चित्तौड़गढ़ के निंबाहेड़ा-चित्तौड़गढ़ हाईवे पर अज्ञात वाहन की टक्कर से तीन युवकों की मौत हो गई। हादसे के बाद तीनों करीब दो घंटे तक सड़क पर पड़े रहे। राहगीरों की सूचना पर पुलिस पहुंची और घायलों को अस्पताल ले गई।
चित्तौरगढ़: राजस्थान के Chittorgarh जिले में रविवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में तीन युवकों की मौत हो गई। मृतकों में दो मोसेरे भाई भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार तीनों युवक मोटरसाइकिल पर सवार होकर काम से लौट रहे थे, तभी एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।
यह हादसा निंबाहेड़ा-चित्तौड़गढ़ हाईवे पर लक्ष्मीपुरा गांव के पास हुआ। दुर्घटना के बाद घायल युवक करीब दो घंटे तक सड़क पर पड़े रहे। बाद में राहगीरों ने उन्हें देखा और अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।
काम से लौटते समय हुआ हादसा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मृतक मजदूरी का काम करते थे और घरों में पुट्टी (दीवार फिनिशिंग) का कार्य कर रहे थे।
मृतकों की पहचान मध्यप्रदेश के आगर निवासी गोविंद सिंह और झालावाड़ निवासी शेर सिंह तथा धर्मराज के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि गोविंद सिंह और शेर सिंह आपस में मोसेरे भाई थे।
तीनों पिछले लगभग 15 दिनों से निंबाहेड़ा में किराए के कमरे में रह रहे थे और आसपास के गांवों में निर्माण कार्य कर रहे थे।
रात में लौटते समय मारी टक्कर
Rajasthan Police के अनुसार रविवार रात तीनों युवक अपना काम खत्म करने के बाद बाइक से निंबाहेड़ा लौट रहे थे।
इसी दौरान रात करीब 11 बजे तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि तीनों युवकों के सिर में गंभीर चोटें आईं।
हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया।
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दो घंटे तक सड़क पर पड़े रहे घायल
स्थानीय पुलिस के मुताबिक दुर्घटना सुनसान इलाके में हुई, जिसके कारण घायल युवकों को तुरंत मदद नहीं मिल सकी।
करीब दो घंटे तक तीनों सड़क पर पड़े रहे। बाद में वहां से गुजर रहे राहगीरों ने उन्हें देखा और तुरंत एंबुलेंस तथा पुलिस को सूचना दी।
घायलों को निंबाहेड़ा जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने शुरू की जांच
निंबाहेड़ा सदर थाना पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त बाइक को कब्जे में ले लिया है।
पुलिस अब अज्ञात वाहन और उसके चालक की तलाश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आसपास लगे CCTV कैमरों और प्रत्यक्षदर्शियों की मदद से आरोपी वाहन की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया है।
प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल
यह घटना भारत में प्रवासी और दिहाड़ी मजदूरों की सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण कार्य से जुड़े हजारों मजदूर छोटे शहरों और कस्बों में किराए पर रहकर काम करते हैं। अक्सर देर रात काम से लौटते समय उन्हें असुरक्षित सड़कों और भारी वाहनों के बीच सफर करना पड़ता है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाईवे पर पर्याप्त रोशनी, निगरानी और आपातकालीन सहायता की कमी कई बार दुर्घटनाओं को और घातक बना देती है।
सड़क हादसों में भारत की चुनौती
भारत दुनिया में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाओं वाले देशों में शामिल है। तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना और दुर्घटना के बाद समय पर चिकित्सा सहायता न मिलना मौतों का प्रमुख कारण माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार “गोल्डन ऑवर” यानी दुर्घटना के बाद का पहला घंटा जीवन बचाने में बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस मामले में घायल युवकों का लंबे समय तक सड़क पर पड़े रहना हादसे की गंभीरता को और बढ़ाता है।
स्थानीय लोगों में शोक
घटना के बाद निंबाहेड़ा और आसपास के इलाके में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और दुर्घटनाग्रस्त लोगों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और दोषी वाहन चालक को जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।









