राजस्थान में मानसून फिर हुआ सक्रिय, कई जिलों में भारी बारिश; नदियां उफान पर, बांधों के गेट खोले गए

राजस्थान में मानसून फिर सक्रिय हो गया है। कोटा, बारां, उदयपुर समेत कई जिलो मे भारी बारिश हुई, नदियां उफान पर हैं, बांधों के गेट खोले गए और बारिश का अलर्ट जारी।

बंगाल की खाड़ी में बने मौसमीय सिस्टम के प्रभाव से राजस्थान में मानसून फिर सक्रिय हो गया है। कई जिलों में भारी बारिश, नदियों में उफान और बांधों के गेट खोलने की नौबत आ गई है। मौसम विभाग ने पूरे प्रदेश के लिए अलर्ट जारी किया है।

जयपुर: राजस्थान में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुए मौसमीय तंत्र के प्रभाव से राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक बारिश दर्ज की जा रही है। बुधवार सुबह से कोटा, बारां, उदयपुर, जयपुर, कोटपूतली-बहरोड़, अजमेर, पाली, सीकर और अलवर सहित कई जिलों में हल्की से लेकर भारी बारिश हुई। लगातार हो रही वर्षा के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जबकि कई क्षेत्रों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की स्थिति भी सामने आई है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के जयपुर केंद्र ने राज्य के कई जिलों के लिए ऑरेंज और शेष जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग का अनुमान है कि 25 जुलाई तक राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय रहेगा और कई स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश जारी रह सकती है।

कोटा और बारां में सबसे अधिक बारिश

पिछले 24 घंटों के दौरान राजस्थान में सबसे अधिक वर्षा हाड़ौती क्षेत्र में दर्ज की गई। कोटा जिले के सुल्तानपुर क्षेत्र में लगभग 101 मिमी और बारां जिले के छीपाबड़ौद में लगभग 130 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। कई इलाकों में कुल वर्षा पांच इंच के करीब पहुंचने से खेतों और निचले क्षेत्रों में पानी भर गया।

लगातार बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में जलभराव होने से खरीफ फसलों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे कई क्षेत्रों के लिए यह वर्षा जलस्रोतों को भरने और भूजल स्तर सुधारने के लिहाज से राहत लेकर आई है।

उदयपुर में सीजन की सबसे तेज बारिश

लेक सिटी उदयपुर में बुधवार सुबह करीब एक घंटे तक तेज बारिश हुई, जिसे इस मानसून सीजन की सबसे तीव्र बारिश माना जा रहा है। लगातार वर्षा के बाद शहर का मौसम पूरी तरह बदल गया और तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।

बारिश के बाद झीलों और पर्यटन स्थलों का प्राकृतिक सौंदर्य निखर गया, जिससे पर्यटकों की आवाजाही भी बढ़ने लगी है। स्थानीय प्रशासन ने निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पर नजर बनाए रखी है।

नदियां उफान पर, कालीसिंध बांध का गेट खोला गया

लगातार हो रही बारिश और मध्य प्रदेश से आ रहे अतिरिक्त पानी के कारण राजस्थान की कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। झालावाड़ के मनोहरथाना क्षेत्र में परवन नदी का जलस्तर बढ़ने से एक छोटा पुल और मंदिर का हिस्सा पानी में डूब गया।

इसी तरह कालीसिंध नदी में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए कालीसिंध बांध का एक गेट लगभग 0.10 मीटर तक खोलकर नियंत्रित रूप से पानी छोड़ा गया। जल संसाधन विभाग स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है ताकि डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में किसी प्रकार की आपात स्थिति उत्पन्न न हो।

पाली जिले के सोजत क्षेत्र में भी सुकड़ी नदी की सहायक नदी में तेज बहाव दर्ज किया गया, जिससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

राजस्थान में मानसून फिर हुआ सक्रिय, कई जिलों में भारी बारिश; नदियां उफान पर, बांधों के गेट खोले गए

जयपुर, अजमेर और कोटपूतली में भी लगातार बारिश

राजधानी जयपुर में सुबह से बूंदाबांदी और बादलों का डेरा बना रहा। पिछले दिन भी शहर और आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हुई, जिससे अधिकतम तापमान लगभग चार डिग्री सेल्सियस तक गिर गया।

कोटपूतली-बहरोड़ जिले में लगातार तीसरे दिन बारिश जारी रही। पिछले तीन दिनों में लगभग 94 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। शहर के मुख्य बाजारों, राष्ट्रीय राजमार्ग-48 की सर्विस लेन और कई निचले इलाकों में जलभराव देखने को मिला, जिससे स्कूली बच्चों और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

अजमेर में भी 24 घंटों के दौरान लगभग 39.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई। लगातार बारिश से जिले में लंबे समय से चली आ रही वर्षा की कमी कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

तापमान में 9 डिग्री तक गिरावट

मानसून के दोबारा सक्रिय होने का असर प्रदेश के तापमान पर भी साफ दिखाई दिया। अलवर, सीकर, पिलानी, जयपुर, अजमेर, चूरू और श्रीगंगानगर सहित कई शहरों में अधिकतम तापमान 4 से 9 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया।

इस बदलाव के बाद अधिकांश शहरों में मौसम सुहावना हो गया और लोगों को गर्मी एवं उमस से राहत मिली। राज्य का सबसे अधिक तापमान जैसलमेर में 39.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, लेकिन लगभग दो सप्ताह बाद ऐसा पहली बार हुआ जब किसी भी शहर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं पहुंचा।

कई जिलों में जलभराव और यातायात प्रभावित

लगातार बारिश के कारण टोंक, सीकर, कोटपूतली, जयपुर और अन्य शहरों के कई हिस्सों में सड़कें पानी से भर गईं। कुछ स्थानों पर यातायात धीमा पड़ा, जबकि निचले इलाकों में वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

सीकर में कई स्थानों पर तीन से चार फीट तक पानी भर गया, जिससे कुछ वाहन आंशिक रूप से डूबे दिखाई दिए। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने की अपील की है।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने सक्रिय सिस्टम के कारण राजस्थान में मानसून की गतिविधियां अगले कुछ दिनों तक जारी रहेंगी। 25 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की, मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है।

मौसम वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के जिलों में भारी वर्षा, तेज बहाव वाली नदियों और निचले इलाकों में जलभराव की आशंका जताई है। प्रशासन ने भी संबंधित विभागों को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन टीमों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।

बारिश से राहत भी, चुनौती भी

राजस्थान में सक्रिय मानसून ने जहां एक ओर भीषण गर्मी से राहत दिलाई है और जलाशयों में पानी की उपलब्धता बढ़ाई है, वहीं दूसरी ओर कई जिलों में जलभराव, बढ़ते नदी जलस्तर और कृषि क्षेत्रों में पानी भरने जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए आने वाले दिनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्थिति पर लगातार निगरानी रखने की आवश्यकता होगी।

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