राजधानी रांची में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान यानी RIMS ने मरीजों के इलाज और आइसोलेशन के लिए अलग व्यवस्था करने की तैयारी की है। अस्पताल प्रबंधन ने कॉटेज के ग्राउंड फ्लोर को स्वाइन फ्लू से संबंधित मरीजों के लिए रिजर्व रखने का निर्णय लिया है। इससे संदिग्ध और संक्रमित मरीजों को सामान्य मरीजों से अलग रखने तथा संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन की नजर फिलहाल स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों पर है। मौसम में बदलाव और बारिश के बीच वायरल संक्रमण से जुड़े मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में RIMS ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है, ताकि अगर स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ती है तो उनके इलाज के लिए अलग स्थान और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहें।
RIMS रांची का सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सा संस्थान है, जहां झारखंड के अलग-अलग जिलों से गंभीर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन आते हैं। ऐसे में संक्रामक बीमारी के मरीजों को सामान्य वार्ड से अलग रखना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। RIMS के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार अस्पताल बरियातू में स्थित है और यहां विभिन्न विभागों में मरीजों के इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
नई व्यवस्था के तहत कॉटेज का ग्राउंड फ्लोर स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य मरीजों को अलग जगह पर रखकर उपचार उपलब्ध कराना है। इससे सामान्य वार्ड में संक्रमण फैलने की आशंका को कम किया जा सकेगा। अस्पताल प्रबंधन जरूरत के अनुसार यहां मरीजों के लिए बेड और उपचार संबंधी सुविधाओं की व्यवस्था करेगा।
RIMS में कॉटेज पहले से ही मौजूद हैं और इनमें अलग-अलग कमरे हैं। पहले इन कमरों का इस्तेमाल मरीजों और उनके परिजनों के लिए अलग-अलग व्यवस्था के रूप में किया जाता रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक RIMS में कुल 14 कॉटेज हैं, जिनमें सात कमरे ग्राउंड फ्लोर और सात प्रथम तल पर हैं। ऐसे में ग्राउंड फ्लोर को संक्रमण से जुड़े मरीजों के लिए रिजर्व करना अस्पताल के लिए एक व्यावहारिक व्यवस्था मानी जा रही है।
स्वाइन फ्लू को लेकर अस्पताल में अलग व्यवस्था बनाने का सबसे बड़ा कारण संक्रमण को नियंत्रित करना है। स्वाइन फ्लू एक वायरल श्वसन संक्रमण है और इसके लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और थकान जैसी समस्या हो सकती है। कुछ मरीजों में संक्रमण गंभीर रूप भी ले सकता है, खासकर जब मरीज पहले से किसी दूसरी बीमारी से जूझ रहा हो। इसलिए अस्पतालों में संदिग्ध और संक्रमित मरीजों की पहचान तथा उनका उचित प्रबंधन जरूरी होता है।
रांची में स्वाइन फ्लू के खतरे को देखते हुए RIMS की तैयारी को एहतियाती कदम के तौर पर देखा जा रहा है। अस्पताल में अलग स्थान उपलब्ध रहने से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों की निगरानी करने में भी सुविधा होगी। साथ ही सामान्य मरीजों और स्वाइन फ्लू के मरीजों के बीच संपर्क कम किया जा सकेगा।
अस्पताल में किसी संक्रामक बीमारी के मरीजों के लिए अलग वार्ड या क्षेत्र निर्धारित करने से संक्रमण नियंत्रण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है। मरीजों के प्रवेश, उपचार, निगरानी और डिस्चार्ज से जुड़ी प्रक्रिया को भी अलग तरीके से संचालित किया जा सकता है। इससे अस्पताल के दूसरे वार्डों पर संक्रमण का दबाव कम रखने में मदद मिल सकती है।
रांची में स्वाइन फ्लू को लेकर यह तैयारी ऐसे समय में की गई है जब देश के दूसरे हिस्सों में भी फ्लू के मामले सामने आ रहे हैं। बारिश के मौसम में अस्पतालों में वायरल संक्रमण से जुड़े मरीजों की संख्या बढ़ सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य संस्थानों के लिए पहले से बेड और आइसोलेशन की व्यवस्था रखना जरूरी हो जाता है।
RIMS में आने वाले मरीजों की संख्या को देखते हुए अलग व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाता है। अस्पताल में पहले से ही मेडिसिन, शिशु रोग, त्वचा, मनोरोग, ईएनटी, नेत्र, सर्जरी और ऑर्थोपेडिक सहित कई विभाग संचालित हैं। OPD कॉम्प्लेक्स में विभिन्न विभागों के मरीजों का इलाज होता है।
स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों को सामान्य OPD और वार्डों में अधिक समय तक रखने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए अलग स्थान पर जांच और उपचार की व्यवस्था मरीजों के साथ-साथ अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और दूसरे कर्मचारियों के लिए भी सुरक्षित मानी जाती है।
अस्पताल प्रबंधन की तैयारी का एक अहम पहलू यह भी है कि जरूरत पड़ने पर रिजर्व किए गए स्थान को तत्काल मरीजों के लिए इस्तेमाल किया जा सके। यदि मामलों में अचानक वृद्धि होती है तो अलग व्यवस्था पहले से तैयार रहने से अस्पताल को अतिरिक्त समय गंवाना नहीं पड़ेगा।
स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर मरीजों को लापरवाही नहीं करनी चाहिए। लगातार बुखार, खांसी, गले में परेशानी, सांस लेने में तकलीफ या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों में लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि हर वायरल बुखार को स्वाइन फ्लू मानना सही नहीं है। लक्षणों के आधार पर डॉक्टर जरूरी जांच की सलाह दे सकते हैं। इसलिए खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है। संक्रमण की पुष्टि होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार और सावधानी बरतनी चाहिए।
अस्पताल में भीड़ को नियंत्रित करना संक्रमण रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। मरीजों के साथ जरूरत से ज्यादा लोगों के अस्पताल आने पर भीड़ बढ़ती है और संक्रमण फैलने का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में अस्पताल की ओर से मरीजों और परिजनों के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
RIMS की यह तैयारी बताती है कि अस्पताल प्रशासन स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर सतर्क है। अलग व्यवस्था तैयार रहने से किसी भी संभावित बढ़ोतरी से निपटने में मदद मिल सकती है। फिलहाल कॉटेज का ग्राउंड फ्लोर रिजर्व रखने का फैसला संक्रमण नियंत्रण और मरीजों को अलग उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में उठाया गया कदम है।
रांची में स्वाइन फ्लू को लेकर बढ़ती चिंता के बीच लोगों के लिए भी सावधानी जरूरी है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर अनावश्यक जाने से बचना, हाथों की सफाई रखना, खांसते या छींकते समय मुंह ढंकना और बीमार होने पर दूसरों के संपर्क को कम करना संक्रमण के जोखिम को घटाने में मदद कर सकता है।
RIMS की ओर से की गई अलग व्यवस्था आने वाले दिनों में कितनी उपयोगी साबित होती है, यह स्वाइन फ्लू के मामलों की संख्या और अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों पर निर्भर करेगा। फिलहाल अस्पताल ने संभावित स्थिति से निपटने के लिए कॉटेज के ग्राउंड फ्लोर को रिजर्व करने की तैयारी कर ली है। इससे जरूरत पड़ने पर स्वाइन फ्लू मरीजों को सामान्य मरीजों से अलग रखकर इलाज देने का विकल्प उपलब्ध रहेगा।










