इंदिरा गांधी नहरबंदी और भीषण गर्मी के कारण जोधपुर में जल संकट गहराया है। जलदाय विभाग ने प्रभावित इलाकों में टैंकरों से पानी सप्लाई शुरू की है। विभाग को उम्मीद है कि 18 मई तक नहर का पानी पहुंचना शुरू हो जाएगा।
जोधपुर: भारत के पश्चिमी राज्य राजस्थान के प्रमुख शहर जोधपुर में भीषण गर्मी और इंदिरा गांधी नहरबंदी के कारण जल संकट गहराता जा रहा है। प्रशासन ने हालात को नियंत्रित करने के लिए आपात कदम उठाते हुए शहर के कई इलाकों में पानी के टैंकरों के जरिए सप्लाई शुरू कर दी है।
स्थानीय प्रशासन और जलदाय विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान जल भंडारण केवल 18 मई तक के लिए पर्याप्त है। हालांकि अधिकारियों को उम्मीद है कि तब तक इंदिरा गांधी नहर से पानी की आपूर्ति दोबारा सामान्य हो जाएगी।
जोधपुर, जो भारत के शुष्क मरुस्थलीय क्षेत्र में स्थित है, लंबे समय से पानी की कमी की समस्या से जूझता रहा है। लेकिन इस बार भीषण गर्मी, बढ़ती आबादी और सीमित जल संसाधनों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
जल संकट को लेकर हुई उच्च स्तरीय बैठक
पानी की स्थिति को देखते हुए जलदाय विभाग और जनप्रतिनिधियों के बीच एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में शहर विधायक Atul Bhansali और जलदाय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने शहर की मौजूदा पेयजल व्यवस्था की समीक्षा की और आपात योजनाओं पर चर्चा की।
जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता राजेंद्र मेहता ने बताया कि विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जल संकट से निपटने के लिए विशेष रणनीति लागू की जा रही है।
टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था
अधिकारियों के अनुसार जिन इलाकों में पानी की सबसे अधिक कमी है, वहां टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है।
प्रशासन ने बुधवार को शहर के विभिन्न हिस्सों में 10 पानी के टैंकर भेजे। अधिकारियों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर टैंकरों की संख्या और बढ़ाई जाएगी।
![]()
टैंकरों की सप्लाई विशेष रूप से उन कॉलोनियों और बस्तियों में की जा रही है जहां नियमित जलापूर्ति बाधित हो रही है या लोगों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
स्थानीय प्रशासन ने टैंकर संचालन की निगरानी के लिए अलग से अधिकारियों की टीम भी नियुक्त की है ताकि पानी वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता न हो।
22 लाख रुपये का कंटीजेंसी फंड मंजूर
जल संकट से निपटने के लिए प्रशासन ने कंटीजेंसी प्लान के तहत लगभग 22 लाख रुपये की राशि मंजूर की है।
इस बजट का उपयोग निम्न कार्यों के लिए किया जाएगा:
पानी के टैंकर संचालन
- आपात पाइपलाइन मरम्मत
- जल वितरण निगरानी
- शिकायत निवारण व्यवस्था
- अतिरिक्त तकनीकी स्टाफ की तैनाती
अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पानी की मांग अचानक बढ़ जाती है, इसलिए विभाग को लगातार अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है।
इंदिरा गांधी नहर पर निर्भर है जोधपुर
जोधपुर और पश्चिमी राजस्थान के कई हिस्सों की जलापूर्ति मुख्य रूप से इंदिरा गांधी नहर परियोजना पर निर्भर करती है।
अधिकारियों के मुताबिक नहरबंदी के कारण पानी की सप्लाई प्रभावित हुई थी, लेकिन अब नहर में दोबारा पानी छोड़ा जाना शुरू हो गया है।
हालांकि अभी पानी का फ्लो सामान्य से कम है, जिससे जलापूर्ति की गति प्रभावित हो रही है।
राजेंद्र मेहता ने बताया कि राजस्थान और पंजाब की टीमें आपसी समन्वय के जरिए पानी के प्रवाह को तेज करने के प्रयास कर रही हैं।
18 मई तक का ही बचा है जल भंडारण
जलदाय विभाग के अनुसार मौजूदा स्टोरेज केवल 18 मई तक की जरूरतों को पूरा कर सकता है।
अधिकारियों को उम्मीद है कि:
- 18 मई से पहले नहर का जल प्रवाह सुधरेगा
- शहर की नियमित सप्लाई बहाल हो सकेगी
- टैंकरों पर निर्भरता कम होगी
लेकिन यदि पानी का प्रवाह सामान्य नहीं हुआ, तो शहर को और गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान जैसे शुष्क राज्यों में जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव आने वाले वर्षों में और बड़ी चुनौती बन सकता है।
पानी की बर्बादी रोकने के लिए विशेष अभियान
जलदाय विभाग ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी सौंपी है।
प्रशासन द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों में शामिल हैं:
- लीकेज की तुरंत मरम्मत
- अवैध जल कनेक्शनों की जांच
- सप्लाई के दौरान निगरानी
- सीमित समय के लिए जल वितरण
- जनजागरूकता अभियान
अधिकारियों ने कहा कि पानी की एक-एक बूंद बचाना वर्तमान समय में बेहद जरूरी हो गया है।
बिजली कटौती के जरिए पानी सप्लाई प्रबंधन
जल वितरण को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन ने एक अस्थायी रणनीति के तहत कुछ क्षेत्रों में पेयजल सप्लाई के दौरान बिजली कटौती करने का निर्णय लिया है।
अधिकारियों के अनुसार ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि पानी का दबाव संतुलित रहे और सप्लाई शहर के अंतिम छोर तक पहुंच सके।
हालांकि इस कदम को लेकर कुछ नागरिकों ने चिंता भी जताई है, क्योंकि भीषण गर्मी के दौरान बिजली कटौती लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है।
विधायक ने दिए त्वरित समाधान के निर्देश
बैठक के दौरान विधायक अतुल भंसाली ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पानी की सप्लाई शहर के “टेल एंड” यानी अंतिम छोर तक सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि:
- गर्मी में जल संकट से जुड़ी शिकायतों का तुरंत समाधान होना चाहिए
- टैंकर सप्लाई पारदर्शी तरीके से हो
- कमजोर इलाकों को प्राथमिकता दी जाए
इसके बाद विधायक ने जोधपुर सर्किट हाउस से पानी के टैंकरों को रवाना भी किया।
जल संकट और जलवायु परिवर्तन का बढ़ता प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि जोधपुर का वर्तमान संकट केवल स्थानीय समस्या नहीं बल्कि व्यापक जलवायु परिवर्तन और जल प्रबंधन चुनौतियों का संकेत है।
भारत के कई हिस्सों में:
- तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है
- भूजल तेजी से घट रहा है
- जल स्रोतों पर दबाव बढ़ रहा है
राजस्थान जैसे मरुस्थलीय क्षेत्रों में यह संकट और अधिक गंभीर हो सकता है।
संयुक्त राष्ट्र और पर्यावरण विशेषज्ञ पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि भविष्य में पानी की उपलब्धता वैश्विक स्तर पर बड़ी आर्थिक और सामाजिक चुनौती बन सकती है।









