रबी फसलों की MSP बढ़ी, मसूर-सरसों और कुसुम के दाम में बड़ी बढ़ोतरी, गेहूं का भाव ₹25 बढ़ा

रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए MSP बढ़ा। गेहूं ₹2,610, मसूर ₹7,390, सरसों ₹6,613 और कुसुम ₹7,215 प्रति क्विंटल हुआ।

केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए छह प्रमुख फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की है। कुसुम का MSP ₹675, सरसों का ₹413 और मसूर का ₹390 प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए गेहूं, जौ, चना, मसूर, रेपसीड-सरसों और कुसुम के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। गेहूं का MSP ₹2,585 से बढ़कर ₹2,610 प्रति क्विंटल हुआ है, जबकि कुसुम में सबसे अधिक ₹675 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।

छह प्रमुख रबी फसलों का बढ़ा न्यूनतम समर्थन मूल्य

केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 30 सितंबर 2026 को रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए छह अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी। सरकार के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है।

नए MSP के तहत गेहूं का भाव ₹2,585 से बढ़ाकर ₹2,610 प्रति क्विंटल किया गया है। जौ का MSP ₹2,150 से बढ़कर ₹2,286, चना ₹5,875 से बढ़कर ₹5,958, मसूर ₹7,000 से बढ़कर ₹7,390, रेपसीड-सरसों ₹6,200 से बढ़कर ₹6,613 और कुसुम ₹6,540 से बढ़कर ₹7,215 प्रति क्विंटल हो गया है।

दलहन और तिलहन पर ज्यादा जोर

सरकार के फैसले में दलहन और तिलहन की फसलों के MSP में गेहूं की तुलना में ज्यादा बढ़ोतरी की गई है। कुसुम के समर्थन मूल्य में ₹675 प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है, जो छह रबी फसलों में सबसे अधिक है। इसके बाद रेपसीड-सरसों में ₹413 और मसूर में ₹390 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।

जौ के MSP में ₹136 और चने में ₹83 प्रति क्विंटल का इजाफा हुआ है। वहीं गेहूं के समर्थन मूल्य में केवल ₹25 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। इस तरह सरकार ने दलहन और तिलहन वाली फसलों के लिए अपेक्षाकृत ज्यादा बढ़ोतरी की है।

सरकार के मुताबिक, हाल के वर्षों में अनाज के अलावा दलहन और तिलहन जैसी फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए इनके MSP को अधिक बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को फसल चयन में विविधता के लिए प्रोत्साहित करना भी है।

उत्पादन लागत के मुकाबले MSP में कितना मार्जिन

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, रबी विपणन सत्र 2027-28 में उत्पादन लागत के मुकाबले गेहूं पर 106 प्रतिशत, रेपसीड-सरसों पर 96 प्रतिशत और मसूर पर 92 प्रतिशत का मार्जिन रखा गया है।

चना पर उत्पादन लागत के मुकाबले 59 प्रतिशत, जौ पर 58 प्रतिशत और कुसुम पर 50 प्रतिशत का मार्जिन है। सरकार के अनुसार यह बढ़ोतरी 2018-19 के केंद्रीय बजट में घोषित उस नीति के अनुरूप है, जिसमें MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर रखने की बात कही गई थी।

गेहूं और रबी फसलों की सरकारी खरीद में भी बढ़ोतरी

केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 से 2025-26 के बीच गेहूं की MSP पर खरीद 3715 लाख मीट्रिक टन रही। इससे पहले 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह आंकड़ा 2254 लाख मीट्रिक टन था।

इसी अवधि में छह प्रमुख रबी फसलों की कुल खरीद भी बढ़ी है। 2014-15 से 2025-26 के बीच इन छह फसलों की खरीद 3921 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2302 लाख मीट्रिक टन थी।

MSP के तहत किसानों को किए गए भुगतान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2004-05 से 2013-14 के दौरान छह रबी फसलों के किसानों को ₹2.65 लाख करोड़ का MSP भुगतान किया गया था। वहीं 2014-15 से 2025-26 के दौरान यह राशि बढ़कर ₹8.36 लाख करोड़ हो गई।

नई MSP दरें लागू होने के बाद रबी सीजन में किसानों को गेहूं के साथ-साथ दलहन और तिलहन फसलों के लिए भी पहले की तुलना में अधिक समर्थन मूल्य मिलेगा। हालांकि, किसी किसान की वास्तविक कमाई उसकी उपज, गुणवत्ता, बाजार कीमत और सरकारी खरीद तक पहुंच पर भी निर्भर करेगी।

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