहा है, ताकि पक्षियों का खतरा कम हो
- रेलवे क्रॉसिंग पर अंडरपास बनाया जा रहा है
सड़क और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर भी विचार किया जा रहा हैइन प्रयासों का उद्देश्य सुरक्षा जोखिम को कम करना है, लेकिन रनवे विस्तार के बिना समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी।
सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?
- रनवे विस्तार के सामने दो प्रमुख बाधाएं हैं:
- भूमि अधिग्रहण – जू और आसपास के क्षेत्रों से जमीन लेना आसान नहीं
- इन्फ्रास्ट्रक्चर बदलाव – सड़क, टावर और रेलवे लाइन को पुनर्गठित करना
- इन दोनों के लिए कई विभागों के बीच समन्वय जरूरी है, जो अभी तक प्रभावी रूप से नहीं हो पाया है।










