आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गठित SIT पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी बताया। उन्होंने कहा कि बिना FIR SIT का गठन कानूनसम्मत नहीं है और मामले की जांच CBI तथा ED को सौंपनी चाहिए
नई दिल्ली: अयोध्या स्थित Ram Mandir में कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की वैधता और प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपने की मांग की है।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि गठित एसआईटी केवल मामले को दबाने और कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए बनाई गई है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में मामले की निष्पक्ष जांच चाहती है, तो प्राथमिकी दर्ज कर मामले को Central Bureau of Investigation और Enforcement Directorate जैसी केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा जाना चाहिए।
एसआईटी की कानूनी स्थिति पर उठाए सवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि किसी भी गंभीर आपराधिक मामले की जांच सामान्य रूप से एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे बढ़ती है। उनका दावा है कि बिना प्राथमिकी दर्ज किए गठित की गई एसआईटी के अधिकारों और कानूनी आधार को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि एसआईटी के पास किसी को समन जारी करने, गिरफ्तार करने या छापेमारी करने जैसे अधिकार नहीं हैं, तो उसकी जांच की प्रभावशीलता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठते हैं। उनके अनुसार जनता को यह जानने का अधिकार है कि जांच किस कानूनी ढांचे के तहत संचालित की जा रही है। हालांकि राज्य सरकार की ओर से इस विषय पर अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है और जांच प्रक्रिया जारी है।
2021 के भूमि विवाद का भी किया उल्लेख
अपने बयान में केजरीवाल ने अयोध्या से जुड़े पुराने भूमि खरीद विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में भी कथित भूमि लेनदेन से जुड़े आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच तंत्र बनाया गया था, लेकिन उसके परिणाम सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हुए।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की जांचों की तरह वर्तमान जांच भी केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए। आम आदमी पार्टी का कहना है कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े वित्तीय मामलों में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
छोटे कर्मचारियों तक सीमित जांच का आरोप
केजरीवाल ने दावा किया कि मीडिया रिपोर्टों में ऐसे संकेत मिले हैं कि जांच का दायरा मुख्य रूप से निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित दिखाई दे रहा है। उनका तर्क है कि यदि लंबे समय तक किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को पूरे मामले की व्यापक पड़ताल करनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी भी स्तर पर किसकी क्या भूमिका रही। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और जांच एजेंसियों ने आधिकारिक रूप से कोई अंतिम निष्कर्ष जारी नहीं किया है।
सीबीआई और ईडी जांच की मांग
आम आदमी पार्टी लगातार यह मांग कर रही है कि मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी जाए। केजरीवाल का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से करानी है तो स्वतंत्र एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आरोप गंभीर हैं तो अब तक एफआईआर दर्ज कर विस्तृत आपराधिक जांच क्यों नहीं शुरू की गई। पार्टी का मानना है कि इससे जनता के बीच भरोसा बढ़ेगा और तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
![]()
संजय सिंह ने भी उठाए कई प्रश्न
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Sanjay Singh ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने जांच दल को कथित साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए समय मांगा है। संजय सिंह ने दावा किया कि उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं जो कुछ भूमि सौदों में मूल्य संबंधी अनियमितताओं की ओर संकेत करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसियां निष्पक्ष तरीके से सभी दस्तावेजों की जांच करें तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी।
चढ़ावे और संपत्तियों से जुड़े आरोपों पर बहस
राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा प्रबंधन और भूमि खरीद के मुद्दे हाल के दिनों में राजनीतिक चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। विपक्षी दल इन मामलों में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार और संबंधित संस्थाएं आरोपों को लेकर अपनी प्रक्रियाओं का पालन करने की बात कह रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक और सार्वजनिक महत्व की संस्थाओं से जुड़े वित्तीय मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना जनविश्वास के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। इसलिए ऐसे मामलों की जांच और निष्कर्षों को लेकर जनता की रुचि स्वाभाविक रूप से अधिक रहती है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
संजय सिंह ने सुझाव दिया कि मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में गठित किसी स्वतंत्र जांच व्यवस्था के माध्यम से की जानी चाहिए। उनका कहना है कि इससे जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता और निष्पक्षता को लेकर उठने वाले सवाल कम हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वे किसी भी पद या प्रभाव से जुड़े हों।
राजनीतिक और सामाजिक महत्व का मुद्दा
राम मंदिर देश के करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। ऐसे में उससे संबंधित किसी भी विवाद या आरोप का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव व्यापक हो सकता है। यही कारण है कि विभिन्न राजनीतिक दल इस मामले पर अपने-अपने दृष्टिकोण रख रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मामले में सत्यता और तथ्यों को सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच सबसे महत्वपूर्ण है। इससे न केवल आरोपों और प्रत्यारोपों की स्थिति स्पष्ट होगी बल्कि जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।
जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें
फिलहाल अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। एक ओर आम आदमी पार्टी जांच प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर संबंधित एजेंसियां और प्रशासन अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रहे हैं।
आने वाले समय में जांच से जुड़े निष्कर्ष और आधिकारिक रिपोर्टें इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगी। तब तक यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श और सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बना रहने की संभावना है।












