राजस्थान में फर्जी आधार कार्ड रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें DOIT और आधार केंद्र के कर्मचारी समेत 7 आरोपी गिरफ्तार किए गए। जांच में सामने आया कि फर्जी आधार का इस्तेमाल साइबर अपराध और अवैध गतिविधियों में हो रहा था।
Jaipur: फर्जी आधार कार्ड रैकेट पर ATS की बड़ी कार्रवाई राजस्थान ATS ने फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले नेटवर्क का खुलासा करते हुए DOIT और आधार केंद्र से जुड़े कर्मचारियों सहित 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी अपनी तकनीकी पहुंच का दुरुपयोग कर बायोमेट्रिक्स के जरिए फर्जी आधार तैयार कर रहे थे। जांच में सामने आया कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल साइबर ठगी, फर्जी बैंक खाते, सिम कार्ड और अन्य अवैध गतिविधियों में किया जा रहा था।
राजस्थान में फर्जी आधार रैकेट का भंडाफोड़, ATS की बड़ी कार्रवाई
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राजस्थान में फर्जी आधार कार्ड बनाने के संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। एटीएस (ATS) की सूचना पर कार्रवाई करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (DOIT) और आधार सेवा से जुड़े कई कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें प्रोग्रामर, सहायक प्रोग्रामर और संविदा कर्मी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी आधिकारिक आईडी और तकनीकी पहुंच का दुरुपयोग कर इस अवैध नेटवर्क को मदद पहुंचाई।
अब तक इस मामले में कुल सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी बायोमेट्रिक डेटा का इस्तेमाल कर आधार कार्ड तैयार कर रहे थे, जिनका उपयोग साइबर अपराध और संदिग्ध गतिविधियों में किया जा रहा था। इस खुलासे के बाद पूरे सिस्टम की सुरक्षा और डेटा हैंडलिंग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
भादरा से शुरू हुआ नेटवर्क, कई उपकरण भी बरामद
जांच की शुरुआत भादरा क्षेत्र में एक फर्जी आधार सेंटर के पकड़े जाने से हुई, जहां से आरोपी कुलदीप शर्मा को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से लैपटॉप, प्रिंटर, आईरिस और फिंगरप्रिंट डिवाइस, कैमरा और जीपीएस उपकरण समेत कई तकनीकी सामग्री बरामद की गई। इसके बाद जसवंत, बलराम और आमिर खान की भी गिरफ्तारी हुई।
जानकारी के अनुसार, यह सेंटर जसवंत और आमिर खान के नाम पर अलॉट था, लेकिन इसे फर्जी तरीके से चलाया जा रहा था। आरोप है कि इसमें सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से हनुमानगढ़ और अन्य स्थानों पर अवैध आधार निर्माण का काम किया जा रहा था।
साइबर अपराध और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में उपयोग
एटीएस के अनुसार, इस रैकेट द्वारा बनाए गए फर्जी आधार कार्ड का उपयोग फर्जी सिम कार्ड, बैंक खाते खोलने और साइबर ठगी में किया जा रहा था। इसके अलावा, कुछ मामलों में इनका इस्तेमाल संदिग्ध पासपोर्ट बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध गतिविधियों में भी होने की आशंका जताई गई है।
एटीएस अधिकारियों ने बताया कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। प्रारंभिक इनपुट के अनुसार, राजस्थान के अन्य शहरों में भी इसी तरह के फर्जी आधार सेंटर सक्रिय हो सकते हैं।
जांच जारी, बड़े नेटवर्क की आशंका
एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितने फर्जी आधार कार्ड बनाए गए और किन-किन माध्यमों से उनका उपयोग हुआ। यूआईडीएआई और DOIT के साथ मिलकर डेटा की जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा सकें।
अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक स्थानीय गिरोह नहीं, बल्कि एक बड़ा संगठित नेटवर्क हो सकता है, जो तकनीकी पहुंच का दुरुपयोग कर रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे और गिरफ्तारियों की संभावना भी जताई जा रही है।









