राफेल फाइटर जेट का स्वदेशीकरण शुरू: फ्रांस की थेल्स ने भारतीय कंपनी को दिया बड़ा रक्षा ठेका

राफेल फाइटर जेट का स्वदेशीकरण शुरू: फ्रांस की थेल्स ने भारतीय कंपनी को दिया बड़ा रक्षा ठेका

रक्षा क्षेत्र में भारत के स्वदेशीकरण और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को बड़ी कामयाबी मिली है। फ्रांस की एयरोस्पेस और डिफेंस क्षेत्र की प्रमुख कंपनी थेल्स ने राफेल फाइटर जेट में इस्तेमाल होने वाले एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे रडार के एक अहम हिस्से के निर्माण का ठेका एक भारतीय कंपनी को दिया है।

नई दिल्ली: भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। राफेल फाइटर जेट के स्वदेशीकरण (Indigenisation) की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई मजबूती देती है। फ्रांस की दिग्गज एयरोस्पेस और डिफेंस कंपनी थेल्स (Thales) ने भारतीय कंपनी एसएफओ टेक्नोलॉजीज (SFO Technologies) को राफेल फाइटर जेट में इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक रडार सिस्टम के एक अहम और तकनीकी रूप से जटिल पार्ट के निर्माण का ठेका दिया है।

भारत में बनेगा राफेल के AESA रडार का अहम हिस्सा

थेल्स ने स्पष्ट किया है कि राफेल फाइटर जेट में इस्तेमाल होने वाले RBE2 AESA (Active Electronically Scanned Array) रडार के लिए आवश्यक कॉम्प्लेक्स वायर्ड स्ट्रक्चर अब भारत में ही तैयार किए जाएंगे। यह रडार राफेल के कोर मिशन सिस्टम का हिस्सा है और इसकी भूमिका टारगेट को तेजी से पहचानने, ट्रैक करने और युद्ध स्थितियों में सटीक कार्रवाई करने में बेहद अहम होती है।

थेल्स के अनुसार, यह वायर्ड स्ट्रक्चर अत्यधिक तापमान, कंपन और कठोर पर्यावरणीय परिस्थितियों को सहन करने के लिए डिजाइन किया गया है। ऐसे हाई-एंड कंपोनेंट्स का भारत में निर्माण होना, देश की तकनीकी क्षमता में बड़े उछाल का संकेत है।

26 राफेल मरीन जेट्स के ऑर्डर के बाद तेज हुआ स्वदेशीकरण

यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है, जब भारत ने हाल ही में भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन फाइटर जेट्स का ऑर्डर दिया है। थेल्स, डसॉल्ट एविएशन की राफेल इंडस्ट्रियल टीम का प्रमुख साझेदार है और अब भारत में एक मजबूत लोकल मैन्युफैक्चरिंग रोडमैप पर काम कर रही है। कंपनी का कहना है कि इस रोडमैप के तहत भारतीय एयरोस्पेस और डिफेंस इकोसिस्टम में घरेलू कंपनियों के साथ गहरा तकनीकी और औद्योगिक सहयोग बढ़ाया जाएगा। इससे भारत केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि ग्लोबल डिफेंस सप्लाई चेन का अहम भागीदार बनता जा रहा है।

एसएफओ टेक्नोलॉजीज की भारत में कोच्चि, तिरुवनंतपुरम, बेंगलुरु और मैसूरु में अत्याधुनिक विनिर्माण इकाइयाँ हैं, जबकि अमेरिका में भी इसकी मौजूदगी है। यह कंपनी पहले से ही एयरोस्पेस, मेडिकल डिवाइसेज़ और डिफेंस सेक्टर में हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग समाधान प्रदान करती रही है। अब राफेल जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट के लिए महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स का निर्माण भारत में होना, देश के लिए रणनीतिक और तकनीकी दोनों दृष्टि से बड़ी उपलब्धि है।

RBE2 AESA रडार को दुनिया के सबसे उन्नत फाइटर रडार सिस्टम में गिना जाता है। यह मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग, बेहतर रेंज और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताओं से लैस है। ऐसे संवेदनशील सिस्टम के पार्ट्स का भारत में निर्माण होना, रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह पहल भारत की रक्षा उत्पादन नीति, तकनीकी हस्तांतरण और दीर्घकालिक सुरक्षा आवश्यकताओं को मजबूती देती है।

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