राजस्थान के सीकर में ट्रस्ट की 1100 बीघा जमीन को फर्जी डीड के जरिए 7 करोड़ में बेचने का आरोप लगा है। जिंदा पूर्वजों को मृत दिखाकर ट्रस्ट पर कब्जा किया गया, जबकि मामला पहले से कोर्ट में विचाराधीन है।
सीकर: राजस्थान के सीकर जिले में एक बड़े भूमि घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें ट्रस्ट की अरबों रुपये मूल्य की जमीन को कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के जरिए बेहद कम कीमत पर बेचने का आरोप लगाया गया है। फतेहपुर की पिंजरापोल सोसाइटी और नैना देवी चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया है। यह मामला अब कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
फर्जी ट्रस्ट डीड बनाकर कब्जे का आरोप
ट्रस्ट से जुड़े सदस्यों का आरोप है कि वर्ष 2011 में एक फर्जी ट्रस्ट डीड तैयार की गई, जिसके जरिए मूल ट्रस्ट संरचना को बदल दिया गया। इस कथित फर्जीवाड़े में सबसे गंभीर आरोप यह है कि उस समय जीवित ट्रस्टियों और परिवार के सदस्यों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखा दिया गया। इस प्रक्रिया के जरिए उनके वैध वारिसों को ट्रस्ट से बाहर कर दिया गया और नए लोगों को ट्रस्टी बनाकर संपत्ति पर नियंत्रण हासिल कर लिया गया।
बताया गया कि मूल ट्रस्ट डीड वर्ष 1959 में बनाई गई थी, जिसमें संपत्ति को बेचने का कोई प्रावधान नहीं था। इसके बावजूद 2011 और 2018 में नियमों में कथित रूप से गुप्त संशोधन किए गए, जिससे ट्रस्ट की संपत्तियों को बेचने और ट्रांसफर करने का अधिकार हासिल किया गया।
1100 बीघा जमीन का सौदा, बाजार मूल्य पर सवाल
आरोपों के अनुसार, लगभग 51.661 हेक्टेयर यानी करीब 1100 बीघा जमीन, जिसका वर्तमान बाजार मूल्य अरबों रुपये में आंका जा रहा है, उसे मात्र 7 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। इसमें करीब 4.93 करोड़ रुपये दस्तावेजी मूल्य के रूप में दर्शाए गए हैं। ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना है कि यह सौदा बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में हुआ और इसमें मिलीभगत की आशंका है।
यह भूमि ऐतिहासिक रूप से गौ-सेवा के लिए दान में दी गई थी, जिससे इसकी सामाजिक और धार्मिक महत्व भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस जमीन की बिक्री को लेकर स्थानीय स्तर पर भी नाराजगी देखी जा रही है।
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कोर्ट के स्टे के बावजूद रजिस्ट्री का आरोप
मामले को और गंभीर बनाते हुए ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने दावा किया है कि इस जमीन से जुड़े दो मामले पहले से ही अदालत में लंबित हैं। उपखंड अधिकारी न्यायालय और सिविल कोर्ट में इस जमीन के बेचान और कब्जे पर स्पष्ट स्थगन आदेश (स्टे) जारी किया गया था।
इसके बावजूद 6 फरवरी 2026 को कुछ ही घंटों के भीतर जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई, जिसे ट्रस्ट पदाधिकारी नियमों का खुला उल्लंघन बता रहे हैं। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक प्रक्रिया और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
आपराधिक साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका
ट्रस्ट के सदस्यों ने इस पूरे मामले को एक संगठित आपराधिक साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि यह केवल धोखाधड़ी नहीं बल्कि आपराधिक विश्वासघात और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी हो सकता है। फर्जी दस्तावेज तैयार करना, मृत घोषित करना और संपत्ति का हस्तांतरण जैसे आरोप इस केस को और गंभीर बनाते हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने प्रशासन से कई मांगें रखी हैं। उन्होंने जिंदा व्यक्तियों को मृत दिखाने के मामले में आपराधिक मुकदमा दर्ज करने, सभी फर्जी सेल एग्रीमेंट और डीड को निरस्त करने और संबंधित व्यक्तियों से ट्रस्ट के मूल रिकॉर्ड जब्त करने की मांग की है।
इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि जमीन को गोचर या बंजर श्रेणी में घोषित कर उसकी मूल स्थिति बहाल की जानी चाहिए, ताकि उसका उपयोग सार्वजनिक और धार्मिक उद्देश्यों के लिए किया जा सके।









